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ट्रंप के ऐलान से 14 मिनट पहले हुआ था ये बड़ा खेल? झटके में छाप लिए अरबों रुपये

ईरान और अमेरिका के बीच जंग रोकने की खबर से ठीक पहले अमेरिकी बाजार में बड़ी ट्रेडिंग पोजिशन ली गई थी. यह ट्रंप के ऐलान के ठीक 14 मिनट पहले हुआ था.

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अमेरिका शेयर बाजार में बड़ा खेल. (Photo: File/ITG)
अमेरिका शेयर बाजार में बड़ा खेल. (Photo: File/ITG)

एक तरफ मिडिल-ईस्ट में जंग चल रही है, दूसरी ओर वैश्विक बाजार में ऐसा रहस्यमयी खेल हुआ कि निवेशकों के होश उड़ गए. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई टालने के ऐलान से कुछ मिनट पहले किसी ट्रेडर  ने ₹840 करोड़ का मुनाफा बना लिया. अचानक इतनी सटीक टाइमिंग पर हुए सौदों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इतना मोटा मुनाफा बिना इनसाइडर इनपुट के शेयर-कमोडिटी मार्केट अमूमन संभव नहीं होता है. 

सोमवार को शाम 4:20 बजे के करीब S&P 500 E-mini futures में बड़ी खरीदारी दर्ज की गई. साथ ही तेल बाजार में भी अप-डाउन दिखा. आमतौर पर प्री-मार्केट में ट्रेडिंग धीमी रहती है, लेकिन इस दौरान वॉल्यूम कई गुना बढ़ गया.  करीब 14 मिनट बाद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth पर पोस्ट कर बताया कि ईरान के पावर प्लांट्स और ऊर्जा ढांचे पर सभी सैन्य हमलों को फिलहाल पांच दिनों के लिए टाल दिया गया है. 

दो बड़े दांव, सटीक टाइमिंग- ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म Unusual Whales के मुताबिक, इन सौदों में दो बड़ी रणनीतियां अपनाई गईं. करीब 1.5 अरब डॉलर (₹12,600 करोड़) के S&P 500 फ्यूचर्स खरीदे गए, जिससे बाजार में तेजी से फायदा उठाया जा सके. वहीं, करीब 192 मिलियन डॉलर (₹1,615 करोड़) के तेल फ्यूचर्स बेचे गए, यह मानते हुए कि आपूर्ति संबंधी डर कम होते ही कीमतें गिरेंगी. सुबह 6:49 से 6:50 (यूएस टाइमिंग) यानी सिर्फ एक मिनट के भीतर ब्रेंट और WTI के करीब 6,200 कॉन्ट्रैक्ट्स में ट्रेड हुआ, जिसकी वैल्यू लगभग 580 मिलियन डॉलर (₹4,870 करोड़) थी,जो सामान्य से 4-6 गुना ज्यादा है. 

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संदेह क्यों बढ़ा?

  • इतनी बड़ी रकम का अचानक ट्रेड होना
  • ट्रंप के बयान से ठीक पहले की सटीक टाइमिंग
  • ट्रेडिंग का ट्रंप के ऐलान से पूरी तरह मेल खाना

ट्रंप के ऐलान के बाद बाजार की चाल बदली

  • S&P 500 फ्यूचर्स 2.5% से ज्यादा उछल गए
  • ब्रेंट क्रूड 109 डॉलर से गिरकर 92 डॉलर तक आ गया
  • WTI क्रूड करीब 6% गिरकर 88.70 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया

बिना किसी सार्वजनिक संकेत-सूचना के इतनी बड़ी और सटीक ट्रेडिंग होना बेहद असामान्य है. वहीं इसे 'खेला' भी साबित करना आसान नहीं है. कुछ महीने पहले भी ऐसी ही असामान्य ट्रेडिंग देखी गई थी, जब वेनेजुएला को लेकर बड़ा दांव लगाया गया था. इसमें भी इनसाइडर इनपुट की आशंका जताई गई थी. फिलहाल ये पूरा मामला रहस्य बना हुआ है कि इन सौदों के पीछे कौन था? लेकिन अब ऐसे रहस्यमयी ट्रेडिंग पर एजेंसियों की नजर रहेंगी. 

इधर, यूएस सिक्युरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन ने अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है. व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने भी इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोप बेबुनियाद बताया है. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबाफ ने भी सोशल मीडिया पर ट्रंप के दावों को फेक बताया और आरोप लगाया कि ये वित्तीय और तेल बाजारों को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है.

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व्‍हाइट हाउस ने क्‍या कहा? 
इस ट्रेड की आंच व्हाइट हाउस तक पहुंची है. व्हाइट हाउस की ओर से इन आरोपों को 'बेबुनियाद' और 'बिना सबूत' बताया. खासकर तब जब मामला संवेदनशील खुफिया या नीति से जुड़ा हो. बता दें कि इनसाइडर ट्रेडिंग को साबित करना वास्तव में कठिन होता है. यूएस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) को यह दिखाना पड़ता है कि संबंधित व्यक्ति के पास गोपनीय जानकारी थी, उसने उस जानकारी का जानबूझकर उपयोग किया और उससे वित्तीय लाभ कमाया.

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