तमाम निराशाजनक खबरों के बीच एक अच्छी खबर सामने आई है. भारत ने जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का गौरव पा लिया है. वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है. एक अंग्रेजी अखबार ने यह खबर दी है. इस परिणाम के लिए पीपीपी को आधार बनाया गया है.
पीपीपी का पूरा अर्थ है परचेजिंग पॉवर पैरिटी और इससे दो देशों के लोगों के सामान खरीदने की शक्ति का पता चलता है. विदेशी मुद्रा के आधर पर तुलना करने की अपेक्षा इस तरह की तुलना कहीं बेहतर और सटीक मानी जाती है. 2011 के बैंक्स इंटरनेशनल कॉम्पैरिजन प्रोग्राम (आईसीपी) के अनुसार भारत, अमेरिका और चीन के बाद तीसरे नंबर की अर्थव्यवस्था बन गया है. 2005 में हुए सर्वे में भारत को दसवें नंबर पर रखा गया था. पीपीपी के जरिये अर्थव्यवस्थाओं और लोगों की आय को विभिन्न देशों में कीमतों के फर्क से नापा जाता है. इससे ही एक सार्थक तुलना संभव होती है.
2011 में विश्व की कुल जीडीपी में भारत का हिस्सा 6.4 प्रतिशत था जबकि चीन का 14.9 और अमेरिका का 17.1 प्रतिशत. इस सर्वे में 199 देशों को शामिल किया गया है. वर्ल्ड बैंक की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका अभी पहले नंबर की अर्थव्यवस्था है जबकि चीन दूसरे नंबर पर है. तीसरे नंबर पर भारत है जबकि जापान उसके पीछे है. भारत ने उसे पीछे छोड़ दिया है. हाल के समय मं भारत में भारी मुद्रास्फीति के बावजूद देश में महंगाई विकसित देशों की चुलना में काफी कम है. यानी जिस दर पर यहां सामान मिलते हैं विदेशों में उससे कहीं महंगे दरों पर मिलते हैं. लेकिन आईएमएफ की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था अभी 12वें नबर पर है और जापान की सिर्फ एक तिहाई है. लेकिन यह डॉलर पर आधारित गणना है.