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खाड़ी देशों से भारतीयों को लाने के लिए स्टैंडबाय पर नौसेना, बस आदेश का इंतजार

भारतीय नौसेना ने तीन नौसैनिक जहाज लॉकडाउन के बीच खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए तैयार हैं. एक छोटी सूचना पर 1500-2000 लोगों का रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हो जाएगा.

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भारतीय नौसेना जहाज (फाइल फोटो)
भारतीय नौसेना जहाज (फाइल फोटो)

  • खाड़ी देशों में फंसे हैं हजारों भारतीय
  • वायुसेना के साथ नौसेना भी स्टैंडबाय

कोरोना संकट और लॉकडाउन की वजह से पूरी दुनिया में लोग फंसे हैं. देश के कई प्रदेशों में भी लोग फंसे हुए हैं, जिन्हें निकालने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. इस बीच दूसरे देशों में फंसे भारतीयों को निकालने की तैयारी भी पूरी कर ली गई है. खाड़ी देशों में फंसे 1500 से अधिक भारतीयों को नौसेना के तीन जहाज स्टैंडबाय पर हैं.

भारतीय नौसेना ने तीन नौसैनिक जहाज लॉकडाउन के बीच खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए तैयार हैं. एक छोटी सूचना पर 1500-2000 लोगों का रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हो जाएगा. सूत्रों का कहना है कि भारतीय नौसेना को भारतीय वायु सेना और एयर इंडिया की उड़ानों के अलावा स्टैंडबाय पर रखा गया है.

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सूत्रों का कहना है कि भारतीय नौसेना को जरूरत पड़ने पर खाड़ी देशों से भारतीयों की निकासी में सहायता करने के लिए कहा जाएगा. इन जहाजों में करीब 1500 से 2000 लोग आ सकते हैं. इसके लिए आईएनएस जलाश्व और दो अन्य जहाज स्टैंडबाय पर हैं. एक अधिकारी ने कहा कि नौसेना स्टैंडबाय पर है और किसी भी आवश्यकता के लिए तैयार है.

अधिकारियों के अनुसार विदेश से भारतीयों को वापस लाने का अभियान 3 मई के बाद शुरू होगा और अगर जरूरत हुई तो नौसेना को अंतिम उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा. एक सूत्र ने कहा कि अगर संख्या बहुत अधिक हुई है तो नौसेना का उपयोग वायु सेना और एयर इंडिया की सहायता के लिए भी किया जा सकता है.

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सूत्रों ने कहा कि नौसेना के जहाजों में कोरोना की गाइडलाइन को फॉलो करने के लिए कुछ बदलाव की जरूरत है. जहाज में सोशल डिस्टेनसिंग बनाने के लिए क्षमता से कम लोगों को लाया जाएगा. एक अनुमान के मुताबिक, आईएनएस जलश्वा में एक हजार लोगों क्षमता है, लेकिन इसमें 700-800 लोगों को लाया जाएगा. बाकी दो जहाजों में नियमों का पालन किया जाएगा.

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अगर किसी व्यक्ति में कोई लक्षण दिखाई दे रहे हैं या क्रमित व्यक्ति के संपर्क में आया है तो उसके जहाज पर ही क्वारनटीन किया जाएगा. बुनियादी प्रोटोकॉल के अनुसार, मेडिकल टीमें भी जहाज में रहेंगी.

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