सोने की कीमतें पिछले करीब 5 महीने से गिर रही हैं. जब-जब सोने-चांदी के भाव सस्ते होते हैं तो अक्सर आम निवेशक खरीदते हैं, लेकिन फिलहाल कुछ महीनों से सोने के भाव गिरने के बावजूद भारतीय परिवारों में अपने पुराने सोने के गहनों को बेचने की होड़ मच गई है. लोग इस डर से अपने गहने नकद पैसों के बदले बेच रहे हैं कि कहीं आने वाले दिनों में सोने के दाम और ज्यादा न गिर जाए.
लोग नए गहनों के बदले क्यों चुन रहे हैं कैश?
फिलहाल बाजार में इस बात का असमंजस है कि अगर कीमतों में और बड़ी गिरावट आई, तो उन्हें अपने सोने का सही मूल्य नहीं मिल पाएगा. इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-जून की तिमाही में भारतीय परिवारों ने लगभग 50 टन (50 हजार किलो) पुराना सोना बेचा है. यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 43% अधिक है. (Photo: Getty)
गहने बेचकर कैश ले रहे हैं लोग
आमतौर पर भारतीय ग्राहक पुराने गहने देकर नए गहने खरीदते हैं, लेकिन इस बार ट्रेंड बदला हुआ है. लोग आभूषणों की अदला-बदली करने के बजाय सीधे उन्हें बेचकर मुनाफावसूली कर रहे हैं. फिलहाल एमसीएक्स (MCX) पर सोना अपने उच्चतम स्तर से गिरकर करीब 1.43 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है. ET की रिपोर्ट के मुताबिक कीमतें गिरकर 1.2 लाख रुपये तक आ सकती हैं. इसी गिरावट के डर से लोग अपने लॉकर में रखे सोने को भुना रहे हैं. इसी साल जनवरी सोने का भाव बढ़कर 1.91 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था. (Photo: Getty)
वैश्विक बाजारों का दबाव
घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव वैश्विक कारणों से भी है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड की कीमतों में कमी देखी गई है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण पिछले कुछ महीनों में कच्चे तेल के भाव में तेज उछाल आया था. वहीं दूसरी ओर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है. ऊंची ब्याज दरों के कारण निवेशक सोने जैसे बिना तय रिटर्न वाले एसेट से निकलकर ब्याज देने वाले साधनों (जैसे बॉन्ड्स) में निवेश बढ़ाते हैं, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव बनता है.
रीसाइक्लिंग उद्योग को मिला बड़ा बढ़ावा
ग्राहकों द्वारा पुराना सोना बेचने की इस प्रवृत्ति से देश के संगठित गोल्ड रीसाइक्लिंग उद्योग को जबरदस्त फायदा हो रहा है. लॉकरों में बेकार पड़ा सोना अब मुख्य अर्थव्यवस्था में वापस आ रहा है. इसे रिफाइन करके शुद्ध सोने में बदला जा रहा है और ज्वैलरी निर्माताओं को सप्लाई किया जा रहा है. मुथूट एक्सिम जैसी बड़ी कंपनियों ने अपने गोल्ड पॉइंट्स पर पुराने सोने की आवक में 40% तक की बढ़ोतरी दर्ज की है.
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
बता दें, भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में से एक है, लेकिन अपनी जरूरत का अधिकांश सोना विदेशों से आयात करता है. वित्तीय वर्ष 2026 में भारत ने लगभग 72.4 अरब डॉलर मूल्य के सोने का आयात किया था. साल 2025 में रीसाइक्लिंग के जरिए देश को 125-150 टन सोना मिला था, और यदि मौजूदा ट्रेंड जारी रहा, तो इस साल इसके बढ़कर 200-250 टन होने का अनुमान है. (Photo: AI)
भारतीय परिवारों के पास कितना सोना?
अनुमानों के मुताबिक भारतीय परिवारों के पास लगभग 30,000 टन सोना जमा है. ऐसे में पुराने सोने की रीसाइक्लिंग बढ़ने से न केवल देश की आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि उपभोक्ताओं को भी उनकी निष्क्रिय संपत्ति का सही मूल्य मिल सकेगा.
क्या आपको भी बेचना चाहिए अपना सोना?
वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि पुराना सोना बेचने का फैसला बाजार के उतार-चढ़ाव को देखकर नहीं, बल्कि अपनी व्यक्तिगत वित्तीय जरूरतों के आधार पर लिया जाना चाहिए. अगर आपके पास ऐसे पुराने गहने हैं जिनका अब उपयोग नहीं होता, तो मौजूदा ऊंचे दाम उन्हें भुनाने का एक अच्छा अवसर हो सकते हैं. हालांकि, लंबी अवधि के लिहाज से सोना आज भी महंगाई और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के खिलाफ एक बेहतरीन निवेश साधन माना जाता है. (Photo: PTI)