देश में 21 दिन के लिए लॉकडाउन लगा दिया गया है क्योंकि सरकार की कोशिश खतरनाक कोरोना वायरस से लोगों को बचाने की है. लेकिन सरकार के लिए कोरोना वायरस से लोगों को बचाना ही अकेली चुनौती नहीं है तमाम अफवाहें ऐसी भी हैं जिससे लोगों को बचाना भी बड़ी चुनौती बन गई है.
ऐसी ही एक अफवाह उड़ी कोरोना वायरस के इलाज के लिए दवाई के बारे में. हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन नाम की इस दवाई का उपयोग ऑर्थराइटिस और मलेरिया के इलाज के लिए होता है. इसका इस्तेमाल हेल्थ वर्कर्स में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए भी किया जाता है, लेकिन कोरोना को लेकर फैली अफरा-तफरी के बीच लोगों ने इसे कोरोना का पक्का इलाज समझ कर मेडिकल स्टोर्स से थोक के भाव दवाई खरीदना शुरू कर दिया.
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नतीजा यह हुआ कि मार्केट में इस दवा की किल्लत हो गई. एक थोक दवा विक्रेता का कहना है कि थोक की दवाइयों की दुकानों के अलावा उन कंपनियों से दवाइयों की सप्लाई भी कम पड़ गई, जहां से थोक दवाई विक्रेता अपना माल मंगाते थे. जबकि सरकार ने भी साफ किया कि इस दवाई का कोरोना के इलाज से कोई लेना देना ही नहीं है.
लेकिन लोग इसकी असलियत समझते इससे पहले ही बाजार से ना सिर्फ दवा गायब हो गई बल्कि इसे खरीदने के लिए लोगों में होड़ मच गई. इसका असर ये हुआ कि लोग दवाई की दुकानों के चक्कर लगा रहे हैं.
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अफवाह पर सख्त रूख
बहरहाल अब मामला बिगड़ते देख सरकार ने भी सख्त रूख अपनाने का मन बनाया है. अपर मु्ख्य सचिव गृह और प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य ने साफ किया है कि कोरोना के मामले में किसी भी तरह की अफवाह फैलाने और दवाइयों समेत तमाम जरूरी चीजों की कालाबाजारी करने वाले लोगों को छोड़ा नहीं जाएगा.
अब देखना ये है कि सरकार की इस सख्त हिदायत से लोग सुधरते हैं या फिर सरकार को इससे निबटने के लिए कोई और रास्ता देखना होगा.