आरुषि-हेमराज डबल मर्डर मामले की जांच और मुकदमे का पहला चरण पूरा हो गया है. अदालत ने अपना इंसाफ सुना दिया. तो क्या अब ये केस खत्म? या फिर उस खत्म केस की शुरूआत है?
क्या अजीब दास्तान है कि पिछले साढ़े पांच साल से वो हाथ ही इंसाफ़ मांग रहे थे, जिनकी आस्तीनों पर शक के धब्बे सबसे ज़्यादा थे. ये वो हाथ थे, जिन्होंने आरुषि को 14 साल तक पाला-पोसा, बड़ा किया, उसके नाज़-नखरे उठायेए तमाम जिदें पूरी कीं, पर आज उन्हीं हाथों को इंसाफ ने कातिल ठहरा दिया.
सवाल सबसे बड़ा खुद तलवार दंपति पर है. तमाम तरह की चीजें सहरने के बाद भी पिछले साढ़े पांच बरसों में दोनों की कोशिश में जरा-सी भी कंपकपाहट दिखाई नहीं दी. कोशिश थी शक के गहरे साये के बीच इंसाफ को कटघरे में खड़ा करने की. यूं लगता था जैसे दोनों ने ठान ली हो कि देखें इंसाफ बड़ा है या साज़िश?
और इन दोनों की इस कोशिश का साथ कई शक और सवालों ने भी दिया. सवाल ये कि मौका-ए-वारदात पर कोई दूसरा मौजूद नहीं था. सिर्फ़ इस बिनाह पर ये कैसे माना जाए कि जुर्म के हकदार आरुषि के मां-बाप ही हैं?
फैसला आ चुका है. पर ये सारे शक और सवाल अब भी ज़िंदा हैं. और तब तक रहेंगे, जब तक इनके सारे जवाब नहीं मिल जाते. क्योंकि इंसाफ़ और साज़िश के बीच ये पहले घर की लड़ाई थी.
फांसी या उम्र कैद? सस्पेंस बस यही था. जैसी कि उम्मीद थी सीबीआई ने अदालत से तलवार दंपत्ति के लिए फांसी मांगी थी. दलील थी कि ये रेयरेस्ट ऑफ़ रेयर केस है पर दलील कमज़ोर थी. लिहाज़ा अदालत ने इसे अनसुना कर उम्र कैद की सज़ा सुनाई.
तलवार दंपत्ति की सजा में रियायत के लिए वचाव पक्ष के वकील ने ये भी कहा कि तलवार दंपत्ति ने अपनी बेटी खोई है, लेकिन अदालत ने ज्यादा रियायत नहीं बरती और अपना फैसला सुना दिया.
धारा 302 के तहत दोनों को उम्रकैद की सजा हुई है. धारा 201 के तहत राजेश और नूपुर तलवार दोनों को 5 साल कैद की सजा हुई है और धारा 203 के तहत राजेश तलवार को एक साल की सजा दी गई है. सजा के ऐलान के बाद चेहरे पर मायूसी और उदासी के साथ दोनों फिर गाजियाबाद में डासना जेल ले जाए गए.
बेटी और नौकर हेमराज की हत्या में सजा पाने के बाद तलवार दंपत्ति अब उच्च अदालत में अपील कर सकते हैं.
खत्म या शुरुआत? क्या वाकई इस एक फ़ैसले के साथ ये केस हमेशा-हमेशा के लिए ख़त्म हो गया या फिर यहां से एक नई लड़ाई की शुरुआत हुई है? लड़ाई, आरुषि के कातिल ठहराए गए मां-बाप के लिए ऊपरी अदालतों में अपनी बेगुनाही साबित करने की या फिर अपनी बेटी को इंसाफ दिलाने की? क्योंकि अब तलवार परिवार इस फ़ैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है.
चेहरे पर मायूसी और उदासी के साथ नूपुर और राजेश तलवार गाजियाबाद में डासना जेल पहुंचे. जेल में पहली रात डॉक्टर राजेश और नूपुर तलवार को नींद नहीं आई थी, पूरी रात दोनों ने करवटें बदलते हुए और नम आंखों में गुजारी. तलवार दंपति के रिश्तेदार कहते हैं कि विशेष सीबीआई अदालत के फैसले के खिलाफ वो हाईकोर्ट जाएंगे.
राजेश और नूपुर तलवार के रिश्तेदार का ये भी दावा है कि मामले में कई खामियां हैं और उम्मीद है उच्च अदालत से उन्हें राहत जरूर मिलेगी.
कैसे गुजरी पहली रात और पहला दिन
गाजियाबाद की डासना जेल में अब से आरुषि के पिता डॉ. राजेश तलवार कैदी नंबर 9342 के नाम से जाने जाएंगे और आरुषि की मां नूपुर तलवार कैदी नंबर 9343 के नाम से जानी जाएंगी. डॉ. राजेश तलवार जेल में वार्ड नंबर 11 में रहेंगे तो नूपुर तलवार वार्ड नंबर 13 में.
सोमवार को दोषी करार दिए जाने के बाद तलवार दंपत्ति को डासना जेल भेज दिया गया था. हालांकि दोनों इससे पहले भी इसू जेल में कई रातें काट चुके थे. मगर इस बार जेल में पहली रात इस दंपति के लिए बेहद मुश्किल भरी रही. रात भर नींद नहीं आई और सुबह होते ही नूपुर तलवार की तबीयत बिगड़ गई.
मंगलवार की सुबह 9 बजकर 30 मिनट पर नुपूर तलवार की तबीयत बिगड़ने लगी. नूपुर तलवार ने घबराहट की शिकायत की. उनका ब्लडप्रेशर बढ़कर 160/106 हो गया था. जेल के डॉक्टर ने आकर नूपुर तलवार का इलाज किया. जेल सूत्रों के मुताबिक रात भर नहीं सोने और टेंशन की वजह से नूपुर का ब्लडप्रेशर बढ़ गया था.
हालांकि कुछ घंटों के बाद नूपुर तलवार की तबीयत सुधरने लगी. सूत्रों की मानें तो इससे पहले राजेश तलवार और नूपुर तलवार को जेल में अलग-अलग सेल में रखा गया. सोमवार 7 बजे शाम को उन्हें रात के खाने में रोटी, दाल और सब्जी दी ग, लेकिन उन्होंने अच्छे से डिनर नहीं किया. रातभर वो 3 बार रोए. मंगलवार की सुबह भी उन्होंने सही से नाश्ता नहीं किया.
जेल में अब राजेश तलवार और नूपुर तलवार को अभी कई रातें काटनी हैं, लेकिन तलवार दंपति पर अदालत की सजा से ज्यादा दबाव उस जुर्म का होगा, जिसके लिए उन्हें दोषी करार दिया गया है.