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फाइजर की Covid pill लेने वाले लोगों को दोबारा हो रहा संक्रमण, जानिए क्यों उठ रहे सवाल

कुछ समय पहले कोरोना के इलाज के लिए बेहतर विकल्प बनकर सामने आई Paxlovid दवा पर सवाल उठने लगे हैं. दरअसल, इसे खाकर ठीक हुए लोगों में दोबारा संक्रमण के लक्षण देखे गए हैं.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अमेरिका ने खरीदी थीं 10 बिलियन pill
  • गंभीर रोगियों पर काफी असरदार रही है दवा

कोरोना महामारी के इलाज में गेमचेंजर बताई गई फाइजर की COVID-19 pill पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं. ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि Paxlovid दवा को लेने वाले कई कोविड संक्रमित मरीजों में संक्रमण के लक्षण दोबारा नजर आए हैं. इस तरह के कुछ मामले सामने आने के बाद गोली के असर को लेकर कई तरह की आशंका व्यक्त की जा रही है.

दरअसल, Paxlovid कोरोना महामारी के खिलाफ बेहद असरदार दवा बनकर सामने आई है. इसके जरिए आसानी से कोरोना मरीज घर पर ही अपना इलाज कर सकते हैं. कोरोना के कई गंभीर रोगियों पर भी इसका प्रदर्शन बेहतरीन रहा है. परफॉर्मेंस को देखते हुए ही अमेरिका की सरकार ने फाइजर से 10 बिलियन pill खरीदी हैं. ताकि इनके जरिए 20 मिलियन लोगों का इलाज किया जा सके. इन्हें खरीदने के लिए अमेरिकी सरकार ने 10 बिलियन डॉलर से ज्यादा पैसे खर्च किए हैं.

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अभी इस ड्रग (दवा) के बारे में काफी कुछ सामने आना बाकी रह गया है. इस दवा का इस्तेमाल दिसंबर में कोरोना के अति गंभीर और गंभीर किस्म के रोगियों पर किया गया था. इसके जरिए एक हजार वयस्कों का इलाज किया गया था.  

बता दें कि दवा खाकर ठीक हुए कुछ मरीजों में दोबारा संक्रमण के लक्षण देखे गए. इन मरीजों ने दवा का 5 दिन का पूरा कोर्स लिया था. जानकारी सामने आने के बाद विशेषज्ञों ने सवाल उठाए कि क्या दवा लेने के बाद फिर संक्रमित हुए लोगों को दोबारा दवा का कोर्स करना चाहिए. 

डॉक्टर माइकल चर्नेस के मुताबिक पिछले महीने एक 71 साल के वैक्सीनेटेड व्यक्ति में दवा का कोर्स लेने के बाद फिर कोरोना के लक्षण देखे गए. मरीज के ट्रीटमेंट के बाद वह ठीक होने लगा, लेकिन 9 दिन बाद वायरस का स्तर फिर बढ़ा पाया गया. चर्नेस ने कहा कि Paxlovid प्रभावी दवा है, लेकिन यह ओमिक्रॉन वैरिएंट पर कम असरदार हो सकता है. इसे डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ अच्छे प्रदर्शन के बाद स्वीकृति मिली थी. 

अमेरिका के बोस्टन शहर के स्वास्थ्य विभाग में काम करने वाली चर्नेस ने बताया कि हो सकता है कि दवा डेल्टा वैरिएंट के मुकाबले ओमिक्रॉन वैरिएंट पर कम असरदार हो. एफडीए और फाइजर दोनों के मुताबिक फाइजर की मूल स्टडी में 1% से 2% लोगों में 10 दिनों बाद भी वायरस का स्तर देखा गया. 

एक वायरोलॉजिस्ट पेकोज का कहना है कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इसे उचित तरह से खुराक दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह महामारी से लड़ने में हमारी मदद कर रही है. इसलिए वो नहीं चाहते कि इसके बारे में नकारात्मक खबर आए. 

फाइजर ने इसका इस्तेमाल अति गंभीर मरीजों पर भी किया. सबसे अधिक जोखिम वाले रोगियों पर भी Paxlovid का परीक्षण किया गया. COVID-19 संक्रमण वाले, बिना टीकाकरण किए वयस्क और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं जैसे हृदय रोग और मधुमेह झेल रहे लोगों में इस दवा ने जोखिम 7% से घटाकर 1% कर दिया.

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