नोएडा में पिछले कुछ समय से प्रॉपर्टी की कीमतों और घरों के किराए में जो बेतहाशा बढ़ोतरी देखी जा रही है, वह कोई इत्तेफाक या कृत्रिम उछाल नहीं है. रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि इस 'सर्च' के पीछे शुद्ध रूप से डिमांड और सप्लाई का गहरा गणित काम कर रहा है.
आजतक रेडियो के कार्यक्रम 'प्रॉपर्टी से फायदा' में रियल एस्टेट एक्सपर्ट सौरव शर्मा कहते हैं- 'आज नोएडा पूरे उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के लिए सबसे 'एस्पिरेशनल' शहर बन गया है. यूपी की लगभग 25 करोड़ की आबादी के लिए नोएडा आज रोजगार और आधुनिक जीवनशैली का सबसे बड़ा केंद्र है. लोग छोटे शहरों से बड़े शहरों की ओर माइग्रेट कर रहे हैं और शहरीकरण की यह कहानी रुकने वाली नहीं है. यही वजह है कि नोएडा एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख इलाकों में ऑफिस और इंडस्ट्रियल हब बढ़ने के साथ-साथ रेंट भी लगातार बढ़ रहे हैं. '
सौरव का मानना है कि टॉप 7-8 शहरों में किराया कम होने की कोई संभावना नहीं है और यह औसतन 7-8% की वार्षिक दर से बढ़ता ही रहेगा. मध्यम वर्गीय खरीदारों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय उनका बजट है. अगर आपका बजट 50 से 80 लाख रुपये के बीच है और आप दिल्ली-एनसीआर में एक अच्छा घर ढूंढ रहे हैं, तो एक्सपर्ट की सलाह आपके लिए थोड़ी कड़वी हो सकती है.
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अच्छे इलाके में घर मिलना मुश्किल
सौरव शर्मा स्पष्ट कहते हैं कि '1 करोड़ रुपये से कम के बजट में आज के समय में ऐसा घर मिलना मुश्किल है, जहां आप खुशी-खुशी रह सकें. इस रेंज में मिलने वाले फ्लैट्स में अक्सर कई कमियां होती हैं, जैसे कि उनकी रजिस्ट्री रुकी हो सकती है या वे बहुत पुराने और जर्जर हो सकते हैं. एक खरीदार के तौर पर आप अपने फ्लैट को अंदर से तो रेनोवेट कर चमका सकते हैं, लेकिन पूरी सोसायटी की हालत नहीं सुधार सकते.'
सौरव का कहना है कि ऐसी सस्ती सोसायटियों में लिफ्ट गिरने या मेंटेनेंस न होने जैसी गंभीर समस्याएं आम होती हैं. इसलिए, यदि आपका बजट कम है, तो बेहतर है कि आप अपनी पसंद के इलाके में किराए पर रहें और उस 50-70 लाख की पूंजी को किसी बिजनेस में लगाकर उसे बढ़ाने पर ध्यान दें, जब वह राशि 1.5 से 2 करोड़ हो जाए, तब एक अच्छी सोसायटी में घर लेना समझदारी है.'
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