भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को 2026 में घरेलू बाजार के लिए एक प्रमुख कारण में देखा जा रहा है, लेकिन बार-बार हो रही देरी ने निवेशकों और शेयर एक्सपर्ट्स को चिंता में डाल दिया है. पिछले एक महीने में NSE निफ्टी और बीएसई सेंसेक्स ने करीब स्थिर रिटर्न दिया है.
श्री रामा मैनेजर्स के को-फाउंडर्स और फंड मैनेजर अभिषेक बसुमल्लिक ने कहा कि भू-राजनीतिक घटनाक्रमों, विशेष रूप से अमेरिकी टैरिफ पर स्पष्टता आने तक बाजार कुछ प्रतिशत अंकों के उतार-चढ़ाव के साथ सीमित दायरे में रहने की संभावना है.
बसुमल्लिक ने बिज़नेस टुडे को बताया कि भारत पर और टैरिफ लगाने वाले डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान से शेयर बाजार और डर गया है. मंगलवार को सेंसेक्स 0.5 प्रतिशत गिरकर 85,007.51 रुपये पर आ गया. निफ्टी 0.34 प्रतिशत गिरकर 26,162.20 रुपये पर आ गया. पिछले एक साल का आंकड़ा देखें तो निफ्टी ने 8.85 फीसदी का रिटर्न दिया है, जबकि सेंसेक्स ने 7.25 फीसदी की तेजी दिखाई है.
ट्रंप ने क्या दिया था बयान?
ट्रंप ने रूस द्वारा तेल की निरंतर खरीद के लिए भारत पर टैरिफ बढ़ाने की संभावना का संकेत दिया है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी बहुत अच्छे व्यक्ति हैं. वे नेक इंसान हैं. उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं हूं. मुझे खुश करना उनके लिए महत्वपूर्ण था. वे व्यापार करते हैं और हम उन पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकते हैं.
बाजार को किसका है इंतजार?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि भारत के आगे प्रदर्शन के लिए प्रमुख कारकों में से एक अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना है. उन्होंने बताया कि बाजार पिछले 2-3 महीनों से टैरिफ को मौजूदा 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत करने और उसके बाद पूर्ण समझौते को अंतिम रूप देने का बेसब्री से इंतजार कर रहा है.
नायर ने कहा कि ट्रंप की लगातार निगेटिव बयानबाजी से भारत के शेयर बाजार के प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है. पॉजिटिव नजरिया ये है कि भारतीय उत्पादों और सेवाओं की मजबूती के कारण अबतक निर्यात पर कोई खास निगेटिव प्रभाव नहीं दिख रहा है. फिर भी अगर यह स्थिति बनी रहती है तो इससे भारत के फ्यूचर एक्सपोर्ट नजरिए को नुकसान होगा, जिससे यह संकेत मिलता है कि ट्रंप प्रधासन भारत द्वारा उठाए गए कदमों से संतुष्ट नहीं है.
बर्नस्टीन ने हाल ही में कहा कि रेसिप्रोकल टैरिफ समेत पेनल्टी टैरिफ में किसी भी तरह की ढील से भारत को अच्छी स्थिति में आ सकता है, जैसा 2025 के मध्य में हुआ था और दक्षिण पूर्व देशों की तुलना में कोई इतना बढ़त हासिल नहीं कर पाएगा.
(नोट- यहां बताई गई जानकारियां ब्रोकरेज के अपने विचार हैं. aajtak.in इसकी जिम्मेदारी नहीं लेता है. किसी भी तरह के निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.)