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खामेनेई या मोसाद! कौन है ईरान में हजारों प्रदर्शनकारियों की मौत का असली जिम्मेदार? जानें, क्रैकडाउन फैक्ट्स

ईरान में 2025-26 के बड़े प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा और हजारों मौतों के पीछे जिम्मेदार कौन आखिर कौन है? सुप्रीम लीडर अयातोल्लाह खामेनेई की भूमिका, सरकार का दमन, विदेशी नेताओं के आरोप-प्रत्यारोप और जमीनी हकीकत पर पढ़ें ये सिलसिलेवार विश्लेषण.

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ईरान ने प्रदर्शन और हिंसा के लिए इजरायल और यूएस पर आरोप लगाया है (फोटो-ITG/AP)
ईरान ने प्रदर्शन और हिंसा के लिए इजरायल और यूएस पर आरोप लगाया है (फोटो-ITG/AP)

Iran Protests 2026: ईरान एक बार फिर आक्रोश और सत्ता के टकराव की आग में जल रहा है. इस दौरान देश की सड़कों पर उतरे हजारों प्रदर्शनकारी या तो गोलियों का शिकार बने या जेलों में गुम हो गए हैं. तेहरान की सत्ता इन मौतों के लिए विदेशी ताकतों को जिम्मेदार ठहरा रही है और मोसाद का नाम ले रही है. वहीं, मानवाधिकार रिपोर्ट्स सीधे तौर पर खामेनेई के नेतृत्व वाले तंत्र पर उंगली उठा रही हैं. तो आखिर सच्चाई क्या है? विदेशी दखल या सत्ता का बेरहम कदम?

28 दिसंबर 2025
यही वो तारीख थी, जब ईरान के अंदर जनता ने विरोध प्रदर्शन शुरू किए, जिनका मूल कारण बढ़ती महंगाई, आर्थिक कठिनाइयां, बेरोज़गारी और रोज़मर्रा की वस्तुओं की भारी कीमतों में वृद्धि थी. शुरुआती प्रदर्शन स्थानीय बाजारों, व्यापारिक इलाकों और राजमार्गों पर केंद्रित रहे, लेकिन जल्द ही इनका रूप व्यापक राजनीतिक असंतोष में बदल गया. खामेनेई के शासन के ख़िलाफ़ सबसे बड़ी भीड़ जुटी, जिसने समाज के विभाजन, शासन की नीतियों और मौजूदा राजनैतिक ढांचे को चुनौती दे डाली. यह आंदोलन सिर्फ अर्थशास्त्र का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि बलपूर्वक शासन के खिलाफ विश्वास और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग बन गया.

हिंसक दमन की शुरुआत
ईरानी सुरक्षा बलों, खासकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और बसीज मिलिशिया ने विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए सख्त तरीके अपनाए. स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने बताया कि कई शहरों में सुरक्षा बलों ने सीधे गोलियां चलाईं, जिससे व्यापक मौतें हुईं. अस्पतालों में शव और घायल लोगों का अंबार लग गया; डॉक्टर्स थकावट से गिर पड़े और सरकारी दमन ने हिंसा को और बढ़ा दिया.

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मरने वालों की तादाद और आंकड़ों का अंतर
गोलीबारी में कई प्रदर्शनकारियों की जान चली गई. ये तादाद हजारों तक जा पहुंची. लेकिन सरकारी आंकड़ों और स्वतंत्र समूहों की रिपोर्टों में भारी अंतर है. ईरान सरकार ने लगभग 2,000 मौतों की बात मानी है, जबकि मानवाधिकार समूहों का अनुमान कहीं ज़्यादा है; कुछ रिपोर्टस् में 3,000 से 3,400 से अधिक मौतों का दावा किया गया है. कुछ मीडिया रिपोर्टस् और अधिकारों के आंकड़ों में 12,000 से ज़्यादा भी मौतों का दावा किया गया है, हालांकि इंटरनेट ब्लैकआउट और सूचना प्रतिबंधों के कारण सही आंकड़ा पुख़्ता नहीं है.

ईरान का दावा- USA और इज़राइल ज़िम्मेदार
ईरान के अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों की मौत और अशांति के लिए अमेरिका और इज़राइल को दोषी ठहराया है. इसके लिए विदेशी साज़िश का आरोप लगाया गया और ट्रंप - नेतन्याहू को सार्वजनिक रूप से मौतों का जिम्मेदार बताया गया. ईरानी मीडिया और सरकारी बयानों में प्रदर्शनकारियों को अल्लाह का दुश्मन और साबोटर बताया गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि आस-पास के देशों और विदेशी एजेंसियों को आंदोलन के पीछे की शक्ति बताया जा रहा है.

खामेनेई का इल्जाम
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातोल्लाह अली खामेनेई ने विरोध प्रदर्शनों को विदेशी साज़िश और देश के खिलाफ साजिश बताया. उन्होंने IRGC को उच्चतम अलर्ट पर रखा और कठोर दमन के आदेश जारी किए, जिससे सुरक्षा बलों की क्रूरता और बढ़ गई थी. राज्य नियंत्रण वाली मीडिया में खामेनेई के आदेश को समर्थन मिला, लेकिन वैश्विक आंकड़ों की तुलना में सरकारी मान्यता सीमित और संदेहास्पद रही.

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मोसाद, इज़राइल पर आरोप
कुछ ईरानी अधिकारियों ने यह दावा किया कि इज़राइल और अन्य विदेशी एजेंसियां आंदोलन में हस्तक्षेप कर रही हैं, लेकिन वास्तविक स्वतंत्र सबूत सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं. इस तरह के आरोप आमतौर पर राजनीतिक रेखाओं का हिस्सा होते हैं, जहां शासन किसी भी बाहरी शक्ति को विरोध का कारण बताकर स्थिति को नियंत्रित करता है. मौज़दा खुलासा यह है कि इस तरह के आरोपों को पुष्टि करने वाले स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं, और इज़राइल या मौसाद को प्रत्यक्ष रूप से प्रदर्शनकारियों की मौतों के लिए जिम्मेदार ठहराना शोध और तथ्य के स्तर पर ठोस नहीं है.

निंदा और प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने ईरान में हजारों लोगों के मारे जाने की निंदा की है और कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग हुआ. साथ ही यूरोपीय देशों और अमेरिका ने कड़ी निंदा की, प्रतिबंधों की धमकी दी. और इज़राइली हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज करते हुए राज्य के दमन को प्राथमिक कारण बताया.

ट्रंप प्रशासन और अमेरिकी बयानबाज़ी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य पश्चिमी नेताओं ने मृत्युदंड और हिंसा के लिए ईरान सरकार की आलोचना की है, साथ ही उन्होंने कहा कि अगर निष्पादन जारी रहा तो कड़ी कार्रवाई संभावित है. ईरानी अधिकारियों ने इन टिप्पणियों को और भी विदेशी दखल का रूप बताया, जिससे अमेरिका-ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया.

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विरोध पीछे की व्यापक राजनीतिक
प्रदर्शन केवल आर्थिक कारणों के कारण नहीं उठे, बल्कि इस्लामी शासन, सीमित राजनीतिक स्वतंत्रता, और सामाजिक असंतोष के कारण भी थे. ये जड़ें बड़ी रही हैं और पिछले विरोधों की तरह, जनता की मांगें केवल अधिकारियों के खिलाफ ही नहीं, बल्कि पूरे राजनैतिक ढांचे में बदलाव की थीं.

दमन से संकट तक
ईरान की प्रतिक्रिया में दमन, गिरफ्तारियां, मौत की सजा के फैसले और इंटरनेट ब्लॉक जैसी क़दम शामिल रहे. एक प्रदर्शनकारी इरफान सुल्तानी को फांसी के लिए तैयार होने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी. इन उपायों से देश के भीतर असंतोष और कड़े प्रतिबंधों के प्रति प्रतिक्रिया और तेज़ हुई. इसके बाद फिलहाल, सुल्तानी की फांसी टाल दी गई है.

मानवाधिकार संगठनों के बयान
मानवाधिकार समूहों ने ईरानी सरकार के कार्रवाई के तरीक़ों को भयानक और निष्पक्ष न्याय की कमी बताया है. कथित तौर पर कई प्रदर्शनकारियों को बिना मुक़दमे के मार दिया गया या मौत की सजा सुना दी गई. अंतरराष्ट्रीय निगरानी समूहों ने विश्व समुदाय से देश में कार्रवाई को रोकने के लिये अधिक दबाव डालने का आग्रह किया है.

मीडिया ब्लैकआउट
ईरानी सरकार ने इंटरनेट और फोन सेवाओं को ब्लॉक कर दिया, जिससे स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि मुश्किल हो गई. स्टारलिंक जैसी तकनीकों के माध्यम से कुछ जानकारी बाहर आ रही है, लेकिन एक व्यापक सूचना प्रतिबंध है. यह ब्लैकआउट मौतों और हिंसा की वास्तविक संख्याओं को छुपाने के एक यंत्र के रूप में देखा जा रहा है.

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कौन है असली जिम्मेदार?
अंततः उपलब्ध विश्वसनीय आंकड़ों से स्पष्ट है कि विरोध प्रदर्शनकारियों की मौतों के लिए मुख्य जिम्मेदार ईरानी सुरक्षा बल बताए जा रहे हैं, जिनके आदेश केंद्रीय नेतृत्व-विशेषकर खामेनेई के शासन-से सीधे जुड़े हैं. विदेशी एजेंसियों या मोसाद की भूमिका को लेकर अभी तक कोई ठोस प्रमाण नहीं है; इन आरोपों का इस्तेमाल राजनीतिक रक्षा रणनीति के रूप में किया गया है.

समाधान और वैश्विक भूमिका
स्थिति अब व्यापक अंतरराष्ट्रीय दबाव, मानवाधिकार संस्थाओं की जांच और राजनीतिक विचार विमर्श का केंद्र है. विश्व समुदाय को ईरानी अधिकारियों पर अधिक पारदर्शिता और शांतिपूर्ण समाधान की मांग जारी रखने की जरूरत है. एशिया, यूरोप और संयुक्त राष्ट्र के संगठनों ने पहले ही ईरान को हिंसा रोकने और शांतिपूर्ण बातचीत के लिये आग्रह किया है.

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