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यूटिलिटी

रेजिडेंशियल या कमर्शियल, जानें कौन-सी प्रॉपर्टी खरीदना ज्यादा फायदेमंद?

इंवेस्टमेंट के लिए क्या बढ़िया
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कई बार जब हम लोग सिर्फ इन्वेस्टमेंट के लिए प्रॉपर्टी खरीदते हैं, तो अक्सर उलझन में होते हैं कि रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी में निवेश किया जाए या कमर्शियल प्रॉपर्टी में, किसमें निवेश करना बेहतर होगा, रिटर्न अच्छा मिलेगा जैसे कई सवाल भी घेरे होते हैं. आइये जानते हैं कि किस विकल्प के साथ क्या फायदा है, एक्सपर्ट इस बारे में क्या कहते हैं...

आपकी जरूरत क्या है?
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आपकी जरूरत क्या है? : किसी भी तरह का निवेश करने से पहले सबसे पहले हमें ये तय करना होता है कि आपकी जरूरत क्या है, क्योंकि रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी और कमर्शियल प्रॉपर्टी दोनों का ही अपना अलग चार्म है. अगर आपके पास पहले से खुद का मकान है और वो आपकी प्राथमिकता नहीं है तो इंवेस्टमेंट पर रिटर्न के हिसाब से रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की जगह कमर्शियल प्रॉपर्टी हमेशा बेहतर होती है, क्यों?

रिटर्न के लिए कमर्शियल प्रॉपर्टी बेहतर क्यों?
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रिटर्न के लिए कमर्शियल प्रॉपर्टी बेहतर क्यों? : दरअसल, रियल एस्टेट में निवेश करने पर अगर रिटर्न ऑन इंवेस्टमेंट के लिहाज से देखें तो कमर्शियल प्रॉपर्टी में ये बेहतर होता है. आम तौर पर मकान के किराये के बदले दुकान का किराया ज्यादा होता है, क्योंकि ऐसी प्रॉपर्टी किराये पर लेने वाला व्यक्ति उससे अपनी आय बढ़ाता है. वहीं बाजार में कमर्शियल प्रॉपर्टी का दाम रेजिडेंशियल के मुकाबले ज्यादा तेजी से बढ़ता है. ऐसे में यदि उसे री-सेल भी किया जाए तो वो बेहतर रिटर्न देता है.

रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी मांगती है निवेश?
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रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी मांगती है निवेश?: रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी किराये पर उठाने के बाद भी मकान मालिक का निवेश मांगती है, क्योंकि मकान किरायेदार को देने के बाद भी उसकी डेन्टिंग-पेंटिंग के कई खर्चे मकान मालिक के हिस्से आते हैं. इसके अलावा आमतौर पर मकानों के किरायेदार हमेशा बेहतर ऑप्शन की तलाश में रहते हैं तो उनके ज्यादा लंबे समय तक एक जगह रहने की संभावना नहीं होती. वहीं कमर्शियल प्रॉपर्टी किराये पर लेने वाला व्यक्ति उस जगह अपना कामकाज करता है तो वो ये छोटी-मोटी रिपेयरिंग के काम को खुद से ही पूरा कर लेता है. यदि कोई ऑफिस, रिटेल चेन, बैंक ऐसी जगह को किराये पर लेती है तो बहुत जल्दी उसे खाली नहीं करती. वहीं दुकान या ऑफिस को सजाने पर खर्च भी वहीं करता है, इसमें मालिक का निवेश नहीं होता.

रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी खरीदने का माइंडसेट
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रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी खरीदने का माइंडसेट : रियल एस्टेट डेवलपर कंपनी त्रेहान आइरिस के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर अमन त्रेहान का कहना है कि इंडिया में रियल एस्टेट बाजार हमेशा से ‘खुद का मकान’ की सोच पर चलता है. लेकिन विदेशों में ये एक आवश्यकता नहीं है. अब लेकिन यहां भी युवा निवेशक इसे लेकर नई तरह से सोचना शुरू कर रहा है. वजह लोगों को लगने लगा है कि रहा तो कम किराये के मकान में भी जा सकता है, और इसका किराया कमर्शियल प्रॉपर्टी से आने वाली रेंटल इनकम से हासिल किया जा सकता है. वहीं जब रीसेल की बात आएगी तो कमर्शियल प्रॉपर्टी पर निवेश अच्छा मिलेगा.

फेस्टिव सीजन में इंवेस्टमेंट के फायदे?
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फेस्टिव सीजन में इंवेस्टमेंट के फायदे? : इस बारे में रियल एस्टेट सेक्टर की स्व-नियमन संस्था Naredco के प्रेसिडेंट राजन बंदेलकर का कहना है कि फेस्टिव सीजन में रियल एस्टेट में निवेश करना बेहतर होता है. इसकी वजह अभी होम लोन की ब्याज दरें सबसे निचले स्तर पर हैं, जबकि फेस्टिव सीजन में कई ऑफर्स भी मिलते हैं. बाकी प्रॉपर्टी मार्केट में कीमतें स्थिर बनी हुई हैं और कई डेवलपर्स हर तरह की प्रॉपर्टी पर अच्छे ऑफर्स भी दे रहे हैं.