भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर के लिए साल 2026 की शुरुआत धमाकेदार रही है. एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस साल की पहली तिमाही (जनवरी से मार्च) में विदेशी और घरेलू निवेशकों ने भारत की संपत्तियों में जबरदस्त दिलचस्पी दिखाई है.
आंकड़ों की बात करें तो इस साल के पहले तीन महीनों में कुल $5.1 बिलियन (लगभग 5.1 अरब डॉलर) का निवेश भारत आया है. पिछले साल इसी दौरान यह निवेश केवल $2.9 बिलियन था. इसका मतलब है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल निवेश में 72% की शानदार बढ़त दर्ज की गई है, जो अब तक की किसी भी तिमाही में सबसे अधिक है.
रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में निवेश में लगभग 53% का जोरदार उछाल देखा गया. यह आंकड़ा 2025 की चौथी तिमाही (Q4) के $3.3 बिलियन से बढ़कर अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जो भारत के रियल एस्टेट सेक्टर की बुनियादी मजबूती में संस्थागत निवेशकों के निरंतर विश्वास को दर्शाता है.
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रिपोर्ट में इस बात को भी रेखांकित किया गया है कि कुल निवेश का लगभग 65% हिस्सा अकेले बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली-एनसीआर में आया. विशेष रूप से, कुल विदेशी निवेश में सिंगापुर और कनाडा का दबदबा रहा, जिनकी हिस्सेदारी क्रमशः लगभग 72% और 27% रही.
रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 की पहली तिमाही (Q1) के दौरान निवेश की इस रफ़्तार का मुख्य कारण बने-बनाए ऑफिस एसेट्स (built-up office assets) और जमीन के अधिग्रहण में आई भारी पूंजी रही. कुल इक्विटी निवेश प्रवाह में इन दोनों क्षेत्रों की हिस्सेदारी 90% से अधिक रही.
खास बात यह है कि इस निवेश परिदृश्य में घरेलू निवेशकों का दबदबा रहा, जिनमें मुख्य रूप से डेवलपर्स शामिल थे. कुल निवेश प्रवाह में घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी लगभग 96% दर्ज की गई.
जमीन अधिग्रहण पर विशेष जोर
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस पूंजी का एक बड़ा हिस्सा जमीन खरीदने (land acquisitions) में लगाया गया. जमीन अधिग्रहण के लिए समर्पित कुल फंड का 73% से अधिक हिस्सा मिक्स्ड-यूज़ (मिश्रित उपयोग) और आवासीय परियोजनाओं (residential projects) में इस्तेमाल किया गया. बाकी बचा हुआ फंड ऑफिस, वेयरहाउसिंग और हॉस्पिटैलिटी विकास के लिए आवंटित किया गया था.