आप वेतनभोगी हैं, तो आपकी सैलरी स्लिप में कई अलाउंस शामिल होते हैं.
इनमें से कुछ पर आपको टैक्स छूट मिलती है, तो कुछ पर आपकी टैक्स देनदारी
बनती है. ऐसे में इनकी बेहतर जानकारी रखना आपके लिए फायदेमंद साबित होता
है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
घर का किराया (HRA):
अगर आपकी सैलरी में घर का किराया अथवा हाउस रेंट अलाउंस शामिल है और आप किराये के मकान पर रहते हैं, तो आप इस पर टैक्स छूट हासिल कर सकते हैं. हालांकि यह छूट आपको कुछ नियम व शर्तों के साथ मिलती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
हालांकि अगर आप किसी भी तरह का किराया नहीं भरते हैं, तो सैलरी में मिलने वाला आपका पूरा HRA टैक्सेबल होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA):
अगर ट्रांसपोर्ट अलाउंस आपकी सैलरी का हिस्सा है, तो आप हर साल 19200 रुपये के TA पर टैक्स छूट पा सकते हैं. हालांकि नेत्रहीन, बधिर और दिव्यांग कर्मचारियों के लिए यह 32000 रुपये सालाना होता है. इसके लिए भले ही आपको किसी भी तरह का बिल नहीं भरना पड़ता है, लेकिन जरूरी है कि आप कंपनी की तरफ से दी जा रही परिवहन सुविधा न लेते हों. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
ये चीज रखें ध्यान:
इस बार बजट में ट्रांसपोर्ट अलाउंस और मेडिकल रिइंबर्शमेंट खत्म कर दिया गया है. इसकी वजह से अगले साल से आपको यह नहीं मिलेगा. इसकी जगह पर आपको 40 हजार रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलेगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
लीव ट्रैवल अलाउंस (LTA):
सैलरी में मिलने वाले LTA पर भी आप टैक्स छूट पा सकते हैं. हाालंकि इसके कुछ नियम व शर्तें हैं, जिन्हें पूरा करने के बाद ही आप इसका फायदा उठा सकते हैं. जैसे कि LTA आप 4 साल के एक ब्लॉक में सिर्फ दो यात्राओं पर ही क्लेम कर सकते हैं. इसमें एयर ट्रैवल और ट्रेन का ही सफर शामिल किया जाता है. बस और कार का कुछ खास मामलों में ही शामिल होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
डियरनेस अलाउंस (DA):
ज्यादातर समय पर DA सरकारी कर्मचारियों को मिलता है. हालांकि आप चाहे सरकारी कर्मचारी हों या गैर-सरकारी, अगर आपको DA मिलता है तो इस पर आपको टैक्स चुकाना होता है. इसमें आपको टैक्स छूट नहीं मिलती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
मेडिकल रिइंबर्समेंट:
मेडिकल रिइंबर्समेंट अगर आपकी सैलरी में शामिल है, तो आप 15 हजार रुपये तक के अलाउंस पर टैक्स छूट पा सकते हैं. मेडिकल रिइंबर्समेंट आपके इम्प्लॉई द्वारा आपके और आपके परिवार के मेडिकल खर्च का वहन करने के लिए दिया जाता है. इसके लिए आपको बिल जमा करना जरूरी होता है. हालांकि अगले साल से यह खत्म कर दिया गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस:
फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस अगर आपकी तनख्वाह का हिस्सा है, तो इस पर आपको टैक्स छूट नहीं मिलती है. इसे मेडिकल रिइंबर्समेंट के साथ न जोड़ें. दोनों चीजें अलग हैं. मेडिकल अलाउंस जहां टैक्सेबल है. वहीं, मेडिकल रिइंबर्समेंट पर टैक्स छूट होती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
चिल्ड्रन एजुकेशन अलाउंस:
आपकी सैलरी में अगर आपको चिल्ड्रन एजुकेशन अलाउंस मिल रहा है, तो इस पर भी आप टैक्स छूट हासिल कर सकते हैं. हालांकि यह सीमित है. इसके तहत आप सालाना 1200 रुपये पर टैक्स छूट पा सकते हैं. यह छूट आप अधिकतम दो बच्चों के लिए हासिल कर सकते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
स्पेशल अलाउंस:
कई बार कुछ कंपनियां अपने कर्मचारियों को कुछ स्पेशल अलाउंस देती हैं. ऐसे अलाउंस पर आपको टैक्स देना पड़ता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)