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क्या अमेरिका में सर्वोच्च पद पर पहुंचेंगी भारतीय मूल की कमला हैरिस? भारतीयों का US में बढ़ेगा दबदबा

सर्वे के मुताबिक 42 फीसदी अमेरिकियों को अर्थव्यवस्था संभालने को लेकर हैरिस पर ज्यादा भरोसा है. वहीं ट्रंप पर 41 परसेंट अमेरिकियों ने अर्थव्यवस्था संभालने को लेकर भरोसा जताया है.

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Kamala Harris
Kamala Harris

अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए डोमेक्रेट पार्टी की उम्मीदवार बनने के बाद से भारतीय मूल की कमला हैरिस ने कई सर्वेज में रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप को पीछे छोड़ दिया है. अब एक ताजा सर्वे में दावा किया गया है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था संभालने के लिहाज से कमला हैरिस को अमेरिका के लोग ट्रंप के मुकाबले ज्यादा काबिल मान रहे हैं. 

सर्वे के मुताबिक 42 फीसदी अमेरिकियों को अर्थव्यवस्था संभालने को लेकर हैरिस पर ज्यादा भरोसा है. वहीं ट्रंप पर 41 परसेंट अमेरिकियों ने अर्थव्यवस्था संभालने को लेकर भरोसा जताया है. इसके पहले हुए सर्वे में जो बाइडेन के मुकाबले डेमोक्रेटिक पार्टी की नई उम्मीदवार कमला हैरिस पर 7 परसेंट ज्यादा लोगों ने अर्थव्यवस्था संभालने को लेकर भरोसा जताया है. अगर कमला हैरिस ये लीड आगे भी बरकरार रख पाती हैं तो भारतीय मूल का कोई व्यक्ति पहली बार दुनिया के सबसे ताकतवर देश के सबसे ऊंचे पद पर आसीन होगा.

अमेरिका के 'अमीर' भारतीय!
वैसे अमेरिका में भारतीय मूल के नागरिकों का हर क्षेत्र में दबदबा है. US में रहने वाले भारतीय बड़ी कंपनियों की कमान संभालने से लेकर स्टार्टअप में इनोवेशन तक में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं. ये लोग टैक्स के साथ ही खपत और निवेश के जरिए वहां की अर्थव्यवस्था में काफी योगदान कर रहे हैं. आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका की कुल आबादी में महज डेढ़ फीसदी भारतीय-अमेरिकी हैं जिनका वहां के कुल टैक्स रेवेन्यू में 6 फीसदी योगदान है. ये बड़ा योगदान टेक्नोलॉजी, फाइनेंस और हेल्थकेयर जैसे सेक्टर्स में ऊंची सैलरी वाली नौकरियों में उनकी मौजूदगी की वजह से है.

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अमेरिका में 51 लाख भारतीय मूल के लोग
अमेरिका में करीब 51 लाख भारतीय मूल के नागरिक हैं. इनमें से बड़ी जिम्मेदारियों को संभालने वाले भारतीयों में शामिल हैं गूगल के CEO सुंदर पिचाई, माइक्रोसॉफ्ट के CEO सत्य नडेला, एडोब के CEO  शांतनु नारायण, कॉग्निजेंट के CEO रवि कुमार, वर्ल्ड बैंक के प्रेसिडेंट अजयपाल सिंह बंगा, इनट्यूइट के CEO राजीव सुरी और  ज़स्केलर के CEO जय चौधरी. इनसे पहले लेखा नायर आईबीएम और इंदिरा नूयी पेप्सिको की CEO रह चुकी हैं.

भारत को मिला बड़ा फायदा!
ऐसा नहीं है कि भारतीय केवल अमेरिका में ही अपना परचम लहरा रहे हैं. आंकड़ों के मुताबिक भारत में 2023 तक बने 114 यूनिकॉर्न में से 28 के संस्थापक अमेरिका में पढ़े हैं इन कंपनियों की कुल वैल्यूएशन 59 अरब डॉलर है. भारत में आने वाले सभी डोनेशंस में से 35 फीसदी हिस्सा अमेरिका का है. कोविड के दौरान अमेरिका स्थित गैर-लाभकारी संगठन इंडियास्पोरा ने भारतीयों की मदद के लिए 15 मिलियन डॉलर जुटाए. भारत के लिए अमेरिका ग्लोबल रेमिटेंस का टॉप सोर्स है जिसमें 2022-23 में करीब 26 अरब डॉलर भेजे गए हैं. यानी अमेरिका में रहने वाले भारतीय वहां के साथ साथ भारत की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण रोल निभा रहे हैं.

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