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रियल एस्टेट की तेज रफ्तार, पहली तिमाही में बिके 70 हजार से ज्यादा घर

1 करोड़ रुपये से अधिक की कीमत वाले अपार्टमेंट्स की कुल बिक्री में हिस्सेदारी बढ़कर 71% हो गई है, जो कि 2025 की पहली तिमाही में 59% थी. सालाना आधार पर इस सेगमेंट में 30% की जोरदार बढ़त दर्ज की गई है.

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1 करोड़ वाले घरों का जलवा (Photo-ITG)
1 करोड़ वाले घरों का जलवा (Photo-ITG)

भारतीय रियल एस्टेट की गाड़ी एक बार फिर रफ्तार पकड़ रही है. साल 2026 के पहले तीन महीनों में हुई कुल बिक्री में दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, मुंबई और पुणे का सबसे बड़ा हाथ रहा है. JLL रिपोर्ट बताती है कि अकेले इन चार शहरों ने देश की कुल 77% मांग को पूरा किया है.

JLL की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही (Q1) में भारत के टॉप सात शहरों में घरों की बिक्री 70,631 यूनिट्स तक पहुंच गई है. यह पिछले साल के मुकाबले 8% की बढ़ोतरी है. हालांकि, घरों की बिक्री की रफ़्तार नई लॉन्चिंग के मुकाबले थोड़ी धीमी रही है, जो आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच खरीदारों के बदलते मिजाज की ओर इशारा करती है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि बेंगलुरु, मुंबई, पुणे और दिल्ली-एनसीआर जैसे चार प्रमुख शहरों में से प्रत्येक में 10,000 से अधिक यूनिट्स की बिक्री दर्ज की गई. 

टॉप 7 शहरों में 20% तक बढ़ी कीमतें

बाजार में इस समय लग्जरी और प्रीमियम घरों का बोलबाला है. 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की कीमत वाले घरों की बिक्री में 30% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई है. खासतौर पर 1.5 से 3 करोड़ रुपये वाले घरों को लोग काफी पसंद कर रहे हैं. हालांकि, आम खरीदार अब थोड़ा संभलकर कदम उठा रहा है, क्योंकि जहां नई लॉन्चिंग 13% बढ़ी है, वहीं बिक्री की रफ्तार 8% पर रही है.

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बिक्री के मामले में इस बार चेन्नई ने सबको पीछे छोड़ दिया, जहां 61% की भारी बढ़त देखी गई. इसके बाद दिल्ली-एनसीआर में 30% और बेंगलुरु में 18% की तेजी रही. दूसरी ओर, पुणे में नए प्रोजेक्ट्स की कमी के चलते बिक्री में 14% की गिरावट आई है. 2026 की पहली तिमाही (Q1) में प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट का बाजार में दबदबा रहा.


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खास बात यह है कि 1.5 से 3 करोड़ रुपये वाले घरों की मांग में सालाना 67% का जबरदस्त उछाल आया है. यह दर्शाता है कि खरीदार अब प्राइम लोकेशन्स पर बड़े और आलीशान घरों को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं. दूसरी ओर, 1 करोड़ रुपये से कम वाले घरों के सेगमेंट में सालाना आधार पर 24% की गिरावट आई है. बाजार में इसकी हिस्सेदारी भी 41% से घटकर अब 29% रह गई है. इस बदलाव के पीछे जमीन और निर्माण की बढ़ती लागत, शहरों के मुख्य इलाकों में किफायती घरों की कमी और डेवलपर्स का प्रीमियम प्रोजेक्ट्स पर बढ़ता फोकस है. रिपोर्ट के अनुसार, नामी डेवलपर्स द्वारा दिए जा रहे ढेरों विकल्पों और बाजार की स्थिरता ने खरीदारों का भरोसा बढ़ाया है, जिससे वे प्रीमियम सेगमेंट की ओर रुख कर रहे हैं.
 

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