वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपने 9वे केंद्रीय बजट में रियल एस्टेट सेक्टर के लिए कई ऐलान किए हैं. इस बजट की सबसे खास घोषणा REITs (Real Estate Investment Trusts) के माध्यम से परिसंपत्तियों की रीसाइक्लिंग में तेजी लाने का प्रस्ताव है.
यह मॉडल डेवलपर्स और सरकारी संस्थाओं को अपनी पुरानी या 'डेड' संपत्तियों को मॉनेटाइज करने की अनुमति देगा, जिससे प्राप्त धन को नए प्रोजेक्ट्स में फिर से निवेश किया जा सकेगा. इससे न केवल बाजार में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा, बल्कि सेक्टर में पारदर्शिता और निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा. एसेट रीसाइक्लिंग का यह तंत्र प्रोजेक्ट्स के बीच में फंड की कमी की समस्या को दूर करने में गेम-चेंजर साबित होगा.
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टियर 2 और टियर 3 शहरों पर फोकस
सरकार का ध्यान अब महानगरों से हटकर टियर-2 और टियर-3 शहरों की ओर केंद्रित हुआ है. इन कस्बों में बुनियादी ढांचे की मजबूती और पेशेवर संस्थानों को दी जाने वाली सहायता से एक 'कॉरपोरेट मित्र' वातावरण तैयार होगा. जब इन छोटे शहरों में व्यापार सुगम होगा. साथ ही, 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर निरंतर जोर रहने से आवासीय संपत्तियों के मूल्य और मांग दोनों में सकारात्मक वृद्धि देखने को मिलेगी.
बजट में 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों का प्रस्ताव दिया गया है. दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी जैसे कॉरिडोर के आसपास के क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स हब, वेयरहाउसिंग और टाउनशिप के विकास की अपार संभावनाएं पैदा होंगी. इसके अलावा, ₹12.2 लाख करोड़ का विशाल पूंजीगत खर्च और औद्योगिक क्षेत्रों में ₹20,000 करोड़ के कार्बन कैप्चर प्रोजेक्ट्स यह सुनिश्चित करते हैं कि रियल एस्टेट का भविष्य न केवल आधुनिक होगा, बल्कि 'सस्टेनेबल' और पर्यावरण के अनुकूल भी होगा.
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