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DDA का फैसला, कड़कड़डूमा फ्लैट्स के लिए 30 जून तक पेमेंट की मोहलत

खरीदार अब जून के अंत तक बिना किसी अतिरिक्त ब्याज के अपने फ्लैट का बकाया पैसा जमा करा सकेंगे. ई-नीलामी और FCFS स्कीम के तहत फ्लैट पाने वाले आवंटियों को अब पजेशन मिलने तक वित्तीय बोझ से राहत मिलेगी.

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'टावरिंग हाइट्स' के लिए 30 जून तक भुगतान की डेडलाइन बढ़ी (Photo-ITG)
'टावरिंग हाइट्स' के लिए 30 जून तक भुगतान की डेडलाइन बढ़ी (Photo-ITG)

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने कड़कड़डूमा स्थित अपनी प्रीमियम 'टावरिंग हाइट्स' परियोजना के तहत आवंटित फ्लैटों के भुगतान की समय-सीमा बढ़ा दी है. यह राहत 2025 की ई-नीलामी और 2026 की 'पहले आओ-पहले पाओ' (FCFS) हाउसिंग स्कीम, दोनों के तहत फ्लैट पाने वाले खरीदारों को दी गई है. भुगतान की संशोधित समय-सीमा अब 30 जून, 2026 तय की गई है, जिससे उन खरीदारों को बड़ी राहत मिली है जो पजेशन को लेकर स्पष्टता का इंतजार कर रहे थे.

डीडीए ने वैधानिक मंजूरी मिलने में हो रही देरी को समय-सीमा बढ़ाने का मुख्य कारण बताया है. प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि परियोजना का निर्माण कार्य भौतिक रूप से पूरा होने के बाद भी सभी आवश्यक क्लीयरेंस प्राप्त करने में 30 से 45 दिनों का समय लग सकता है. इसके अलावा कई आवंटियों ने अधिक समय की मांग की थी, क्योंकि पजेशन मिलने की संभावित समय-सीमा शुरुआती निर्धारित तिथि जुलाई 2026 से आगे बढ़ने के आसार हैं.

डीडीए ने अपने परिपत्र में कहा, “चूंकि परियोजना पूर्ण होने की तिथि से वैधानिक मंजूरी प्राप्त करने में 30-45 दिन लगने की संभावना है, और जुलाई 2026 के बाद होने वाली संभावित देरी को देखते हुए अतिरिक्त समय की मांग करने वाले आवंटियों के अनुरोधों पर विचार करते हुए, भुगतान की अंतिम तिथि बढ़ाकर 30 जून कर दी गई है. 

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राजधानी दिल्ली की सबसे  ऊंची रिहायशी इमारत

समय-सीमा में यह विस्तार इस प्रोजेक्ट की भारी मांग को देखते हुए किया गया है. 'हिंदुस्तान टाइम्स' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, टावरिंग हाइट्स प्रोजेक्ट के तहत ई-नीलामी के जरिए 1,026 प्रीमियम 2BHK अपार्टमेंट पेश किए गए थे, जिनकी शुरुआती कीमत ₹1.8 करोड़ से ₹3.1 करोड़ के बीच रखी गई थी. इसके अलावा, कड़कड़डूमा हाउसिंग स्कीम 2026 के तहत 741 फ्लैट आम खरीदारों के लिए 'पहले आओ-पहले पाओ' के आधार पर उपलब्ध कराए गए थे, जबकि 107 यूनिट्स सरकारी संस्थानों के लिए आरक्षित रखी गई थीं.

टावरिंग हाइट्स एक ऐतिहासिक प्रोजेक्ट है, जो दिल्ली की 'ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट' पॉलिसी के तहत डीडीए (DDA) का पहला प्रोजेक्ट है. पूर्वी दिल्ली के कड़कड़डूमा इलाके में स्थित इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य 'एनबीसीसी' (NBCC) की देखरेख में किया जा रहा है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी 48 मंजिला आवासीय इमारत है, जिसकी ऊंचाई 155 मीटर है. यह इसे देश की राजधानी की सबसे ऊंची रिहायशी इमारत बनाती है.

करीब 30 हेक्टेयर में फैला यह 'ईस्ट दिल्ली हब', एक मिक्स्ड-यूज़ अर्बन सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां घर, ऑफिस और नागरिक सुविधाएं एक साथ मिलेंगी. कनेक्टिविटी के मामले में भी यह लाजवाब है. यह कड़कड़डूमा इंटरचेंज मेट्रो स्टेशन के ठीक बगल में है, जो ब्लू और पिंक लाइन को जोड़ता है. साथ ही, यह NH-9 और NH-24 के करीब है और आनंद विहार ISBT व रेलवे स्टेशन से भी इसकी दूरी बहुत कम है, जिससे यहां रहने वालों के लिए आवाजाही बेहद आसान होगी.

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