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कई नाम, नया चेहरा.. यूं पुल‍िस के ल‍िए छलावा बन गया बिहार का ये शातिर बदमाश

रवि कुमार गुप्ता उर्फ रवि पेशेंट उर्फ मास्टर जी उर्फ नेता जी और न जाने क्या-क्या. कोई एक से ज़्यादा नाम रख ले, तो इसमें हैरानी की कोई बात नहीं. लेकिन कोई हर छह महीने में नए चेहरे के साथ दुनिया के सामने हाज़िर हो जाए, तो हैरान होना लाज़िमी है.

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रवि कुमार गुप्ता को पकड़ना बिहार पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है रवि कुमार गुप्ता को पकड़ना बिहार पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है

पटना में एक जौहरी की दुकान में 4 लुटेरे पहुंचते हैं. वे चारों दुकान से करीब 14 करोड़ रुपये के जेवर लूट लेते हैं. लेकिन भागते वक्त उनमें से एक लुटेरा बाइक से गिर जाता है. लोग उसे पकड़ कर पुलिस के हवाले कर देते हैं. इसके बाद वो लुटेरा पुलिस को पूछताछ में बताता है कि इस लूट का मास्टरमाइंड रवि पेशेंट है. पुलिस उसे एक तस्वीर दिखाकर कहती है कि क्या ये वही है? इसके बाद इस कहानी में दो ऐसे मोड आए, जिन्हें जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे.

नए-नए नाम, नए चेहरे
रवि कुमार गुप्ता उर्फ रवि पेशेंट उर्फ मास्टर जी उर्फ नेता जी और न जाने क्या-क्या. कोई एक से ज़्यादा नाम रख ले, तो इसमें हैरानी की कोई बात नहीं. लेकिन कोई हर छह महीने में नए चेहरे के साथ दुनिया के सामने हाज़िर हो जाए, तो हैरान होना लाज़िमी है. ये कहानी है एक ऐसे ही शख्स की. 

रवि को पहचान पाना मुश्किल
जी नहीं, वो कोई बहरुपिया या कोई स्टेज आर्टिस्ट नहीं बल्कि जुर्म का दुनिया का एक ऐसा किरदार है, जिसका किसी मामले में शामिल होना ही पुलिस के पसीने छुड़ा देने की गारंटी है. उसका असली नाम है रवि कुमार गुप्ता. लेकिन अब रवि की हालत ऐसी हो चुकी है कि खुद उसके साथ उसके गैंग में रह कर वारदात को अंजाम देनेवाले गुनहगार तक उसे नहीं पहचान पा रहे हैं, पुलिस उसे क्या पहचानेगी, ये अपने-आप में बड़ा सवाल है. 

कानून के लिए चुनौती है रवि कुमार गुप्ता 
क़ानून के लिए छलावा बने रवि का ताल्लुक बिहार की राजधानी पटना और नज़दीकी शहर जहानाबाद से है, लेकिन बिहार के अलावा वो झारखंड, बंगाल, ओड़िशा जैसे राज्यों में भी लगातार पुलिस और क़ानून को चुनौती देता रहा है, जुर्म की वारदातों को अंजाम दे रहा है. हैरानी की बात ये है कि हर वारदात के बाद वो एक नए चेहरे के साथ लोगों की भीड़ में गुम हो जाता है और पुलिस उसे ढूंढती रह जाती है.

आपको रवि कुमार गुप्ता उर्फ़ रवि पेशेंट नाम के इस तिलस्मी किरदार का एक-एक सच खुल कर बताएंगे, लेकिन सबसे पहले उस वारदात के बारे में जान लीजिए, जिसने रातों-रात रवि पेशेंट को बिहार पुलिस के लिए नया सिरदर्द बना दिया है. 

21 जनवरी 2022 दोपहर 2 बजे, बाकरगंज, पटना
पटना के इस भीड़भाड़ वाले बाज़ार भी इस रोज़ भी ज़िंदगी आम दिनों की भांति अपनी रफ्तार पर थी, लेकिन इसी बीच इस बाज़ार में कुछ ऐसा हो गया कि ख़बर बाज़ार से निकल कर पूरे पटना में आग की तरह फैल गई. हुआ यूं कि यहां मौजूद एसएस ज्वेलर्स नाम की इस दुकान पर दिन दहाड़े चार से छह बदमाशों ने धावा बोल दिया और दुकान के मालिक समेत तमाम मुलाज़िमों को गन प्वाइंट पर लेकर लूटपाट शुरू कर दी. डकैत इस बार पूरी तैयारी से आए थे. उन्होंने दुकान में घुसने के बाद बिल्कुल बेख़ौफ तरीक़े से लूटपाट शुरू की और 8 से 9 मिनट के अंदर करीब साढ़े चौदह करोड़ की डकैती डाल कर हथियार लहराते हुए मौके से फ़रार हो गए.

ऐसे पकड़ा गया एक लुटेरा
लेकिन डकैतों के लाख डराने धमकाने के बावजूद इस कहानी में एक ट्विस्ट आ गया. हुआ यूं कि डकैतों के ज़्यादा वक़्त लेने की वजह से इस वारदात की ख़बर आस-पास के दुकानदारों को हो गई और एसएस ज्वेलर्स के सामने लोगों की भीड़ जमा होने लगी. डकैतों ने अपने तौर पर भीड़ को डराने की कोशिश की. फायरिंग भी की, लेकिन इत्तेफ़ाक से भागने के दौरान एक डकैत बाइक पर बैठने के दौरान ही नीचे गिर गया और लोगों ने जान पर खेल कर एक बदमाश को दबोच लिया. 

सामने आया रवि पेशेंट का नाम
और बस यही साधु नाम का बदमाश पुलिस के लिए इस मामले की तफ्तीश में एक बड़ा क्लू साबित हुआ. पुलिस ने साधु से पूछताछ की तो जल्द ही ये बात साफ़ हो गई कि साढ़े चौदह करोड़ की इस महा-डकैती को किसी और ने नहीं बल्कि उसी रवि कुमार गुप्ता उर्फ़ रवि पेशेंट के गैंग ने अंजाम दिया है, जो पिछले डेढ़ साल से भी ज़्यादा वक़्त से बिहार समेत कई राज्यों की पुलिस के लिए छलावा बना हुआ है.

फोटो में रवि को नहीं पहचान पाया साधु
पूछताछ में साधु ने इस डकैती में शामिल दूसरे बदमाशों के भी नाम बताए. लेकिन जब पुलिस ने तस्दीक के लिए इस बदमाश को रवि पेशेंट की तस्वीर दिखाई, तो वो चकरा गया. उसने डकैती में रवि पेशेंट के शामिल होने की बात तो कही, लेकिन वो रवि की तस्वीर नहीं पहचान पा रहा था. पहले तो पुलिस को लगा कि शायद वो पुलिस को ही उलझाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन जब तमाम तौर तरीक़ों के बावजूद वो रवि पेशेंट्स को नहीं पहचान पाया, तो पुलिस को उसकी बात पर यकीन हो गया. 

चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी का खुलासा 
इसी दौरान साधु ने खुलासा किया कि रवि गुप्ता पहले की तरह नहीं दिखता, बल्कि उसने प्लास्टिक सर्जरी, विग और दूसरे एक्सेसरीज़ की बदौलत अपना चेहरा कुछ इतना बदल लिया है कि अब उसे पहचानना भी मुश्किल हो रहा है. गिरफ्तार आरोपी ने पुलिस को बताया कि रवि पेशेंट आख़िरी बार पुलिस हिरासत से फ़रार होने के साथ ही लगातार अपना हुलिया बदलता रहा है. उसने प्लास्टिक सर्जरी कर अपनी नाक मोटी करवा ली है, ताकि लोगों को धोखा दे सके. असल में उसके सिर पर नहीं के बराबर बाल हैं, लेकिन वो विग पहनता है और रही सही कसर मोटी सी ऐनक लगाकर पूरी करता है. यही वजह है कि पुलिस तो पुलिस खुद उसके साथ उसके गैंग में काम करनेवाले बदमाश भी उसे नहीं पहचान पाते. वो अपने कुछ चुनिंदा गुर्गों से ही बात करता है और उन्हीं के ज़रिए गैंग के बाक़ी बदमाशों तक अपनी बात पहुंचाता है.

पुलिस के पास नहीं है रवि की कोई नई तस्वीर
फिलहाल, पटना पुलिस के पास इस तिलस्मी क्रिमिनल की कोई लेटेस्ट तस्वीर तक नहीं है. ये पुलिस के लिए एक नई चुनौती है. इसी चुनौती से निपटने के लिए अब पुलिस ने पटना आर्ट कॉलेज के एक पूर्व छात्र से वारदात में शामिल रवि पेशेंट का स्केच बनवाया है. लेकिन दिक्कत ये है कि कोरोना भी अब ऐसे गुनहगारों के लिए एक मायने में फ़ायदेमंद साबित होने लगा है. पटना के एसएस ज्वेलर्स में डकैती के दौरान भी डकैतों ने मास्क पहन कर ही पूरी वारदात को अंजाम दिया था और इसीलिए अब रवि पेशेंट की नई स्केच पर भी मास्क लगी है. ऐसे में ये स्केच कितना सही है और कितना ग़लत पक्के तौर पर तो फिलहाल कोई नहीं बता सकता, लेकिन इतना ज़रूर है कि मौक़े से गिरफ्तार साधु ने इस स्केच को रवि पेशेंट के मौजूदा चेहरे से 60 फीसदी तक मिलता-जुलता बताया है.

एक डकैती के बाद पकड़ा गया था रवि 
वैसे तो रवि पेशेंट क़रीब डेढ़ साल से पुलिस को धोखा देता रहा है. लेकिन आखिरी बार उसने 21 जून 2019 को अपने गैंग के साथ मिलकर पटना के आशियाना-दीघा रोड में मौजूद पंचवटी रत्नालय नाम के एक बड़े ज्वेलरी शॉप में डकैती डाली थी. खबरों के मुताबिक उसने वहां से 5 करोड़ की ज्वेलरी के साथ-साथ 13 लाख रुपये कैश भी लूटा था. इसके बाद पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए इंटर स्टेट कॉम्बिंग की शुरुआत की और बिहार-झारखंड के साथ-साथ बंगाल में कई जगहों पर छापेमारी के बाद आख़िरकार उसे उसके गैंग के साथ पकड़ लिया था. 

पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था शातिर
30 जून 2019 को गिरफ्तार किए जाने के बाद उसे पटना की बेऊर जेल भेजा गया. लेकिन सूत्रों की मानें तो रवि ने तभी से जेल से भाग जाने की बात कहनी शुरू कर दी. उसने जेल में ही बैठकर अपने फरार होने की साजिश भी रची और महज़ 6 महीने से भी कम के वक़्त में 18 दिसंबर 2019 को वो पटना सिविल कोर्ट में पेशी के दौरान पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था. रवि के साथ उसका एक खास गुर्गा आशीष राय भी इस रोज़ पुलिस को धोखा देकर भागने में कामयाब रहा. इसके बाद उसने एक के बाद एक कई वारदातों को अंजाम दिया. 

गहनों की दुकानें होती थी रवि पेशेंट का निशाना
पश्चिम बंगाल के आसनसोल समेत दूसरे कई शहरों में उसने ज्वेलरी शॉप्स को टार्गेट किया. बड़ी डकैतियां कीं, लेकिन तब से लेकर आजतक पुलिस उसे नहीं ढूंढ पाई है. रवि पेशेंट का आपराधिक इतिहास भी काफ़ी पुराना है. सिर्फ पटना में उस पर कोई एक-दो नहीं बल्कि 16 से ज़्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं. 2019 में पंचवटी रत्नालय से पहले साल उसने 2018 में पटना के रामकृष्णा नगर इलाके में डकैती की वारदात को अंजाम दिया था. उसके पहले गर्दनीबाग में डकैती के साथ-साथ एक शख्स की हत्या भी कर दी थी. राज ट्रेडर्स के मालिक बंटी गुप्ता के क़त्ल का इल्ज़ाम भी उसी के सिर पर है.

14 करोड़ की डकैती से सुर्खियों में आया रवि का नाम
अब बात एक बार फिर उसी ज्वेलरी शॉप में हुई डकैती की, जिसने रातों-रात रवि पेशेंट को सुर्खियों में ला दिया. असल में पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी थी. क्योंकि मामला 14 करोड़ से ज़्यादा की डकैती का था. दुकान से 18 कैरेट का तकरीबन कई किलो सोना, 14 लाख रुपये कैश और दूसरी चीज़ें लूटी गई थीं. चूंकि मामला हाई प्रोफ़ाइल था, पुलिस ने इसे सुलझाने के लिए एक साथ कई टीमें बनाई और दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों के साथ-साथ आस-पास की दूसरी सीसीटीवी फुटेज का भी मुआयना किया. लेकिन सबसे बड़ा सुराग साधु नाम का वो क्रिमिनल साबित हुआ, वो मौक़े से ही पकड़ा गया था. 

एक की निशानदेही पर पकड़े गए 4 बदमाश
साधु की निशानदेही पर पुलिस ने सोनू कुमार, राजू, राजेश राम और सन्नी कुमार नाम के बाकी बदमाशों को गिरफ्तार किया और इनके ठिकानों से करीब 9 किलो सोना, साढ़े 4 लाख रुपये कैश, 5 मोटरसाइकिल, 1 fortuner और एक दूसरी गाड़ी भी बरामद की. पुलिस की मानें तो बदमाशों ने करीब महीने भर तक इस लूटपाटकी तैयारी की थी. अपने इस क्राइम के लिए बाकायदा रेकी की थी और काम को एक कोड नेम भी दिया था. जो था.. ऑपरेशन एक ग्लास पानी. लेकिन उनकी सारी की सारी तैयारी धरी गई और 72 घंटे में मामले का खुलासा हो गया.

रवि पेशेंट के इर्द गिर्द घूम रही थी जांच 
मगर इस मामले में सबसे बड़ा ट्विस्ट रवि पेशेंट उजागर होने से ही आया. असल पुलिस के बही खातों में फरार चल रहा रवि पेशेंट भी ऐसे ही ज्वेलरी शॉप्स में लूटपाट करने का आदी रहा है. उसने ऐसी कई वारदात को अंजाम दिया है, इसलिए इस मामले में भी पुलिस की शुरुआती जांच रवि पेशेंट के इर्द गिर्द ही घूम रही थी. लेकिन आखिरकार जब 72 घंटे गुज़रने के बाद पुलिस ने मामले का खुलासा किया, तो इससे रवि पेशेंट का सीधे तौर पर कोई लेना-देना नहीं था. लेकिन इतना ज़रूर है कि इस मामले ने पुलिस को एक बार फिर रवि पेशेंट की याद ज़रूर दिला दी है, जो अब भी पुलिस के लिए छलावा बना है.

(पटना से प्रेरणा शर्मा और सुजीत गुप्ता का इनपुट भी)

 

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