भारतीय मध्यम वर्गीय परिवार के लिए घर खरीदना जीवन का सबसे बड़ा निवेश होता है, लेकिन क्या आपने गौर किया है कि आज आप जो 2BHK फ्लैट देख रहे हैं, वह 10 साल पहले के 2BHK के मुकाबले काफी छोटा हो गया है. भारत के प्रमुख शहरों जैसे बेंगलुरु, पुणे, मुंबई और दिल्ली-NCR में एक अजीबोगरीब ट्रेंड दिख रहा है. फ्लैट की कीमतें आसमान छू रही हैं, लेकिन उनका कारपेट एरिया लगातार घटता जा रहा है.
पिछले कुछ सालों में भारत के टॉप-7 शहरों में औसत फ्लैट का साइज लगभग 15-20% तक कम हुआ है. बेंगलुरु में कभी 1200 प्रति वर्ग फुट को एक मानक 2BHK माना जाता था, लेकिन अब यह घटकर 900-1000 प्रति वर्ग फुट. के बीच सिमट गया है. पुणे में फ्लैट साइज में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई है. यहां मिड-सेगमेंट घरों का साइज काफी तेजी से कम हुआ है ताकि उन्हें 'किफायती' श्रेणी में रखा जा सके. वहीं मुंबई में तो स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है, जहां पहले से ही जगह की कमी थी, यहां अब 'नैनो-होम्स' और 'कॉम्पैक्ट 1BHK' का चलन बढ़ गया है.
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आखिर क्यों घट रहा है साइज?
प्रॉपर्टी की दरें प्रति वर्ग फुट तेजी से बढ़ी हैं. अगर बिल्डर पुराने बड़े साइज के फ्लैट बनाता है, तो उसकी कुल कीमत एक आम खरीदार के बजट (जैसे 60-80 लाख) से बाहर हो जाएगी. खरीदार को 'टिकट साइज' आकर्षित करने के लिए बिल्डर फ्लैट का क्षेत्रफल कम कर देते हैं ताकि कीमत वैसी ही दिखे जैसी 2 साल पहले थी. स्टील, सीमेंट और लेबर की लागत पिछले कुछ वर्षों में 25-30% तक बढ़ गई है. बिल्डरों के लिए अपना प्रॉफिट मार्जिन बचाए रखने का सबसे आसान तरीका यह है कि वे कम जगह में ज्यादा फ्लैट्स निकालें.
वहीं आज की युवा पीढ़ी बड़े और रखरखाव में मुश्किल घरों के बजाय 'स्मार्ट होम्स' को प्राथमिकता दे रही है. ऑफिस जाने वाले कपल्स के लिए शहर के प्राइम लोकेशन पर छोटा घर होना, शहर से दूर बड़े घर होने से ज्यादा बेहतर है. बेंगलुरु और पुणे जैसे शहरों में जहां आईटी प्रोफेशनल्स की संख्या ज्यादा है, वहां 'कॉम्पैक्ट लग्जरी' का कॉन्सेप्ट हिट हो रहा है. बिल्डर्स अब मास्टर बेडरूम का साइज छोटा कर रहे हैं और बालकनी को कमरों में मर्ज कर रहे हैं. पुणे के हिंजवड़ी और बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड जैसे इलाकों में 2BHK अब केवल 750-850 sq. ft. के कारपेट एरिया में सिमट गए हैं.
खरीदार पर इसका क्या असर हो रहा है?
पहली नज़र में, कम कीमत वाला छोटा फ्लैट आकर्षक लग सकता है, लेकिन लंबी अवधि में यह कई चुनौतियां पेश करता है, छोटे कमरों में अलमारी और जरूरी सामान रखने की जगह कम हो जाती है.
भविष्य में जब परिवार बढ़ता है, तो इन छोटे घरों को बेचना मुश्किल हो सकता है क्योंकि खरीदार अधिक जगह की तलाश करते हैं, वित्तीय सलाहकार और रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि खरीदारों को अब केवल 'बेडरूम की संख्या' नहीं, बल्कि 'कारपेट एरिया' और 'एफिशिएंसी रेशियो' पर ध्यान देना चाहिए.
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