बीते दिनों लीबिया के पोर्ट पर हवाई हमलों की वजह से कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हो गई है. इस वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सिलसिला गुरुवार को जारी रहा. आने वाले दिनों में कच्चे तेल की तेजी का असर भारत पर भी देखने को मिल सकता है. दरअसल, भारत में पेट्रोल और डीजल के भाव अंतरराष्ट्रीय बाजार के कच्चे तेल की कीमतों पर तय होते हैं. कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं तो पेट्रोल और डीजल भी महंगा हो जाता है.
दो दिन से पेट्रोल-डीजल में स्थिरता
हालांकि, बीते दो दिनों से पेट्रोल और डीजल के दाम में स्थिरता बनी हुई है. इंडियन ऑयल की वेबसाइट के मुताबिक दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में पेट्रोल का दाम बिना किसी बदलाव क्रमश: 71.89 रुपये, 74.53 रुपये, 77.56 रुपये और 74.68 रुपये प्रति लीटर पर बना हुआ था. वहीं डीजल की कीमत भी स्थिरता के साथ क्रमश: 64.65 रुपये, 66.97 रुपये, 67.75 रुपये और 68.27 रुपये प्रति लीटर पर बनी हुई थी. इससे पहले पेट्रोल-डीजल के भाव में लगातार कटौती देखने को मिली थी, जिससे भाव 5 महीने के निचले स्तर पर आ गया था.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
एंजेल ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसीडेंट (एनर्जी एवं करेंसी रिसर्च) अनुज गुप्ता ने आईएएनएस को बताया, "पहले तेल उत्पादक देशों का संगठन ओपेक और रूस द्वारा तेल के उत्पादन में अतिरिक्त कटौती करने का संकेत दिए जाने से तेल के दाम में तेजी आई, जिसे लीबिया में तनाव के कारण आपूर्ति बाधित होने से सपोर्ट मिला है."
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उन्होंने कहा, "कोरोनावायरस के प्रकोप के चलते चीन में परिवहन व उद्योग-धंधों पर पड़ने वाले असर और तेल की खपत घटने के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इस महीने के आरंभ में तेल के दाम पर दबाव आया, लेकिन कोरोना वायरस के असर के चलते तेल की मांग जितनी घटेगी, उससे कहीं ज्यादा आपूर्ति घटने की आशंका है, क्योंकि लीबिया में तनाव के कारण तेल की आपूर्ति ठप हो गई है."