वेस्ट एशिया में जंग के कारण तेल और गैस के दाम में तेज उछाल आया है, क्योंकि ग्लोबल सप्लाई में रुकावट देखी गई है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बाधित होने से ग्लोबल सप्लाई का 20 फीसदी एनर्जी हिस्सा रुका हुआ है, जिस कारण तेल-गैस के दाम में तेजी जारी है.
इस बीच, निवेशकों को यह भी उम्मीद थी कि सोने-चांदी के दाम में भी इजाफा होगा, क्योंकि जब भी जियो-पॉलिटिकल टेंशन बढ़ता है, तो सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिलती है. लेकिन ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जंग जारी होने के बाद से सोने और चांदी की कीमतों में कोई खास तेजी नहीं देखी गई है. आइए समझते हैं इसके क्या कारण हो सकते हैं?
इतने सस्ते हुए गोल्ड-सिल्वर के रेट्स
शुक्रवार को एमसीएक्स पर सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली. 10 ग्राम सोने का भाव करीब 100 रुपये गिरकर 158400 रुपये पर बंद हुआ और चांदी 8,683 रुपये गिरकर 2,59,279 रुपये बनी रही. वहीं जंग शुरू होने से पहले गोल्ड-सिल्वर ने ऑल टाइम हाई लगाया था, लेकिन उसके बाद से गिरावट जारी है.
गोल्ड का रिकॉर्ड हाई लेवल 1.93 लाख रुपये है और चांदी का रिकॉड हाई लेवल 4.20 लाख रुपये प्रति किलो है. ऐसे में देखा जाए तो सोना 34,600 रुपये सस्ता है और चांदी 1.60 लाख रुपये कम है.
क्यों नहीं चल रहे सोने-चांदी के भाव?
होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण तेल की कीमतों में रिस्क तेजी से बढ़ा है. WTI कच्चे तेल की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर से बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर पर पहुंच गई है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई का खतरा पैदा हो गया है. इसके अलावा, ग्लोबल निवेशक सुरक्षित मुद्रा 'डॉलर' की ओर रुख कर रहे हैं, जो हाल के हफ्तों में मजबूत हुआ है.
मजबूत डॉलर और बढ़ती महंगाई, जियो-पॉलिटिकल तनाव के बावजूद सोने की कीमतों में तेजी को रोक रहे हैं. उच्च ब्याज दरें और मजबूत डॉलर सोने की कीमतों के विपरीत प्रभाव डालते हैं, इसलिए सोने की गति धीमी हो गई है और इसमें स्थिरता आ रही है. इसी तरह, चांदी में भी तेजी नहीं आने का यही कारण है. साथ ही जैसे-जैसे डॉलर मजबूती दिखा रहा है, वैसे ही सोने-चांदी के भाव में गिरावट आ रही है.
अब आगे क्या होगा?
एक्पर्ट्स का कहना है कि सकारात्मक नजरिया यह है कि सोने का भाव यहां से साल 2026 में 15 से 20 फीसदी तक बढ़ सकता है. वहीं अगर अमेरिका इकोनॉमी में मंदी के संकेत दिखते हैं तो इसमें अच्छी तेजी आ सकती है, लेकिन अगर अमेरिकी इकोनॉमी मजबूत होती है तो सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट आ सकती है.
(नोट- सोना-चांदी या किसी अन्य असेट में निवेश से पहले योग्य वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.)