scorecardresearch
 

8 साल में 15 बार छुट्टियां और 405 दिन की आजादी... उम्रकैद के बावजूद रेपिस्ट-कातिल राम रहीम को कैसे मिल जाती है पेरोल?

रेप और मर्डर में उम्रकैद की सजा काट रहा गुरमीत राम रहीम 8 साल में 15वीं बार पेरोल-फरलो पर जेल से बाहर आया है. कुल मिलाकर वो 405 दिन की आज़ादी हासिल कर चुका है. शर्मनाक बात ये है कि इस शख्स की खातिर हरियाणा सरकार ने जेल कानून तक बदल डाला.

Advertisement
X
गुरमीत राम रहीम को अलग-अलग बहानों से छुट्टी मिलती है (फोटो-ITG)
गुरमीत राम रहीम को अलग-अलग बहानों से छुट्टी मिलती है (फोटो-ITG)

Gurmeet Ram Rahim Parole Controversy: उसने रेप किया. वो कातिल भी है. उसे उम्रकैद की सजा भी मिली है. साथ में 20 साल कैद की सजा भी उसे मिली. मगर इसके बावजूद कानून का मजाक देखिए कि वो हर साल छुट्टियां मनाने जेल से बाहर आ जाता है. सिर्फ 8 साल हुए हैं उसे जेल गए हुए और इन आठ वर्षों में उसने 15 अलग-अलग किश्तों में 415 दिन जेल के बाहर गुजारे हैं. यानी वो करीब 13 महीने जेल के बाहर छुट्टियां मना चुका है. अब एक बार फिर वो जेल से बाहर आया है. हम बात कर रहे हैं एक रेपिस्ट-कातिल बाबा की.

जब दरवाजे के बाहर खुद कानून नतमस्तक खड़ा हो तो फिर कोई रेपिस्ट या कातिल अपनी गाड़ी के पहियों तले इंसाफ को धूल में कैसे ना मिलाए. हरियाणा के अलावा देश में शायद ही किसी राज्य या राज्य की पुलिस ने ऐसी तस्वीर दिखाई हो. हरियाणा पुलिस की दो गाड़ियां. जिनमें से एक पर तो बाकायदा एसएचओ भी लिखा हुआ है. सोमवार सुबह लगभग साढे ग्यारह बजे दोनों गाड़ियां रोहतक की सुनरिया जेल के बाहर अपने एक खास मेहमान के स्वागत के लिए वक्त से पहले आकर खड़ी हुई थी. दिन के जैसे ही पौने बारह बजते हैं, वो खास मेहमान बाहर आता है और फिर बाकायदा हूटर की आवाज और गाड़ियों के काफिले के साथ पूरे सिस्टम को धूल में मिलाता हुआ, कुछ बेबाक वीआईपी अंदाज में निकल जाता है. 

Advertisement

एक उम्रकैद और उसी उम्र में से बाकी के 20 साल कैद की सजा जिसे मिली हो, जो दो-दो साध्वियों का रेपिस्ट हो, जिसे अदालत ने घोषित कातिल करार दिया हो, वही गुरमीत राम रहीम सिंह इंसा हरियाणा सरकार और हरियाणा सरकार के एक कृपा वाले कानून के सहारे एक बार फिर जेल से बाहर आ चुका है. पिछले आठ सालों में वो कुछ इसी अंदाज में अब 15वीं बार जेल से बाहर आया है.

ना ढूंढने से मिला, ना याद को याद आ रहा है कि देश में इससे पहले किसी रेपिस्ट या कातिल के साथ सरकार, कानून, पुलिस या सिस्टम ने ऐसी मोहब्बत, हमदर्दी या अपनापन दिखाया हो. मतलब एक आदमी या परिवार भी साल में इतनी छुट्टियां नहीं मनाता होगा जितनी छुट्टियां हरियाणा सरकार इस बलात्कारी या कातिल को देती है. ढूंढ कर ढूंढ लीजिए और कहीं मिल जाए तो बताइए कि क्या इस देश में किसी कातिल या बलात्कारी को जो उम्रकैद और अलग से 20 साल की सजा काट रहा हो, जिसे जेल गए हुए सिर्फ 8 साल हुए हो, उन 8 सालों में 15 किश्तों में 405 दिन की आजादी राम रहीम के अलावा किसी और कैदी को मिली है?

28 अगस्त 2017 - दो साध्वियों के साथ रेप के मामले में 20 साल की सजा 
17 जनवरी 2019 - पत्रकार रामचंद्र छत्रपति मर्डर केस में उम्रकैद की सजा

Advertisement

24 अक्टूबर 2020 - पहली बार एक दिन की पेरोल 
07 फरवरी 2022 - 21 दिन का पेरोल 
17 जून 2022 - 30 दिन की पेरोल 
अक्टूबर 2022 - 40 दिन की पेरोल 
21 जनवरी 2023 - 40 दिन की पेरोल 
20 जुलाई 2023 - 30 दिन की पेरोल 
20 नवंबर 2023 - 21 दिन की पेरोल 
19 जनवरी 2024 - 50 दिन की पेरोल 
13 अगस्त 2024 - 21 दिन की फरलो 
01 अक्टूबर 2024 - 20 दिन की फरलो 
28 जनवरी 2025 - 30 दिन की पेरोल 
09 अप्रैल 2025 - 21 दिन की फरलो 
05 अगस्त 2025 - 40 दिनों की पेरोल 
03 जनवरी 2026 - 40 दिन की पेरोल 

लगभग 8 साल में कुल 405 दिन रेपिस्ट बाबा राम रहीम जेल के बाहर रहा है. पंद्रवही बार राम रहीम ने जेल से बाहर जाने के लिए जो दलील दी वो ये की डेरा सच्चा सौदा के दूसरे गुरु शाह सतनाम सिंह की बर्थ एनिवर्सरी है. उसमें शामिल होने के लिए राम रहीम ने 40 दिन की पेरोल मांगी. रोहतक के डिविजनल कमिश्नर ने राम रहीम की अर्जी हमेशा की तरह फौरन मंजूर कर ली और 5 जनवरी को राम रहीम सुनरिया जेल से दनदनाता हुआ निकला और सिरसा में अपने आश्रम जा पहुंचा. हरियाणा सरकार की राम रहीम को लेकर इस मोहब्बत के बारे में जब सवाल पूछा गया तो कमाल ये कि मुख्यमंत्री नायब सिहं सैनी ने सीधे थैंक्यू बोल दिया.

Advertisement

कमाल ये है कि राम रहीम रेप और मर्डर के दो मामलों में उम्रकैद और 20 साल की सजा तो काट ही रहा है, इसके अलावा अभी कम से कम 5 ऐसे मामले हैं जो कोर्ट में लंबित हैं. जिनमें कई गवाहों की गवाहियां होनी बाकी हैं. जाहिर है वो गवाह भी डरे हुए हैं. क्योंकि बाहर आकर राम रहीम आसानी से उन गवाहों को डरा धमका सकता है. इतना ही नहीं रेप के जिन दो मामलों में उसे सजा हुई है, उनके पीड़ितों को भी खतरा है.

जिस पत्रकार रामचंद्र छत्रपति ने राम रहीम का कच्चा चिट्ठा खोला था और जिसकी वजह से राम रहीम ने रामचंद्र का कत्ल करवा दिया. उनके बेटे अंशुल का तो मानना है कि बार बार पेरोल और फरलो के नाम पर राम रहीम को बाहर भेजने की बजाय हरियाणा सरकार को सीधे उसे छोड़ ही देना चाहिेए. दरअसल, राम रहीम को जेल गए जब 5 साल हो चुके थे, तब हरियाणा सरकार ने राज्य में सजायाफ्ता कैदियों के लिए पेरोल और फरलो का पूरा नियम ही बदल डाला था.

पहले पंजाब और हरियाणा में पेरोल और फरलो को लेकर एक ही कानून था. लेकिन सिर्फ और सिर्फ राम रहीम को फायदा पहुंचाने के लिए मई 2022 में हरियाणा सरकार जेल नियम के तहत एक नया एक्ट लेकर आई जिसका नाम था प्रिजनर गुड कनडक्ट टेंपरेरी लीव एक्ट 2022. इस नए एक्ट में ये प्रावधान था कि सजायाफ्ता कैदी साल में दो बार 40-40 दिनों की पेरोल ले सकते हैं. हालांकि ये पेरोल या फरलो अमूमन हीनियस क्राइम यानि जघन्य अपराध करने वाले को नहीं मिलती. लेकिन हरियाणा सरकार ने खेल ये किया कि उसने दो दो साध्वियों से रेप और एक पत्रकार का मर्डर करने के बावजूद राम रहीम को जघन्य अपराधी नहीं माना. जिसका फायदा राम रहीम 8 सालों में 15 बार छुट्टियां लेकर उठा चुका है.

Advertisement

अब आप ही बताएं अगर रेप और मर्डर करने वाला अपराधी हीनियस क्राइम की कैटेगरी में नहीं आएगा तो फिर कौन आएगा? लेकिन सरकार मेहरबान हो तो कुछ भी हो सकता है. उसी सरकार, कानून और सिस्टम को ठेंगा दिखाते हुए जब जब राम रहीम बाहर आता है तो ये बता जाता है कि उसके आगे कोई कुछ नहीं. असली गुरु वही है.

हरियाणा के मुख्यमंत्री समेत पूरी हरियाणा सरकार ये कहते नहीं थकती कि राम रहीम को बार बार पेरोल या फरलो कानून के तहत मिल रहा है. इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है. लेकिन इसी हरियाणा में पिछले 8 सालों के अंदर राम रहीम के अलावा किसी और रेपिस्ट या कातिल को 405 दिन की छुट्टी मिली हो उसका कोई रिकॉर्ड ढूंढे नहीं मिलता. जिस पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के कत्ल के इल्जाम मे राम रहीम को उम्रकैद की सजा मिली है, उन्हीं रामचंद्र के बेटे ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वो इस मामले में खुद दखल दे.

फिलहाल हरियाणा सरकार और कानून की कृपा से अगले 40 दिनों तक राम रहीम सिरसा के अपने उसी आश्रम में रहेगा, जहां से 8 साल पहले 2017 में उसकी बारात निकली थी. 40 दिनों की गिनती के हिसाब से इस बार राम रहीम शायद वैलेंटाइंस डे मनाने के बाद ही वापस जेल पहुंचेगा. यानि 15 फरवरी तक. तब तक रॉकस्टार और लव चार्जर बाबा की ऐश है.

Advertisement

इसी देश में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 75 हजार 629 आजीवन कारावास के कैदियों में से ज्यादातर के लिए एक ख्वाब ही है. अकेले हरियाणा में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 2 हजार 824 कैदी हैं, लेकिन ज्यादातर के लिए इतना पेरोल और फरलो आज भी एक ख्वाब ही है. ये और बात है कि हरियाणा सरकार ने कोर्ट में ये बताया है कि कानून की तब्दीली का फायदा राम रहीम की तरह बाकी के कैदी भी उठा रहे हैं.

वैसे बिल्किस बानो केस को छोड़ दें, तो पेरोल पर बाहर रहने का बाबा राम रहीम का रिकॉर्ड की अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड माना जा सकता है. दिसंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट में बिल्किस बानो की ओर से दिए गए एक हलफमाने में ये बताया गया था कि उसके गुनहगार 11 लोगों में से 10 लोग सजा पाने के बाद 1 हजार दिनों का पेरोल और फरलो ले चुके हैं. इसके अलावा पेरोल और फरलो को लेकर जिन कैदियों की चर्चा होती रही, उनमें फिल्म स्टार संजय दत्त और कांग्रेस नेता विनोद शर्मा के बेटे मनु शर्मा का नाम शामिल है. 

देश की अलग अलग जेलों में बंद मौजूदा या पहले का कोई भी दूसरा ऐसा कैदी नहीं है, जिसे इतने कम वक्त में पेरोल और फरलो के नाम पर इतनी लंबी लंबी छुट्टियां दी गई हो. राम रहीम से पहले फिल्म स्टार संजय दत्त को भी फऱलो या पेरोल पर रिहाई को लेकर सवाल उठे थे. अपनी पूरी सजा के दौरान संजय दत्त फिर भी 160 दिन की ही पेरोल या फरलो की आजादी हासिल कर चुके थे. संजय दत्त की इस आजादी को लेकर जब मीडिया में शोर उठा तो बाद में पेरोल या फरलो के नाम पर उनकी आजादी पर ब्रेक लगा दी गई थी. 

Advertisement

दिल्ली के चर्चित जेसिका लाल मर्डर केस के मुजरिम मनु शर्मा को भी अपने वक्त में पेरोल और फरलो पर बार-बार रिहाई देने को लेकर सवाल उठे थे. पेरोल पर रिहाई के दौरान एक बार मनु शर्मा को अपने दोस्तों के साथ एक नाइट क्लब में डांस करते पाया गया था. तब ये खबर मीडिया में काफी सुर्खियां बनी थी. इसके बाद से मनु शर्मा की रिहाई पर भी ब्रेक लगा दी गई थी. हालांकि बरसों जेल में रहने के बावजूद मनु शर्मा भी राम रहीम के 7, 8 सालों का भी रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाए. क्योंकि राम रहीम ने 7, 8 सालों में ही पेरोल और फरलो पर इतनी आजादी हासिल कर ली जो मनु शर्मा के हिस्से में आई ही नहीं.

अब जाहिर है जब शख्सियत देख कर पेरोल और फरलो का इस तरह मजाक बनेगा तो लोग सवाल तो पूछेंगे ही. लिहाजा लोग राम रहीम को पेरोल देने के हरियाणा सरकार के फैसले पर भी सवाल उठाने लगे हैं. एक तरफ जेल में बेशुमार कैदी अपनी सजा पूरी होने के बावजूद बाहर नहीं निकल पा रहे हैं, दूसरी तरफ सरकार बार-बार राम रहीम को पेरोल देती जा रही है. सवाल यही है कि अगर सरकार को इससे कोई फायदा नहीं है, तो राम रहीम पर इतनी मेहरबानी क्यों? हालांकि हरियाणा सरकार ने इसे एक रुटीन अफेयर करार दिया है. सरकार का कहना है कि पेरोल हर मुजरिम का हक है और राम रहीम भी दूसरे मुजरिमों से अलग नहीं है.

(चंडीगढ़ से कमलजीत संधु, रोहतक से सुरेंद्र सिंह और सिरसा से बलजीत सिंह का इनपुट)

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement