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New Labour Code: सैलरी, PF से ग्रेच्युटी तक... दूर हुआ कन्फ्यूजन, सरकार ने 45 दिन में जनता से मांगे सुझाव

Draft Rules Under New Labour Code: केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय ने बुधवार को नए श्रम कानूनों को लेकर ड्राफ्ट नियमों को पूर्व-प्रकाशित कर दिया है और इसके सार्वजनिक होने की तिथि से 30 से 45 दिनों के भीतर सभी हितधारकों से सुझाव मांगे हैं.

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नए श्रम कानूनों पर सरकार ने मांगे सुझाव (Photo: PTI)
नए श्रम कानूनों पर सरकार ने मांगे सुझाव (Photo: PTI)

बीता साल 2025 कई बदलावों से भरा रहा है. इसमें एक बड़ा चेंज लेबर कोड में किया गया था. इसके तहत 28 कानूनों को समाप्‍त करके सिर्फ 4 नए कानून को नोटिफाई किया गया. जो कि बीते 21 नवंबर 2025 से प्रभावी माना जाएगा. ये चार लेबर कोड मजदूरी संहिता (2019), औद्योगिक संबंध संहिता (2020), सामाजिक सुरक्षा संहिता (2020) और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियों संहिता (2020) हैं, जो कि कर्मचारियों के लिए Salary, PF, Pension और सोशल सिक्‍योरिटी से हेल्‍थ तक के नियमों के साथ हैं. ऐसा माना जा रहा है कि नए साल में इन सभी कानूनों को पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा. 

साल के आखिरी दिन 31 दिसंबर बुधवार को इन श्रम कानूनों को लेकर एक और कदम बढ़ाया गया है और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने सभी चार श्रम संहिताओं के तहत ड्राफ्ट नियमों को पूर्व-प्रकाशित कर दिया है. इसके साथ ही मंत्रालय ने ड्राफ्ट अधिसूचनाओं के सार्वजनिक होने की तिथि से 30 से 45 दिनों के भीतर सभी हितधारकों से कमेंट, आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं. बता दें कि परामर्श प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम नियमों को अधिसूचित किया जाएगा. 

Salary का कैलकुलेशन कैसे होगा
सैलरी पैकेज के बारे में वेतन संहिता (सेंट्रल) नियम, 2025 के ड्राफ्ट में न्यूनतम मजदूरी को निर्धारित करने, गणना करने और संशोधित करने के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं. इसके तहत न्यूनतम मजदूरी दैनिक आधार पर तय होगी और फिर एक स्टैंडर्ड फॉर्मूला यूज करके इसे प्रति घंटा और Monthly Wages में बदला जाएगा. 

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खास बात ये है कि इसकी गणना एक सामान्य कामकाजी वर्ग के परिवार की जरूरतों को ध्यान में रखकर होगी. इनमें भोजन, कपड़े, घर का किराया, ईंधन, बिजली, शिक्षा, मेडिकल खर्च और अन्य बुनियादी जरूरतें शामिल हैं. कुल मिलाकर केंद्र सरकार (Central Govt) द्वारा एक राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी तय की जाएगी, कोई भी राज्य इसके नीचे का आंकड़ा तय नहीं कर सकेगी. 

काम के घंटे और रात की शिफ्ट 
ड्राफ्ट रूल्स में सप्ताह में अधिकतम 48 काम के घंटे तय किए गए हैं, जबकि वेतन की गणना 8 घंटे के कार्य दिवस के आधार पर होगी. इसके अलावा रात की शिफ्टों (Night Shifts) के लिए वेतन की गणना भी खास तरीके से होगी. ये प्रावधान मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस, लॉजिस्टिक्स और आईटी सेक्टर्स के लिए महत्वपूर्ण हैं, जहां 24 घंटे काम होता है. महिला कर्मचारियों को सहमति और अनिवार्य सुरक्षा के साथ नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति दी गई है.

समय पर सैलरी और कटौती की लिमिट सेट
नए कानूनों के तहत कर्मचारियों को समय पर सैलरी दी जाएगी. कटौतियों पर सख्त लिमिट सेट की गई हैं. किसी भी वेतन अवधि में कुल कटौतियां कर्मचारी के वेतन के 50% या इससे कम हो सकती हैं, इससे अधिक नहीं. यानी सैलरी में सिर्फ बेसिक-पे, डीए (DA) और अन्‍य भत्ता शामिल होगा और ये सभी घटक कुल सैलरी या CTC का अधिकतम 50% होगा. बाकी 50% हिस्‍से में HRA, बोनस, कमीशन, PF, ओवरटाइम और अन्‍य शामिल होंगे. अगर ये अलाउंस तय सीमा से ज्‍यादा हो जाते हैं तो एक्‍स्‍ट्रा अमाउंट खुद ही सैलरी में जुड़ जाएगा. 

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अब एंप्लॉयर को कर्मचारी के वेतन में कटौती लगाने से पहले उचित प्रोसेस का पूरा पालन करना होगा, जिसमें संबंधित कर्मचारी को सूचित करना, उन्हें अपनी बात रखने का अवसर देना शामिल होगा. इसके साथ ही नए कानून के तहत अनुसूचित और अनियमित रोजगार के बीच के अंतर को खत्म किया गया है. वेतन संहिता अनौपचारिक श्रमिकों, कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों और फिक्स्ड टर्म एंप्लाई समेत सभी कर्मचारियों पर लागू होगी. इसके चलते गिग वर्कर्स और प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स को भी पहली बार कानूनी पहचान मिलेगी. उन्हें PF, बीमा, पेंशन जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभ मिल सकेंगे.

फिक्स्ड टर्म रोजगार और ग्रेच्युटी
नए कानून के तहत अब ग्रेच्‍युटी पाने के लिए 5 साल का इंतजार नहीं करना होगा, बल्कि 1 साल की सर्विस पर ही ग्रेच्‍युटी दिया जाएगा. यह ग्रेच्‍युटी फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी (FTE) और कॉन्‍ट्रैक्‍ट वर्कर्स को भी मिलेगा. इन कर्मचारियों को स्‍थायी कर्मचारियों के बराबर ही सभी फायदे जैसे छुट्टी, चिकित्सा और सामाजिक सुरक्षा भी दी जाएंगी. इस प्रावधान से इनकम सेफ्टी में सुधार और कॉन्ट्रैट एग्रीमेंट पर अत्यधिक निर्भरता कम होने की उम्मीद है.

ड्राफ्ट रूल्स में कर्मचारियों द्वारा कम भुगतान, लेट सैलरी, बिना पैसे के ओवरटाइम या बोनस से इनकार करने से संबंधित दावे दर्ज करने के लिए भी प्रावधान किया गया है, जिससे वे संहिता के तहत अधिकारियों द्वारा पारित आदेशों के खिलाफ अपील कर सकते हैं. एक अन्य महत्वपूर्ण नियम ये है कि सैलरी रजिस्टर और एंप्लाई रिकॉर्ड में लिंग और वेतन संबंधी डिटेल दर्ज होगी, जिससे भेदभाव की पहचान करना और उसे चुनौती देना आसान होगा.

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