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अनिल अंबानी पर ED की बड़ी कार्रवाई, ₹3,716 करोड़ का घर अटैच

यह कार्रवाई अनिल अंबानी की ग्रुप कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में की गई है. इस संपत्ति की अनुमानित कीमत 3,716.83 करोड़ रुपये बताई गई है.

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अनिल अंबानी के खिलाफ ईडी की बड़ी काईवाई (Photo: PTI)
अनिल अंबानी के खिलाफ ईडी की बड़ी काईवाई (Photo: PTI)

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. ईडी ने मुंबई स्थित 17 मंजिला आलीशान आवास Abode को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है.

यह कार्रवाई अनिल अंबानी की ग्रुप कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में की गई है. इस संपत्ति की अनुमानित कीमत 3,716.83 करोड़ रुपये बताई गई है.

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मुंबई के पाली हिल इलाके में स्थित 66 मीटर ऊंची इस लग्जरी इमारत के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अस्थायी अटैचमेंट आदेश जारी किया गया है. इस कार्रवाई के साथ ही मामले में अब तक कुर्क की गई कुल संपत्तियों का मूल्य लगभग 15,700 करोड़ रुपये पहुंच गया है.

66 साल के अनिल अंबानी से इस मामले में दूसरी बार पूछताछ की तैयारी है.अगस्त 2025 में वे पहली बार ED के सामने पेश हुए थे, जहां PMLA के तहत उनका बयान दर्ज किया गया था.

कथित RCom फ्रॉड से जुड़ा मामला

यह अटैचमेंट RCom में कथित वित्तीय अनियमितताओं और कर्ज की हेराफेरी से जुड़ी व्यापक जांच का हिस्सा है. ED की यह कार्रवाई सीबीआई द्वारा दर्ज दो एफआईआर के बाद हुई है. इन एफआईआर में रिलायंस अनिल अंबानी समूह की विभिन्न कंपनियों पर धोखाधड़ी, रिश्वतखोरी और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं.

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PMLA की धारा 17 के तहत समूह से जुड़े 35 से अधिक परिसरों पर छापेमारी की गई. यह कार्रवाई 50 से अधिक कंपनियों तक फैली और मुंबई व दिल्ली में 25 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई.

सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि 2017 से 2019 के बीच यस बैंक से लिए गए करीब 3,000 करोड़ रुपये के कर्ज को एक सुनियोजित तरीके से डायवर्ट किया गया. जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या धनराशि को शेल कंपनियों के जरिए घुमाकर (राउंड ट्रिपिंग) वापस लाया गया. इसके अलावा बैक-डेटेड क्रेडिट अप्रूवल मेमोरेंडम, बिना जांच के कर्ज को मंजूरी देने और औपचारिक मंजूरी से पहले ही राशि जारी करने जैसे गंभीर आरोपों की भी पड़ताल हो रही है.

सूत्रों के अनुसार, संभावित ‘क्विड-प्रो-क्वो’ (लेन-देन आधारित सौदेबाजी) की भी जांच हो रही है. आरोप है कि कर्ज वितरण से ठीक पहले यस बैंक के प्रमोटरों से जुड़ी संस्थाओं को धन प्राप्त हुआ.

इस जांच में नेशनल हाउसिंग बैंक, सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी), नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी और बैंक ऑफ बड़ौदा सहित कई एजेंसियों ने इनपुट साझा किए हैं.

रिलायंस होम फाइनेंस भी जांच के दायरे में

रिलायंस होम फाइनेंस भी जांच के घेरे में है. सेबी ने वित्त वर्ष 2017-18 में 3,742.60 करोड़ रुपये से बढ़कर 2018-19 में 8,670.80 करोड़ रुपये तक कॉरपोरेट लोन वितरण में तेज उछाल को लेकर सवाल उठाए हैं.

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ईडी यह जांच कर रही है कि क्या यह वृद्धि कथित कर्ज डायवर्जन योजना से जुड़ी थी, साथ ही संबंधित पक्षों को तेजी से मंजूरी देकर कर्ज देने के आरोपों की भी पड़ताल हो रही है.

इस कार्रवाई से पहले एसबीआई ने आरकॉम और इसके प्रमोटर अनिल अंबानी को भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों के तहत फ्रॉड घोषित किया था. एसबीआई का एक्सपोजर 2,227.64 करोड़ रुपये के फंड-आधारित कर्ज और 786.52 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी का है. मामले की सूचना आरबीआई को दे दी गई है और बैंक सीबीआई में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है.

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