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War to Terror Attacks: 35 साल का इतिहास... युद्ध हो या आतंकी हमले, 1 महीने में ही पलट जाती है बाजी!

कई बड़े घटनाक्रमों को देखें तो 1990 का इराक युद्ध, 1999 का कारगिल युद्ध, 2001 का वर्ल्ड ट्रेड सेंटर हमला, 2008 का मुंबई आतंकी हमला या फिर रूस-यूक्रेन युद्ध के बाजार में ताबड़तोड़ रैली देखने को मिली थी.

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युद्ध के दौरान शेयर बाजार में भारी बिकवाली. (AP Photo)
युद्ध के दौरान शेयर बाजार में भारी बिकवाली. (AP Photo)

पिछले तीन का इतिहास बताता है कि जब-जब युद्ध हुए, या फिर बड़े वैश्विक संकट सामने आए. बाजार औंधे मुंह गिरा है. लेकिन उसके बाद जो होता है, उसपर पर आज बात होनी चाहिए. ताकि युद्ध और फिर उसके बाद कैसी आर्थिक स्थिति होती है, उसकी भी जानकारी होनी चाहिए. 

दरअसल, पिछले तीन दशक के आंकड़ों से पता चलता है कि एक युद्ध औसतन 4 हफ्ते तक चलती है, जिसमें शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आती है. लेकिन घटना के बाद बाजार भी फिर पीछे मुड़कर नहीं देखता है, युद्ध या बड़ी घटना के बाद सेंसेक्स ने अगले 3 से 6 महीने में रिटर्न 27-37 फीसदी तक दिया है. ICICI Direct ने एक नोट में ये आंकड़े सामने आए हैं. 

फिलहाल मिडिल-ईस्ट में तनाव के कारण दुनिया भर के शेयर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. भारत में भी निवेशकों की चिंता बढ़ी है और हाल के दिनों में सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई. लेकिन बाजार के जानकारों का कहना है कि इतिहास बताता है कि ऐसे भू-राजनीतिक संकट अक्सर निवेश के मौके भी बनाते हैं. 

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युद्ध खत्म होते ही तूफानी तेजी

रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध या बड़े आतंकी हमलों के बाद भारतीय शेयर बाजार ने कई बार मजबूत के साथ वापसी की है. आंकड़ों के मुताबिक, ऐसी घटनाओं के बाद एक महीने में औसतन 16%, 3 महीने में करीब 27% और 6 महीने में लगभग 37% तक रिटर्न देखने को मिला है.

पिछले 3 दशकों में हुए कई बड़े घटनाक्रमों को देखें तो 1990 का इराक युद्ध, 1999 का कारगिल युद्ध, 2001 का वर्ल्ड ट्रेड सेंटर हमला, 2008 का मुंबई आतंकी हमला, पुलवामा हमला और फिर 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बाजार ने कुछ ही महीनों से जबरदस्त तरीके वापसी की. सेंसेक्स ने औसतन ऐसी घटना के एक महीने बाद 16 फीसदी, तीन महीने में 27 फीसदी और छह महीने बाद 37 फीसदी रिटर्न दिया है.

गिरावट के दौरान कहां करें निवेश? 

इस बीच ICICI Direct ने निवेशकों को सलाह दी है कि फिलहाल डोमेस्टिक बिजनेस को ध्यान में रखकर पैसे लगाना चाहिए. खासकर बैंक, इंफ्रा, कैपिटल मार्केट, सीमेंट, ऑटोमोबाइल, जिनमें निर्यात का हिस्सा सबसे कम हो. निवेशकों को रियल एस्टेट (Real Estate) और खपत संबंधी शेयरों को भी प्राथमिकता देनी चाहिए. 

इतिहास बताता है कि युद्ध या बड़े हमलों की खबर आते ही बाजार में घबराहट बढ़ जाती है और निवेशक तेजी से बिकवाली करने लगते हैं. लेकिन कुछ समय बाद जब स्थिति स्पष्ट होने लगती है, तो निवेशक फिर से खरीदारी शुरू कर देते हैं और बाजार संभल जाता है. अभी क्यों गिर रहा है बाजार

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ब्रोकरेज हाउस Emkay Global का कहना है कि युद्ध के दौरान बाजार में दबाव इसलिए भी बढ़ जाता है कि कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेजी आ जाती है, फिर निवेशक सुरक्षित विकल्पों जैसे सोना-चांदी में निवेश करने लग जाते हैं. फिलहाल ईरान संकट के बीच भारतीय बाजार में 7-8 फीसदी की गिरावट देखी जा रही है. जिससे निवेशकों की बड़ी रकम डूब गई. युद्ध और वैश्विक अनिश्चितता के कारण विदेशी निवेशकों ने भी भारतीय बाजार से पैसा निकाला है. हालांकि निफ्टी के लिए 24,200-24,300 के बीच मजबूत सपोर्ट है. जब तक इंडेक्स इससे ऊपर रहता है, तब बड़ी गिरावट की संभावना कम है.

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