scorecardresearch
 

कोरोना का कहरः भारत में लॉकडाउन की 6 अलग-अलग थ्योरी, क्या मिलेगी राहत!

दुनियाभर के वैज्ञानिकों का मानना है कि लॉकडाउन से कोरोना का ये संक्रमण कंट्रोल तो नहीं किया सकता. हां मगर इसे तब तक टाला ज़रूर जा सकता है. जब तक इसकी कोई वैक्सीन सामने ना आ जाए. या जब तक हम अपनी मेडिकल सुविधाओं को दुरुस्त ना कर लें.

Advertisement
X
भारत में कोरोना से ग्रसित लोगों की संख्या 21000 के पार जा चुकी है (फोटो- PTI)
भारत में कोरोना से ग्रसित लोगों की संख्या 21000 के पार जा चुकी है (फोटो- PTI)

  • क्या 3 मई के बाद लॉक डाउन में मिलेगी छूट?
  • या जून-जुलाई तक जारी रहेगा लॉकडाउन?

भारत में कोरोना के मौजूदा मरीज़ों को देखते हुए अगर 3 मई को सरकार लॉकडाउन हटाती है, तो मानकर के चलिए कि मई-जून में कोरोना अपनी थर्ड स्टेज पर पहुंच सकता है. और थर्ड स्टेज में पहुंचने के बाद कुछ वक्त के लिए मरीज़ों की तादाद और तेज़ी से बढ़ेगी. तो फिर? क्या तीन मई के बाद तीसरे चरण में तीसरी बार भारत बंद किया जाएगा? तो आइए भारत में लॉकडाउन की सही तस्वीर को देखने और समझने के लिए लॉकडाउन से जुड़ी छह अलग-अलग थ्योरी पर नज़र डालते हैं.

लॉकडाउन की पहली थ्योरी

दुनियाभर के वैज्ञानिकों मानना है कि लॉकडाउन से कोरोना का ये संक्रमण कंट्रोल तो नहीं किया सकता. हां मगर इसे तब तक टाला ज़रूर जा सकता है. जब तक इसकी कोई वैक्सीन सामने ना आ जाए. या जब तक हम अपनी मेडिकल सुविधाओं को दुरुस्त ना कर लें. वेल्लूर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज से रिटायर्ड क्लिनिकल विरोलॉजिस्ट प्रोफेसर टी.जैकब जॉन के मुताबिक अगर एक बार भारत में लॉकडाउन खुला तो ये मामले बहुत तेज़ी से ऊपर जाएंगे. और बिना तैयारी के इसे संभालना मुश्किल होगा.

Advertisement

कोरोना पर फुल कवरेज के लि‍ए यहां क्लिक करें

लॉकडाउन की दूसरी थ्योरी

इंडियन चेस्ट सोसायटी के मुताबिक भारत कोरोना के मामले में अमेरिका से एक से दो हफ्ते पीछे चल रहा है. और यहां कोरोना अपनी पीक पर अप्रैल के आखिर या मई के शुरुआती हफ्ते में पहुंचेगा. हां मगर अगर लॉकडाउन जारी रहा तो इस खतरे को टाला जा सकता है. हालांकि भारत 3 मई को इस लॉकडाउन की हटाने की स्थिति में तब ही हो सकता था. जब उसने वक्त रहते वेंटिलेटर्स, पीपीई किट और क्वॉरेंटीन सेंटर बना दिए होते. मगर आज के हालात में लॉकडाउन खोलने में जल्दी करना घातक हो सकता है.

लॉकडाउन की तीसरी थ्योरी

इंग्लैंड के नेशनल हेल्थ सर्विसेज़ में एक्सीडेंट और इमरजेंसी कंसेल्टेंट डॉ नीरज पाटिल के मुताबिक इंग्लैंड में भले सवा लाख से ज़्यादा कोरोना के केस हो. मगर अभी भी कोरोना वहां पीक पर नहीं पहुंचा है. और आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस के आंकड़ों के मुताबिक यहां मई के महीने में कोरोना अपनी पीक पर होगा. जबकि भारत उससे पीछे चल रहा है लिहाज़ा यहां जून-जुलाई के महीने में कोरोना अपनी पीक पर पहुंचेगा. और इस दौरान भारत को एक एक कदम फूंक फूंक कर रखना होगा.

लॉकडाउन की चौथी थ्योरी

भारत की सरकार का खुद ये अनुमान है कि देश में कोरोना के मामले मई के पहले हफ्ते में पीक पर पहुंच सकते हैं. जबकि उसके बाद इसके नंबर में कमीं आनी शुरू हो जाएगी. हालांकि गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से भारत में कोरोना के मरीज़ों की तादाद बाकी मुल्कों के मुकाबले काफी कम है. राजस्थान, पंजाब और बिहार जैसे राज्य जिन्होंने पहले ही लॉकडाउन कर दिया था. वहां इन मामलों में ज़्यादा उछाल नहीं आया है, जबकि यूपी गुजरात महाराष्ट्र जैसे राज्य जिन्होंने केंद्र सरकार के ऐलान के बाद ही पूरी तरह से लॉकडाउन किया, वहां ये मामले ज़्यादा हैं. सूत्रों के मुताबिक भारत में अगला हफ्ता बहुत अहम है. क्योंकि धीरे-धीरे भारत में टेस्टिंग की रफ्तार बढ़ती जा रही है और मुमकिन है कि अगले हफ्ते तक कोरोना पॉज़िटिव मामलों की तादाद काफी उछाल देखने को मिले.

Advertisement

लॉकडाउन की पांचवीं थ्योरी

ज़ाहिर है भारत को पहले कोरोना के पीक पर पहुंचने के बाद के खतरे के लिए खुद को तैयार करना होगा और तब ही लॉकडाउन हटाने के बारे में फैसला करना सुरक्षित होगा. खुद पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह दुनियाभर के वैज्ञानिकों का हवाला देते हुए कह रहे हैं कि हिंदुस्तान में कोरोना सितंबर के मध्य तक अपनी पीक पर पहुंचेगा. और तब इससे 80 से 85 फीसदी भारत के हिस्से प्रभावित हो जाएंगे. इतना ही नहीं भारत के करीब 58 फीसदी लोग तब कोरोना की गिरफ्त में होंगे.

लॉकडाउन की छठी थ्योरी

गर्मी और कोरोना के कनेक्शन को लेकर भी तमाम तरह की बातें सामने आ रहीं हैं. मसलन गर्मी आने पर कोरोना का असर कम हो सकता है. मगर जानकारों का मानना है कि आंख बंद कर लेने से ये खतरा टलने वाला नहीं है. क्योंकि ऐसा होगा इसकी उम्मीद कम है. दुनिया में कुछ ऐसे मुल्कों में भी कोरोना ने तबाही मचाई है. जहां जनवरी से लेकर अप्रैल के महीनों में गर्मी पड़ती है. वेल्लूर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज से रिटायर्ड क्लिनिकल विरोलॉजिस्ट प्रोफेसर टी.जैकब जॉन के मुताबिक अव्वल तो ऐसी उम्मीद है नहीं. लेकिन अगर ऐसा हुआ भी तो सर्दियां आते-आते कोरोना फिर से बैक फायर करेगा.

Advertisement

कोरोना कमांडोज़ का हौसला बढ़ाएं और उन्हें शुक्रिया कहें...

हम आपको डराना नहीं चाहते. मगर दुनिया के कई और वैज्ञानिक ऐसे भी हैं. जो भारत की स्थिति को देखते हुए ये अनुमान लगा रहे हैं कि भारत को कोरोना के प्रकोप से निकलते निकलते ये 2020 का साल गुज़र जाएगा. हालांकि उससे पहले ये उम्मीद की जा रही है कि कोरोना वायरस से लड़ने वाली वैक्सीन तैयार हो जाएगी. कुछ अच्छा होने के लिए दुआ मांगना अच्छी बात है. मगर इससे ये खतरा टलने वाला भी नहीं है.

तो सवाल ये है कि आखिर हम कैसे इस महामारी से लड़ें. कैसे हमारी मेडिकल सुविधाओं को कोरोना से लड़ने के लिए तैयार किया जाए. क्या हमारे पास कोरोना के बढ़ते मामलों के हिसाब से वेंटिलेटर मौजूद हैं. जानकारों का कहना है कि वेंटिलेटर से ज़्यादा हमारे देश को पीपीई किट की ज़रूरत है क्योंकि इसकी कमी की वजह से डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ कोरोना की चपेट में आ रहे हैं. और अगर ऐसे ही चलता रहा तो मेडिकल स्टाफ की कमी का खामियाज़ा भी भारत को बहुत जल्द भुगतना पड़ सकता है. क्योंकि जब डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ ही नहीं बचेंगे तो इलाज कौन करेगा. इस गलती का नतीजा इटली, स्पेन, फ्रांस और जर्मनी के अलावा अमेरिका जैसे देश भुगत रहे हैं. अब हमें उनसे सीखने की ज़रूरत है.

Advertisement

Advertisement
Advertisement