हिमाचल प्रदेश में पीपीई किट घोटाले की खबर अब चर्चा में है. लॉकडाउन के सभी फेज में धड़ल्ले से पीपीई किट को लेकर घोटाले हुए. इन घोटालों की शुरुआत सचिवालय के बड़े अधिकारियों से हुई जिन्होंने कथित तौर पर हैंड सैनिटाइजर, मास्क और पीपीई किट महंगे दामों में खरीदे.
स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डॉक्टर एके गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद घोटालों के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आई. दरअसल एक ऑडियो वायरल हो रहा है जिसमें वे 5 लाख रुपये घूस रेणुका के एक सप्लायर से मांग रहे हैं. इस विवाद में भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर राजीव बिंदल का नाम भी आया. उन्होंने बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया.
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अवैध तरीके से चल रहा था कारोबार
राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने भी ललित कुमार के नाम से फर्म के खिलाफ मामला दर्ज किया है. मुख्यमंत्री ने भी इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं. आरोप है कि सैनिटाइजर की बोतलों पर महंगे प्राइस टैग लगाए गए. गलत दामों पर इसकी सप्लाई की गई. सप्लायर के पास कोई लाइसेंस भी था न ही वह ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत रजिस्टर्ड था. विजिलेंस ब्यूरो ने सभी दस्तावेजों, सैनिटाइजर, हैंड वॉश और अन्य सामग्री को जब्त कर लिया है.
लॉकडाउन में स्कैम देशद्रोह: कांग्रेस
जहां हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आरोपों पर जांच के आदेश दिए हैं. हिमाचल प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष ने जेपी नड्डा को अपना इस्तीफा नैतिक आधार पर सौंप दिया. राज्य में विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने सभी आरोपों को सही ठहराते हुए कहा है कि जहां लोग अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई को मुख्यमंत्री राहत कोष में भेज रहे थे, वहीं राजनेता और अधिकारी उसी धन को लूटने में व्यस्त थे.
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उच्च स्तरीय जांच की हो रही मांग
हिमाचल प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि जब दुनिया कोरोना महामारी का सामना कर रही है, जब कुछ लोग अपनी मेहनती की गाढ़ी कमाई मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कर रहे थे. वहीं कोरोना वायरस पीपीई किट में घोटाला किया जा रहा था. इस घोटाले में बीजेपी के वरिष्ठ नेता का नाम आता है, उनके सबसे बड़े स्वास्थ्य अधिकारी का नाम आता है. यह किसी भी कीमत पर देशद्रोह से कम नहीं है. हमने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. इसकी जांच सीबीआई करे या हाई कोर्ट के जज करें.
पंजाब में पीपीई किट, एन-95 मास्क स्कैम
हिमाचल प्रदेश का पड़ोसी राज्य पंजाब भी स्कैम से जूझ रहा है. करोड़ों के शराब घोटाले से इतर पंजाब में पीपीई किट और मास्क घोटाला भी हुआ है. लुधियाना और अमृतसर के अस्पतालों में खराब उपकरण दिए गए. अमृतसर गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और लुधियाना सिविल अस्पताल स्टाफ ने पीपीई किट को खराब बताया और कहा कि गुणवत्ता से समझौता किया गया है.
विपक्षी शिरोमणि अकाली दल ने भी पीपीई किट और मास्क घोटाले में जांच की मांग की है.
हरियाणा में शराब तस्करों की चांदी
एक तरफ जब हिमाचल प्रदेश और पंजाब में पीपीई किट और मास्क का घोटाला हो रहा है, वहीं हरियाणा में शराब तस्कर पैसे बनाने में कामयाब हो रहे हैं. लॉकडाउन में हरियाणा सरकार को एक्साइज ड्यूटी में 1000 करोड़ का घाटा हुआ है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की गिरफ्तारी और 6 सिपाहियों और 3 शराब माफियाओं के खिलाफ केस, पंजाब में शराब स्कैम की पोल खोल रहा है.
पुलिस ने न केवल पड़ोसी पंजाब से शराब की तस्करी में भूपेंदर की मदद की, बल्कि गुजरात के अलावा हरियाणा में भी उसके माध्यम से जब्त की गई शराब बेची. पंजाब के कुछ कांग्रेस नेताओं के स्वामित्व वाले भट्टों ने सौ करोड़ रुपये की अवैध कमाई की. लॉकडाउन के दौरान ही हरियाणा शराब माफियाओं को कथित रूप से शराब की आपूर्ति भी कराई गई.
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हरियाणा के स्वास्थ्य और गृह मंत्री अनिल विज ने राज्य स्तरीय जांच की बात कही है. एसआईटी की तीन सदस्यीय टीम इसकी जांच कर रही है. सीनियर आईएएस अधिकारी इसका नेतृत्व करेगा. सोनीपत के दो गोदामों से शराब की तस्करी की गई है.
अब तक नींद से नहीं जागी कैप्टन सरकार
जहां हरियाणा और हिमाचल प्रदेश ने की बीजेपी सरकार ने कथित घोटालों की जांच के आदेश दिए हैं, वहीं कांग्रेस शासित प्रदेश में सरकार अब तक नींद से नहीं जगी है. पंजाब हेल्थ मिनिस्टर बलबीर सिंह सिद्धू ने कहा है कि कोई घोटाला नहीं हुआ है, बल्कि यह सब पारदर्शी तरीके से हो रहा है. उन्होंने कहा कि कुछ पीपीई किट में कोई घोटाला नहीं हुआ है, बल्कि कुछ एक चीजें दोषपूर्ण थीं.
ध्यान देने वाली बात यह है कि हरियाणा और हिमाचल प्रदेश सरकार की जांच किसी निष्कर्ष तक पहुंचती है या नहीं. कहीं ऐसा न साबित हो कि जांच के आदेश महज जनता का ध्यान भटकाने के लिए दिया गया हो. जांच में कहीं ऐसा न हो कि छोटे स्तर के अधिकारियों का नाम इस घोटाले में सामने आ जाए और बड़े डीलर पाक साफ होकर निकल आएं.