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अक्षय तृतीया पर प्रॉपर्टी खरीदने का है प्लान, पहले जान लें एक्सपर्ट्स की ये सलाह

अक्षय तृतीया पर बाज़ार का रुख अब बदल रहा है. स्थिरता और भविष्य की सुरक्षा को देखते हुए आधुनिक खरीदारों की पहली पसंद अब 'सोना' नहीं बल्कि 'प्रॉपर्टी' बनती जा रही है. लेकिन, एक घर खरीदना केवल एक शुभ शुरुआत नहीं, बल्कि एक बड़ी वित्तीय जिम्मेदारी है.

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अक्षय तृतिया पर सोना ही नहीं लोग प्रॉपर्टी में भी कर रहे हैं निवेश (Photo-इंडिया टुडे)
अक्षय तृतिया पर सोना ही नहीं लोग प्रॉपर्टी में भी कर रहे हैं निवेश (Photo-इंडिया टुडे)

अक्षय तृतीया को अक्सर लोग कुछ नया शुरू करने के लिए शुभ दिन मानते हैं. चाहे वह सोना खरीदना हो या कोई बड़ा वित्तीय कदम उठाना. लेकिन हाल के सालों में, लोग सोने से आगे बढ़कर रियल एस्टेट की ओर रुख करने लगे हैं. हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि, सिर्फ यह सोचकर घर न खरीदें कि आज का दिन शुभ है और सब अच्छा ही होगा. भावनाओं में बहने के बजाय, पूरी जांच-पड़ताल करने के बाद ही फैसला लें.

परंपरागत रूप से, अक्षय तृतीया पर सोना निवेश का सबसे पसंदीदा विकल्प रहा है, लेकिन यह चलन धीरे-धीरे बदल रहा है. आज, खरीदार संपत्ति को एक दीर्घकालिक संपत्ति के रूप में देख रहे हैं, जो स्थिरता और विकास दोनों देती है. स्टर्लिंग डेवलपर्स की मार्केटिंग डायरेक्टर, अंजना शास्त्री बताती हैं, 'भारत में लोग अक्सर बड़े त्योहारों या शुभ दिनों पर बड़े आर्थिक फैसले लेना पसंद करते हैं. अक्षय तृतीया एक ऐसा खास दिन है, जब किया गया निवेश न सिर्फ नई शुरुआत देता है, बल्कि भविष्य में संपत्ति को बढ़ाने और अमीर बनाने में भी मदद करता है."

उनका यह भी कहना है अब प्रॉपर्टी खरीदना पहले से ज़्यादा सुरक्षित हो गया है, क्योंकि नियमों में सख्ती आई है और हेरा-फेरी कम हुई है. इसी भरोसे की वजह से अब नए खरीदार हों या पुराने खिलाड़ी, सभी सिर्फ 'सस्ता' घर नहीं ढूंढ रहे. वे ऐसी जगह पैसा लगाना चाहते हैं जहां अच्छी सुविधाएं हों, आसपास के लोग अच्छे हों और भविष्य में उस घर की कीमत भी अच्छी बढ़े.

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स्तावेजों की सावधानीपूर्वक जांच करें

अवसर कितना भी अनुकूल क्यों न लगे, कागजी कार्रवाई हमेशा प्राथमिकता होनी चाहिए. रेरा (RERA) पंजीकरण से लेकर लैंड टाइटल तक, हर विवरण को सत्यापित करने की आवश्यकता है. शुभ दिन की परंपरा को तो मानें, लेकिन अपनी अक्ल भी लगाएं. जोश में आकर निवेश करने से पहले यह पक्का कर लें कि प्रोजेक्ट रेरा (RERA) में रजिस्टर्ड हो, जमीन के कागज़ात बिल्कुल सही हों और बिल्डर ने पहले जो काम किया है, उसका रिकॉर्ड अच्छा हो.'

वो विकल्पों की तुलना करने, कुल लागत  की जांच करने और किसी भी चीज़ पर हस्ताक्षर करने से पहले समझौते को ध्यान से पढ़ने का सुझाव भी देते हैं.

समय से ज्यादा स्थान मायने रखता है

कई खरीदार त्योहारी ऑफर्स के दौरान जल्दबाजी में निर्णय लेते हैं, लेकिन विशेषज्ञ केवल समय के आधार पर संपत्ति चुनने के खिलाफ चेतावनी देते हैं. मित्तल खरीदारों को परिवहन कनेक्टिविटी, भविष्य की विकास क्षमता और रिसेल वैल्यू जैसे कारकों को देखने की सलाह देते हैं. यह जानना भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि संपत्ति व्यक्तिगत उपयोग के लिए है या निवेश के लिए.

द हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, समुज्ज्वल घोष कहते हैं, "ज़मीन खरीदना कोई 'आज खरीदा और कल मुनाफा कमाया' वाला खेल नहीं है. अगर आपको मोटा पैसा बनाना है, तो कम से कम 10 से 15 साल तक इंतज़ार करने का दम रखें और उन जगहों पर ज़मीन लें, जहां अभी विकास शुरू होने वाला है."

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उन्होंने बताया कि कई खरीदार पहले से विकसित क्षेत्रों में निवेश करते हैं, जहां कीमतों में वृद्धि पहले ही हो चुकी होती है. वे कहते हैं कि एक बेहतर तरीका उन उभरते हुए स्थानों की पहचान करना है जो भविष्य के बुनियादी ढांचे के विकास से लाभान्वित होने वाले हैं.

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लुभावने लगने वाले ऑफर्स से सावधान रहें

त्योहारी सौदे आकर्षक हो सकते हैं, जिनमें डेवलपर्स छूट, लचीली भुगतान योजनाएं और अतिरिक्त लाभ प्रदान करते हैं. लेकिन इन्हें संपत्ति की मूल बुनियादी बातों से ध्यान नहीं भटकाना चाहिए. SILA एस्टेट्स के उपाध्यक्ष, ब्रिजाय आर्या का कहना है कि अक्षय तृतीया को रियल एस्टेट में निवेश के लिए व्यापक रूप से एक शुभ समय माना जाता है, जो डेवलपर्स को खरीदारों को आकर्षित करने के लिए आकर्षक सौदे और कई योजनाएं पेश करने के लिए प्रेरित करता है.

वे सीमित अवधि के प्रस्तावों से प्रभावित होने के बजाय मंजूरी, समयसीमा, डेवलपर की विश्वसनीयता और कुल मूल्य निर्धारण की जांच करने के महत्व पर जोर देते हैं. खरीदारों द्वारा की जाने वाली सबसे बड़ी गलतियों में से एक शुरुआत में दस्तावेजों का ठीक से सत्यापन न करना है, इससे बाद में समस्याएं हो सकती हैं.

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अक्षय तृतीया निवेश करने के लिए एक अच्छा समय हो सकता है, लेकिन इसे सावधानीपूर्वक निर्णय लेने की जगह नहीं लेनी चाहिए. संपत्ति खरीदना एक भावनात्मक और वित्तीय दोनों तरह की प्रतिबद्धता है.

रिपोर्ट: जैसमीन आनंद

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