भारत के यूपीआई इकोसिस्टम में आए दिन बदलाव होता रहा है, जिस कारण यूपीआई का दायरा बढ़ता जा रहा है. अब एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला है. ICICI बैंक, फोनपे और क्रेड जैसे फिनटेक प्लेटफॉर्म ऐसे फीचर्स पेश कर रहे हैं, जिसके तहत यूजर्स बिना यूपीआई पिन डाले UPI पेमेंट कर सकते हैं.
नए फीचर्स यूजर्स को यूपीआई पिन की जगह फिंगरप्रिंट या फेस की पहचान का उपयोग करके पेमेंट करने की मंजूरी देते हैं. इस बदलाव का उद्देश्य डिजिटल लेनदेन को तेज, अधिक आसान और सुरक्षित बनाना है. खासकर डेली पेमेंट के लिए.
क्या है ये नया फीचर?
बायोमेट्रिक UPI अथेंटिफिकेशन से छोटे लेन-देन के लिए यूपीआई पिन दर्ज करने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है. इसके बजाय, यूजर्स फिंगरप्रिंट स्कैन या चेहरे की पहचान जैसी चीजों का उपयोग करके पेमेंट कर सकते हैं. हालांकि, नियामक मानदंडों के अनुसार, यह सुविधा ₹5,000 तक के लेनदेन के लिए सीमित है. इससे अधिक राशि के लिए, पिन-दर्ज करना अनिवार्य होगा.
ICICI बैंक ने किया रोलआउट
ICICI बैंक ने अपने iMobile ऐप पर यह फीचर शुरू कर दिया है, जिससे कस्टमर्स बायोमेट्रिक्स का इस्तेमाल करके पर्सनल लेन-देन, QR कोड बेस्ड पेमेंट और ऑनलाइन खरीदारी कर सकते हैं. यह फ़ीचर ऐप के अपडेटेड वर्ज़न (Android वर्ज़न 30+ और iOS 28.2+) पर उपलब्ध है और यह नए डेटा को इकट्ठा करने के बजाय यूज़र के डिवाइस पर पहले से सेफ स्टोर किए गए बायोमेट्रिक डेटा पर निर्भर करता है. ये फीचर ऐसा है, जिसके तहत आप जब चाहे बायोमेट्रिक अथेंटिफिकेशन को चालू या बंद कर सकते हैं. जरूरत पड़ी तो पिन अथेंटिफिकेशन फिर से शुरू कर सकते हैं.
PhonePe और CRED
PhonePe ने UPI पेमेंट के लिए बायोमेट्रिक अथेंटिफिकेशन भी शुरू किया है, जिससे एक टच में पेमेंट का अनुभव मिलता है. यह सुविधा पिन भूल जाने और गलत इनपुट जैसी आम समस्याओं में काम आती है. स्मार्टफोन की अंतर्निहित सुरक्षा का लाभ उठाते हुए, यह भीड़भाड़ वाले स्थानों में पिन लीक होने जैसे रिस्क को कम करता है.
महत्वपूर्ण बात यह है कि PhonePe यूजर्स को बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन फेल होने की स्थिति में पिन अथेंटिफिकेशन का विकल्प देता है. यह सुविधा व्यापारी भुगतान, क्यूआर स्कैन और यहां तक कि बैलेंस चेक समेत कई उपयोगों में काम करती है. CRED ने NPCI के साथ साझेदारी में इसी तरह की बायोमेट्रिक UPI सुविधा शुरू की है, जो निर्बाध और सुरक्षित भुगतान की दिशा में व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार का संकेत देती है.