अमेरिका और ईरान के बीच जंग (US-Iran War) थमती नजर नहीं आ रही है. महीनेभर चले भीषण संघर्ष के बाद बीते दिनों पाकिस्तान के इस्लामाबाद में दोनों के बीच शांति वार्ता हुई थी, लेकिन 21 घंटे की बातचीत बेनतीजा निकली और टेंशन फिर चरम पर पहुंच गई है. होर्मुज (Hormuz Strait) को लेकर सबसे ज्यादा तनातनी देखने को मिल रही है. दोबारा बढ़ी ग्लोबल टेंशन के बीच कच्चे तेल की कीमतों में भी फिर से उबाल (Crude Oil Price Surge) आने लगा है और इसे देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने अपनी रिपोर्ट में चीन, भारत समेत एशियाई देशों को झटका दिया है.
UN ने ईरान युद्ध की वजह से चीन (China) और भारत (India) के लिए अपना आर्थिक विकास का अनुमान कम दिया है. यही नहीं एशिया के अन्य देशों के इकोनॉमिक ग्रोथ के अनुमान को कम किया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की ग्रोथ 5 फीसदी से भी कम रह सकती है, जो ड्रैगन के लिए एक बड़ा झटका है.
UN ने बढ़ा दी China की टेंशन
यूएन इकोनॉमिक एंड सोशल कमीशन फॉर एशिया एंड द पैसिफिक के एक सीनियर इकोनॉमिस्ट के मुताबिक चीन की इकोनॉमी इस साल कम रफ्तार से भागेगी. बीते साल 2025 में China Economic Growth 5% रही थी, लेकिन इस साल इसके 4.6% से 4.3% के बीच बढ़ने की संभावना जताई गई है. इसके पीछे की बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के साथ ही मिडिल ईस्ट जंग के चलते लगातार बढ़ी कच्चे तेल की कीमतों को बताया गया है. बता दें कि पहले वेनेजुएला पर ट्रंप का कंट्रोल, फिर ईरान युद्ध के चलते होर्मुज में रुकावट से तेल गैस सप्लाई बाधित होने का सबसे बुरा असर चीन पर दिखा है, क्योंकि ये सबसे बड़ा खरीदार जो है.
ड्रैगन के लिए ये इसलिए भी बड़ा झटका माना जा सकता है, क्योंकि चीन ने पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर 5 फीसदी की ग्रोथ दर्ज करके लचीलापन दिखाया है. चीनी वित्त मंत्री लैन फोआन ने भी पिछले सप्ताह इस बात पर जोर दिया था कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वैश्विक विकास का इंजन बनी रहेगी.
भारत के अनुमान में बड़ी कटौती
न सिर्फ चीन, बल्कि संयुक्त राष्ट्र ने भारत के लिए ग्रोथ अनुमान को भी घटाया गया है. इकोनॉमिस्ट हमजा मलिक के हवाले से इसमें कहा गया है कि भारत की इकोनॉमी (Indian Economy) पिछले साल 7% से ज्यादाकी रफ्तार से बढ़ी थी. वहीं इस साल मिडिल ईस्ट युद्ध (Middle East War) के चलते बढ़ी कच्चे तेल की कीमतें, गैसोलीन और फर्टिलाइजर के बढ़ते दाम का बुरा असर अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर पड़ सकता है. यूएन ने इन तमाम कारणों के चलते इस साल भारत की ग्रोथ रेट पिछले साल के मुकाबले करीब 1% घटकर 6% के आस-पास रहने की उम्मीद जाहिर की है.
दुनिया पर दिखेगा
हमजा मलिक ने सोमवार को न्यूयॉर्क में UN हेडक्वार्टर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए कहा है कि, 'एशिया-पैसिफिक ग्लोबल आर्थिक विकास (Global Economic Growth) का इंजन बना हुआ है. इसलिए एशिया-पैसिफिक में जो कुछ भी होता है, सिर्फ कुछ देशों के लिए नहीं, बल्कि वह बाकी दुनिया के लिए भी बड़ा मायने रखता है.
बीते दिनों एशियाई विकास बैंक (ADB) ने भी विकासशील एशिया और प्रशांत क्षेत्र में इस वर्ष आर्थिक विकास की गति धीमी होने का अनुमान जताया था. एडीबी की रिपोर्ट में कहा गया था कि यह क्षेत्र 2026 में 5.1 फीसदी की ग्रोथ रेट हासिल करेगा, जो पिछले वर्ष के 5.4 फीसदी से कम है. इसके लिए कारण ये बताया गया था कि तमाम अर्थव्यवस्थाएं मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और लगातार बढ़ रही व्यापार अनिश्चितता से प्रभावित हैं.