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करोड़ों का घर, लाखों का मेंटेनेंस, आम आदमी जितना कमाता है, रईस 'मेंटेनेंस' भरते हैं

मुंबई की अल्ट्रा-लग्जरी इमारतों में घर खरीदना जितना महंगा है, उतना ही भारी उसका मेंटेनेंस खर्च भी होता है. मुंबई में ऐसे कई लग्जरी घर हैं, जिनका सालाना मेंटेनेंस आम आदमी की पूरी साल की कमाई से भी ज्यादा बैठता है.

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इन घरों का सालभर का मेंटेनेंस एक आम आदमी की सालाना कमाई से भी ज्यादा होता है (Photo: pexels)
इन घरों का सालभर का मेंटेनेंस एक आम आदमी की सालाना कमाई से भी ज्यादा होता है (Photo: pexels)

मुंबई जैसे महानगर में घर खरीदना किसी बड़े सपने को पूरा करने जैसा है, लेकिन अगर बात देश की सबसे महंगी इमारतों की हो, तो कहानी सिर्फ 'खरीदने' पर खत्म नहीं होती.  जब हम इन इमारतों के मेंटेनेंस की बात करते हैं, तो इसमें सिर्फ बिजली का बिल या पानी का खर्चा शामिल नहीं होता, बल्कि इसमें एक ऐसी 'अदृश्य लाइफस्टाइल' की कीमत शामिल होती है, जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते.

इन सोसायटीज में 'मेंटेनेंस पर स्क्वायर फुट' का गणित चलता है. उदाहरण के लिए, दक्षिण मुंबई के पॉश इलाकों में ₹25 से ₹40 प्रति वर्ग फुट का चार्ज आम बात है. इसका मतलब यह है कि अगर आपके पास एक बड़ा 5,000 वर्ग फुट का पेंटहाउस है, तो आपको हर महीने सिर्फ ₹1.5 लाख से ₹2 लाख रुपये इसलिए देने होंगे ताकि आपकी बिल्डिंग की चमक बरकरार रहे. इसमें भी सबसे बड़ा हिस्सा जाता है 'कॉमन एरिया मेंटेनेंस' में, जिसमें ओलंपिक साइज के स्विमिंग पूल का तापमान बनाए रखना, वर्टिकल गार्डन्स की छंटाई और ऐसी हाई-स्पीड लिफ्ट्स का रखरखाव शामिल है, जो आपको पलक झपकते ही 60वीं मंजिल पर पहुंचा देती हैं.

इन ऊंची कीमतों की एक बड़ी वजह यहां मिलने वाली 'व्हाइट-ग्लोव सर्विसेज' भी है. इन टावरों में रहने वाले लोग साधारण वॉचमैन नहीं, बल्कि पेशेवर सुरक्षा एजेंसियों के ट्रेंड कमांडो और प्राइवेट कंसीयज सेवाओं के लिए पैसे देते हैं. इन टावरों में लगे सेंट्रलाइज्ड एयर कंडीशनिंग और वॉटर फिल्ट्रेशन प्लांट का खर्च इतना भारी होता है कि उसका एक छोटा सा हिस्सा भी हज़ारों में बैठता है.

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इन सोसायटीज का मेंटनेस चार्ज है हाई
 
दक्षिण मुंबई के अल्टामाउंट रोड पर स्थित लोढ़ा अल्टामाउंट (Lodha Altamount) बिल्डिंग अपनी प्राइवेसी और भव्यता के लिए जानी जाती है. यहां एक फ्लैट की कीमत ₹40 करोड़ से ₹100 करोड़ के बीच है. रिपोर्ट के मुताबिक, यहां मेंटेनेंस चार्ज ₹25 से ₹35 प्रति वर्ग फुट (Carpet Area) के आसपास हो सकता है. अगर किसी पास यहां 4,000 वर्ग फुट का एक बड़ा अपार्टमेंट है, तो मासिक मेंटेनेंस बिल ₹1 लाख से ₹1.5 लाख के बीच आ सकता है. इसमें 18% GST अलग से जुड़ता है. यानी साल भर का मेंटेनेंस खर्च ही ₹15 से ₹18 लाख बैठता है. इसमें निजी शेफ, वर्ल्ड-क्लास जिम,क्लब हाउस और हाई-एंड सिक्योरिटी जैसी सुविधाएं शामिल हैं.

वर्ल्ड टावर्स (The World Towers), लोअर परेल

लोढ़ा ग्रुप का यह प्रोजेक्ट दुनिया की सबसे ऊंची रिहायशी इमारतों में से एक है, यहां मेंटेनेंस चार्ज लगभग ₹20 से ₹30 प्रति वर्ग फुट के बीच रहता है. 3BHK और 4BHK फ्लैट्स का औसत मासिक मेंटेनेंस ₹60,000 से ₹90,000 तक जाता है. यहां निवासियों को 'अरमानी कासा' द्वारा डिजाइन किए गए इंटीरियर, प्राइवेट कैफे, और एक विशाल 'क्लब हाउस' की सुविधा मिलती है, जिसका रख-रखाव बेहद खर्चीला है.

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ओंकार 1973 (Omkar 1973), वर्ली

विराट कोहली और युवराज सिंह जैसे दिग्गजों का घर रह चुकी यह बिल्डिंग अपनी आलीशान सुविधाओं के लिए मशहूर है. यहां भी मेंटेनेंस की दरें ₹25 प्रति वर्ग फुट के आसपास हैं. बड़े फ्लैट्स के लिए यहां मासिक बिल ₹1 लाख के आंकड़े को आसानी से पार कर जाता है.

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रुस्तमजी क्राउन (Rustomjee Crown), प्रभादेवी

प्रभादेवी के प्राइम लोकेशन पर स्थित यह टावर आधुनिक रईसों की पहली पसंद है. यहां 3 और 4 BHK फ्लैट्स के लिए निवासी ₹50,000 से ₹75,000 प्रति माह का भुगतान कर रहे हैं. यहां मिलने वाली 'ग्लोबल कंसीयज' सेवा और इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के स्विमिंग पूल्स इसकी मेंटेनेंस कॉस्ट को बढ़ा देते हैं.

क्यों है इतना महंगा मेंटेनेंस?

मुंबई की इन हाई-प्रोफाइल इमारतों में मेंटेनेंस इतना ज्यादा होने की मुख्य वजहें ये हैं. वर्टिकल गार्डन और स्विमिंग पूल की देखभाल में लाखों लीटर पानी और भारी बिजली खर्च होती है. इन बिल्डिंग्स में अक्सर बड़े उद्योगपति और सेलेब्रिटीज रहते हैं, जिनके लिए इजरायली स्तर की सुरक्षा व्यवस्था की जाती है, ऐसी इमारतों में ऐसी लिफ्ट लगी होती हैं जो कुछ ही सेकंड्स में 50वीं मंजिल तक पहुंच जाती हैं, इनका सालाना रखरखाव बहुत महंगा होता है. मुंबई के अल्ट्रा-लक्जरी अपार्टमेंट्स में रहना सिर्फ एक 'स्टेटस सिंबल' नहीं है, बल्कि यह एक बहुत बड़ी आर्थिक जिम्मेदारी भी है.

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