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दुबई से उठा भरोसा, मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत में बरसेगा रईसों का पैसा!

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते दुबई जैसे बाजारों से निवेशकों का भरोसा डगमगाया है, जिसके बाद अब दुनिया भर के रईस और एनआरआई सुरक्षित रिटर्न के लिए भारत के रियल एस्टेट का रुख कर रहे हैं.

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खाड़ी देशों में तनाव के बीच भारत में बरसेगा विदेशी पैसा (Photo-Pexels)
खाड़ी देशों में तनाव के बीच भारत में बरसेगा विदेशी पैसा (Photo-Pexels)

मिडिल ईस्ट में गहराते भू-राजनीतिक संकट और वैश्विक बाजारों में जारी अनिश्चितता के बीच सुरक्षित निवेश की परिभाषा पूरी तरह बदल गई है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते जोखिमों के कारण निवेशक अब केवल ऊंचे रिटर्न के बजाय लंबी अवधि की स्थिरता और सुरक्षा की तलाश कर रहे हैं, और इस कसौटी पर भारत का रियल एस्टेट सेक्टर दुनिया भर की नजरों में एक मजबूत 'सेफ हेवन' के रूप में उभरा है.

दुनिया भर के रईस लोग जो दुबई के रियल एस्टेट मार्केट में निवेश कर रहे थे वो अब भारत की ओर आस लगाकर बैठे हैं. बेहतर कनेक्टिविटी, आईटी-कॉर्पोरेट हब के विस्तार और बेहतरीन लाइफस्टाइल के दम पर गुरुग्राम, नोएडा, बेंगलुरु और पुणे जैसे शहर न केवल अनिवासी भारतीयों की पहली पसंद बन चुके हैं, बल्कि घरेलू निवेशकों के लिए भी पूंजी सुरक्षा  का सबसे भरोसेमंद जरिया साबित हो रहे हैं.

एक्सपर्ट्स का मानना है कि तेजी से होते शहरीकरण, बुनियादी ढांचे के कायाकल्प और घरों की वास्तविक मांग के कारण भारतीय प्रॉपर्टी बाजार में विदेशी पूंजी का प्रवाह आने वाले समय में और तेज होगा. हालांकि, बाजार में छाए इस सकारात्मक माहौल और लग्जरी और प्रीमियम सेगमेंट में बढ़ते अभूतपूर्व विश्वास के बीच सिक्के का दूसरा पहलू भी है. वैश्विक उठापटक के इस दौर में डेवलपर्स और निवेशकों को देश के भीतर बढ़ती कंस्ट्रक्शन कॉस्ट, महंगाई, कच्चे तेल के दामों और होम लोन की ब्याज दरों जैसे आर्थिक कारकों पर भी पैनी नजर रखनी होगी.

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

वोमेकी ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन गौरव के सिंह कहते हैं- 'मिडिल ईस्ट के मौजूदा संकट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'सुरक्षित निवेश' की परिभाषा बदल दी है. निवेशक अब केवल ऊंचे रिटर्न के पीछे नहीं, बल्कि लंबी अवधि की स्थिरता चाहते हैं. यही वजह है कि भारत का रियल एस्टेट मार्केट आज दुनिया की नजरों में है. बेहतर कनेक्टिविटी, आईटी-कॉर्पोरेट हब का विकास और आधुनिक जीवनशैली की वजह से गुरुग्राम, नोएडा, बेंगलुरु और पुणे एनआरआई कम्युनिटी की पहली पसंद बन चुके हैं. यह विदेशी पूंजी प्रवाह आने वाले समय में केवल घरों की बिक्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह बुनियादी ढांचे के विकास और रोजगार देने वाला है.'

NK Realtors के एमडी पवन अग्रवाल कहते हैं- ' अनिश्चितताओं के कारण निवेशकों का रुझान अब उन एसेट क्लासेस की तरफ बढ़ा है जो लंबी अवधि में स्थिरता दे सकें. यही वजह है कि घरेलू रियल एस्टेट आज एक बेहतरीन 'वेल्थ प्रिजर्वेशन' टूल के रूप में स्थापित हो रहा है. पारदर्शी व्यवस्था, सरकारी नीतियों और इंफ्रास्ट्रक्चर के कायाकल्प ने लग्जरी और प्रीमियम आवासीय बाजार में अभूतपूर्व विश्वास पैदा किया है. भविष्य का संकेत साफ है जैसे-जैसे वैश्विक बाजार अस्थिर होंगे, भारतीय निवेशकों का अपनी घरेलू जमीन और रियल एस्टेट पर भरोसा और मजबूत होता जाएगा."

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सांघवी रियल्टी के निदेशक पक्षाल सांघवी कहते हैं- 'घरेलू मांग में उछाल, शहरीकरण की तेज रफ्तार और बुनियादी ढांचे के विकास के दम पर भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच भी मजबूती से डटा हुआ है. यही कारण है कि अपनी जमीन से जुड़े सुरक्षित और स्थिर रिटर्न की चाह में अनिवासी भारतीय बड़े पैमाने पर यहां निवेश बढ़ा रहे हैं, लेकिन बाजार में छाई इस पॉजिटिविटी के बावजूद सिक्के का दूसरा पहलू भी है. डेवलपर्स और इनवेस्टर्स को आने वाले समय में महंगाई, बढ़ती कंस्ट्रक्शन कॉस्ट, तेल के दामों और होम लोन की ब्याज दरों जैसे फैक्टर्स को लेकर सावधान रहना होगा. आखिरकार, दुनिया भर में होने वाली राजनीतिक उठापटक का सीधा असर हमारी अर्थव्यवस्था और मार्केट सेंटिमेंट पर पड़ता है."

एलायंस सिटी डेवलपर्स के सीईओ अंकिता लुहारुका का कहना है-  'भले ही वैश्विक तनावों के कारण आर्थिक बाजारों में थोड़ी बहुत हलचल दिखे, लेकिन भारत में घरों की मांग कम नहीं होने वाली. इसकी वजह है, तेजी से बढ़ता शहरीकरण, इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास और असली खरीदारों की मौजूदगी. जब भी वैश्विक माहौल खराब होता है, निवेशक एक ठोस और सुरक्षित विकल्प के रूप में रियल एस्टेट पर भरोसा जताते हैं. भारतीय परिवारों के लिए अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने और संपत्ति बढ़ाने के लिए प्रॉपर्टी बाजार एक बेहतरीन और टिकाऊ विकल्प बनकर उभर रहा है."

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MORES के सीईओ मोहित मित्तल का कहना है- ' लंबे समय तक खाड़ी देशों को निवेश के लिए सुरक्षित माना जाता था, लेकिन मौजूदा तनाव, जैसी स्थितियों ने इस भरोसे को कमजोर किया है. 2025 में भारतीयों ने दुबई में ₹85,000–95,000 करोड़ की संपत्ति खरीदी, लेकिन बढ़ती अनिश्चितता के बीच अब निवेशक अपने धन की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं. इसका सीधा लाभ भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र को मिल रहा है.'

इस बदलाव का असर अब बेहतर कनेक्टिविटी वाले शहरों लखनऊ, अहमदाबाद, पुणे, जयपुर, एनसीआर और तटीय शहरों में साफ दिख रहा है, पहले घर खरीदना भावनात्मक फैसला था, आज यह सबसे समझदारी भरा निवेश बन चुका है.

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