People are on the streets against the Islamic regime in all 31 provinces of Iran ईरान इस समय गंभीर आर्थिक संकट के बीच देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों की चपेट में है. बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और डॉलर के मुकाबले कमजोर होती मुद्रा (ईरानी रियाल) ने आम जनता के गुस्से को और भड़का दिया है. सरकार द्वारा इंटरनेट और फोन सेवाओं पर सख्त पाबंदियां लगाए जाने के बावजूद प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. ये आंदोलन 2022 के बाद इस्लामिक गणराज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती माने जा रहे हैं. प्रदर्शन ईरान के सभी 31 प्रांतों में फैल चुके हैं, जिनमें बड़े शहरों से लेकर दूरदराज के इलाके शामिल हैं.
इन विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत ईरान की संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था के कारण आम लोगों को हो रही परेशानियों से हुई, लेकिन अब ये देश के इस्लामी शासन के खिलाफ व्यापक असंतोष में बदल चुके हैं. हालात काबू में रखने के लिए ईरान की सरकार ने इंटरनेट और दूरसंचार सेवाएं बंद कर दी हैं ताकि प्रदर्शनकारियों के समन्वय और सूचना के प्रसार को रोका जा सके. मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक ईरान में अब तक कम से कम 62 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक होने की आशंका है. इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की प्रदर्शनकारियों को 'उनकी जगह बताने' की कड़ी चेतावनी जारी करने के बाद सुरक्षा बलों ने कार्रवाई और तेज कर दी है. ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों से जुड़े हर पल के अपडेट यहां पढ़ें...
बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में रहने वाले ईरानियों ने ईरानी दूतावास के बाहर प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ नारे लगाए और ईरान में जारी राष्ट्रीय आंदोलन के समर्थन में एकजुटता जताई. उन्होंने देश के भीतर प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ खड़े होने का संदेश दिया.
रूस, चीन और ईरान के बीच बढ़ती रणनीतिक नज़दीकियों का एक बड़ा संकेत दक्षिण अफ्रीका के समुद्री क्षेत्र से सामने आया है. तीनों देशों ने BRICS Plus के तहत एक हफ्ते तक चलने वाले संयुक्त नौसैनिक अभ्यास की शुरुआत की है. दक्षिण अफ्रीका का कहना है कि यह अभ्यास समुद्री व्यापार और शिपिंग की सुरक्षा से जुड़ा है, लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात में इसे एक अहम भू-राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है.
पढ़ें पूरी रिपोर्ट- रूस-चीन के साथ ईरान की गुटबाजी, एकजुट हुए BRICS के कई देश... क्या समुद्र में चल रही जंग की तैयारी?
ईरान के पूर्व शाह के बेटे और निर्वासित नेता रेजा पहलवी ने ईरानियों से शहरों के केंद्रों पर कब्जा करने और उन्हें बनाए रखने की अपील की है. उन्होंने खासतौर पर ट्रांसपोर्ट, तेल, गैस और ऊर्जा सेक्टर के कर्मचारियों से देशव्यापी हड़ताल शुरू करने को कहा.
वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे अभी पहलवी का समर्थन नहीं करेंगे. मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक प्रदर्शनों में अब तक 65 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,500 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं.
ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने बढ़ते प्रदर्शनों के बीच देश में एकता बनाए रखने की अपील की है. उन्होंने कहा कि कुछ प्रदर्शनकारी अमेरिका को खुश करने के लिए सड़कों पर हिंसा कर रहे हैं. खामेनेई ने राष्ट्रपति ट्रंप को अपने देश की समस्याओं पर ध्यान देने की सलाह दी और कहा कि ईरान किसी दबाव के आगे नहीं झुकेगा. वहीं ईरान ने अमेरिका पर अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाते हुए संयुक्त राष्ट्र में शिकायत भी दर्ज कराई है.
ईरान की सेना ने अपने नागरिकों से 'दुश्मन की साजिशों' को नाकाम करने के लिए सतर्क रहने का आग्रह किया. ईरानी सेना ने कहा कि वह देश के राष्ट्रीय हितों, रणनीतिक बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करने के लिए दृढ़ संकल्पित है.
ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने शनिवार को प्रदर्शनकारियों से दो और रातों तक अपने प्रदर्शन जारी रखने और शहर के केंद्रों पर कब्जा करने का आह्वान किया, साथ ही ऊर्जा और परिवहन श्रमिकों से राष्ट्रव्यापी हड़ताल शुरू करने का आग्रह किया. उन्होंने यह भी कहा कि वह ईरान लौटने की तैयारी कर रहे हैं और उन्होंने ईरानी लोगों के साथ खड़े रहने का वादा किया, जिसे उन्होंने राष्ट्रीय क्रांति की विजय बताया, और कहा कि उन्हें विश्वास है कि ऐसा क्षण तेजी से नजदीक आ रहा है.
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ क्रूर और हिंसक कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है. एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि इंटरनेट को पूरी तरह से बंद करने का उद्देश्य मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किए जा रहे अपराधों की वास्तविक भयावहता को छिपाना है, जो वे विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए कर रहे हैं. नॉर्वे स्थित एनजीओ ईरान ह्यूमन राइट्स ने एक दिन पहले जारी किए गए 45 मृतकों के आंकड़े को बढ़ाते हुए कहा कि सुरक्षा बलों द्वारा कम से कम 51 प्रदर्शनकारियों को मार दिया गया है, जिनमें नौ बच्चे भी शामिल हैं, और सैकड़ों अन्य घायल हुए हैं.
ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X ने ईरान के झंडे का प्रतीक बदल दिया है. आप पूरी ख़बर को यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं. ईरान में बवाल के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X ने बदला ईरान का झंडा, शाही लायन एंड सन प्रतीक की हुई वापसी
ईरान के वरिष्ठ अधिकारी और विचारक हसन रहिमपुर अजघादी ने शुक्रवार को कहा कि ईरान को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उसी तरह गिरफ्तार कर लेना चाहिए, जैसे उन्होंने मादुरो को किया. ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, अजघादी की यह टिप्पणी अमेरिका द्वारा ईरान में हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर अपनाए गए रुख के जवाब में थी. अजघादी ने कहा, 'ट्रंप के रुख को देखते हुए, अमेरिकी क्षेत्र के भीतर, उसके सभी राज्यों और शहरों में, उसके द्वारा ईरान में कराए जा रहे विनाशकारी अभियानों की तरह अमेरिकी अधिकारियों और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई जायज होगी….'
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने शनिवार को ईरान में प्रदर्शनकारियों की हत्या की कड़ी निंदा करते हुए ईरानी शासन द्वारा अपने ही लोगों के खिलाफ हिंसा, मनमानी गिरफ्तारी और धमकी के इस्तेमाल की भर्त्सना की. एक बयान में प्रधानमंत्री कार्नी ने कहा कि कनाडा ईरानी जनता के साथ एकजुटता से खड़ा है और इस बात पर जोर देता है कि स्वतंत्रता और सम्मान की उनकी मांग को पूरा किया जाना चाहिए.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खामेनेई के नेतृत्व वाले इस्लामी शासन को चेतावनी देते हुए कहा, 'ईरान बड़ी मुसीबत में है. लोग कुछ ऐसे शहरों पर कब्ज़ा कर रहे हैं जिनके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं था... हम स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं... अगर वे (ईरान सरकार) पहले की तरह लोगों को मारना शुरू कर देते हैं, तो हम दखल देंगे. हम उन पर वहीं करारा प्रहार करेंगे जहां उन्हें सबसे ज्यादा दर्द होगा... ऐसे मामले भी सामने आए हैं जहां राष्ट्रपति ओबामा पूरी तरह पीछे हट गए थे... ईरान ने अपने लोगों के साथ बुरा बर्ताव किया और अब उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है... हम इस पर कड़ी नजर रख रहे हैं.'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को ईरान के नेतृत्व को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा, 'बेहतर होगा कि आप गोलीबारी शुरू न करें, क्योंकि हम भी गोलीबारी शुरू कर देंगे.'
ईरान के सर्वोच्च नेता, अयातुल्ला अली खामेनेई ने शनिवार को विश्वास व्यक्त किया कि ईरानी लोग जल्द ही विजय का अनुभव करेंगे. उन्होंने X पर एक पोस्ट में लिखा, 'ईश्वर की कृपा से, बहुत जल्द सभी ईरानी लोगों के दिलों में विजय की भावना आए.'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग न करने के लिए ईरानी अधिकारियों को बार-बार चेतावनी दी है और हत्याएं होने पर कड़ी जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है. ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिकी चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए देश में चल रही हालिया अशांति के लिए विदेशी हस्तक्षेप को जिम्मेदार ठहराया है. ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस्लामी गणराज्य को बचाना उनकी प्राथमिकता है. इस बीच, दूसरे देशों में निर्वासन में रह रहे ईरान के विपक्षी नेताओं ने इस्लामी शासन विरोधी प्रदर्शनों का समर्थन किया है.
एलन मस्क के स्वामित्व वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X ने ईरान के राष्ट्रीय ध्वज के इमोजी को इस्लामी क्रांति के पूर्व वाले झंडे की इमोजी से बदल दिया है. यह बदलाव तब हुआ जब X के प्रोडक्ट हेड ने एक यूजर के अनुरोध पर इस बदलाव पर काम करने की बात कही. इसके परिणामस्वरूप, ईरान सरकार के कुछ आधिकारिक X हैंडल्स पर अब शेर और सूर्य के प्रतीक वाला पुराना हरा-सफेद-लाल झंडा दिखाई दे रहा है. यह प्रतीक ईरान के प्रवासी समुदाय के उन हिस्सों में लोकप्रिय है जो वर्तमान इस्लमी शासन का विरोध करते हैं.
ईरान में 8 जनवरी से पूरे देश में इंटरनेट बंद होने के बावजूद, सरकार विरोधी प्रदर्शनों के केंद्र राजधानी तेहरान में बड़ी संख्या में लोग डटे हुए हैं. रियाल की गिरती कीमत और अत्यधिक महंगाई ने तेहरान के ग्रांड बाजार में विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया, जो बाद में हिंसक सरकार-विरोधी रैलियों में तब्दील हो गए, जिनमें सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ 'तानाशाह मुर्दाबाद' के नारे लगाए जा रहे हैं. पुनाक, शरियाती स्ट्रीट और मध्य तेहरान के कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा बलों के साथ झड़प हुई, जिसमें आंसू गैस और गोलियां चलाई गईं. उग्र प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों, वाहनों और सरकारी समाचार संस्थानों में आग लगा दी और 1979 से पहले के ईरानी झंडे लहराए गए. राजधानी तेहरान में ईरानी सुरक्षा बलों की भीषण दमनकारी कार्रवाई के दौरान कई लोगों के मारे जाने की खबर है.
ईरान में इस्लामी शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के तीव्र होने आने के बाद, अली खामेनेई के निर्देश पर सुरक्षा बलों ने कई जगहों पर बल प्रयोग किया है. तेहरान के एक डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर टाइम मैगजीन को बताया कि राजधानी तेहरान के सिर्फ छह अस्पतालों में कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है, जिनमें से अधिकांश की मौत गोली लगने से हुई है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह फिलहाल ईरान के आखिरी शाह के निर्वासित बेटे रजा पहलवी से मिलने के इच्छुक नहीं हैं. इससे संकेत मिलता है कि वह किसी भी विपक्षी नेता का समर्थन करने से पहले ईरान के अंदरूनी संकट का समाधान देखना चाहते हैं. रेडियो होस्ट ह्यू हेविट से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अभी किसी नेता को ईरान की सत्ता के उत्तराधिकारी के रूप में नामित करना जल्दबाजी होगी. उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि हमें सबको मौका देना चाहिए और देखना चाहिए कि कौन उभरता है. मुझे यकीन नहीं है कि ऐसा करना उचित होगा.' वॉशिंगटन के पास रहने वाले रजा पहलवी ईरानियों से बड़े पैमाने पर प्रदर्शन जारी रखने का आग्रह कर रहे हैं और उन्होंने मजबूत अंतरराष्ट्रीय समर्थन की मांग की है. उन्होंने शुक्रवार को एक पोस्ट में ट्रंप से सीधे तौर पर इस संकट में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की थी. पहलवी ने लिखा, 'आपने साबित कर दिया है और मैं जानता हूं कि आप शांतिप्रिय और अपने वचन के पक्के इंसान हैं. कृपया ईरान के लोगों की मदद के लिए हस्तक्षेप करने को तैयार रहें.'
ईरानी प्रदर्शनकारियों ने तेहरान की अल-रसूल मस्जिद में आग लगा दी. ईरान की राजधानी और आसपास के शहरों में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के फैलने से तेहरान में तनाव तेजी से बढ़ रहा है. कराज में एक नगरपालिका भवन में आग लगा दी गई, जबकि सआदत आबाद में भारी भीड़ जमा हो गई और 'खामेनेई मुर्दाबाद' के नारे लगे. ईरान में इंटरनेट और अन्य संचार माध्यमों पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है.