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छंटनी पर छंटनी, रुपया औंधे मुंह, मार्केट नीचे... सोना-चांदी ऊपर, आर्थिक युद्ध से कम नहीं होगा ट्रंप का 500% टैरिफ!

Trump Tariff Impact: अगर भारत पर अमेरिका 500 फीसदी टैरिफ थोपता है तो दोनों देशों के बीच रिश्ते और बिगड़ सकते हैं. क्योंकि 100 रुपये के सामान पर 500% टैरिफ (100 रुपये कीमत + 500 रुपये टैक्स) यानी प्रोडक्ट की कीमत अमेरिका ट्रेडर तक पहुंचते-पहुंचते 600 रुपये हो जाएगी.

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500 फीसदी टैरिफ का इंडियन इकोनॉमी पर कितना असर. (Photo: ITG)
500 फीसदी टैरिफ का इंडियन इकोनॉमी पर कितना असर. (Photo: ITG)

अगर अमेरिका (America) भारत पर 500 फीसदी टैरिफ लगाता है तो सबसे पहले दोनों देशों के बीच रिश्ते बिगड़ सकते हैं. एक तरह से 500 फीसदी टैरिफ आर्थिक युद्ध का रूप ले सकता है. क्योंकि आमतौर पर ये व्यवहारिक नहीं है. लेकिन अगर ट्रंप प्रशासन जबरन ये फैसला लेता है तो भारत-अमेरिका के व्यापार को सबसे बड़ा झटका लगेगा.

भारत के निर्यात पर सीधा झटका
इतना भारी टैरिफ किसी देश के प्रोडक्ट को बाजार से बाहर करने के बराबर होता है. भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था पर इसका असर तुरंत और गहरा दिखाई देगा. फिलहाल भारत और अमेरिका सबसे बड़ा कारोबारी पार्टनर है. वित्त वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के मुताबिक भारत ने अमेरिका को करीब $86.51 बिलियन के प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट किए, जो कि सालाना आधार पर करीब 11.6% बढ़ा है. जबकि FY25 के दौरान अमेरिका से भारत को एक्सपोर्ट लगभग $45.33 बिलियन का रहा. 

भारत हर साल अरबों डॉलर का सामान अमेरिका को भेजता है, जिसमें आईटी सर्विस, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, ऑटो पार्ट्स, स्टील और केमिकल खासतौर पर हैं. अगर इन उत्पादों पर 500% टैरिफ लगाया जाता है, तो अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान की कीमतें कई गुना बढ़ जाएंगी.

एक उदाहरण से समझते हैं कि 500% टैरिफ का क्या मतलब है?
अगर किसी प्रोडक्ट की कीमत फिलहाल 100 रुपये है, उसे मौजूदा समय में 50% टैरिफ के साथ अमेरिका एक्सपोर्ट किया जाता है, वो उसकी कीमत बढ़कर 150 रुपये हो जाएगी. फिलहाल 50 फीसदी टैरिफ लगने से ही अमेरिकी ट्रेडर भारतीय सामान खरीदने से बच रहे हैं, क्योंकि अचानक 50 रुपये महंगे हो गए हैं. 

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अब अगर अमेरिका 500 फीसदी टैरिफ थोपता है तो फिर स्थिति बेहद खराब हो जाएगी. क्योंकि 100 रुपये के सामान पर 500% टैरिफ (100 रुपये कीमत + 500 रुपये टैक्स) यानी प्रोडक्ट की कीमत अमेरिकी ट्रेडर तक पहुंचते-पहुंचते 600 रुपये तक हो जाएगी. फिर कोई ट्रेडर 6 गुना महंगा सामान क्यों खरीदेगा?

इतनी भारी ड्यूटी के बाद अमेरिकी ट्रेडर के लिए भारतीय प्रोडक्ट्स खरीदना फायदेमंद नहीं रहेगा. इसलिए पूरी तरह से खरीदारी बंद सकते हैं. सप्लाई चेन टूट सकती है. ऑर्डर रद्द होंगे या दूसरे देशों में शिफ्ट किए जाएंगे. जिससे भारत का निर्यात अचानक गिर सकता है. यह भारत के चालू खाते (Current Account) और विदेशी मुद्रा आय दोनों पर निगेटिव असर डाल सकता है. 

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और MSME पर संकट
निर्यात घटने का सबसे बड़ा असर मैन्युफैक्चरिंग और MSME सेक्टर पर पड़ेगा. क्योंकि भारत में बड़े पैमाने पर छोटे और मध्यम उद्योग अमेरिकी बाजार पर निर्भर हैं. अमेरिका से मांग घटने पर फैक्ट्रियों को प्रोडक्शन घटाना पड़ेगा. जब प्रोडक्शन कम होगा तो फिर कच्चे माल की खरीदारी भी कम होगी,  क्योंकि कई यूनिट्स अस्थाई रूप से बंद हो सकती हैं. इन सबका गहरा असर रोजगार पर पड़ेगा, बड़े पैमाने पर कंपनियां छंटनी करेंगी. रोजगार के नए अवसर बंद होंगे. मुख्यतौर पर 500 फीसदी टैरिफ का असर टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स-ज्वेलरी जैसे सेक्टर पर पड़ेगा. 
 
शेयर बाजार में बिगड़ सकता है मू़ड
500% टैरिफ का सबसे पहला असर शेयर बाजार पर देखने को मिल सकता है. बाजार पर दबाव गहरा सकता है, उन कंपनियों से शेयरों में गिरावट आ सकती हैं, जिनका सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट अमेरिका को है. आईटी और फार्मा स्टॉक्स तक लपेटे में आ सकते हैं. विदेशी निवेशक (FII) जोखिम से बचने के लिए पैसा निकाल सकते हैं. क्योंकि आर्थिक रिश्ते भारत और अमेरिका के बीच बिगड़ सकते हैं. 

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रुपये पर बढ़ जाएगा दबाव?
अमेरिका से एक्सपोर्ट प्रभावित होने से रुपया कमजोर हो सकता है, क्योंकि निर्यात घटने से भारत में डॉलर की कम होगी, जबकि वैश्विक अनिश्चितता में डॉलर की मांग बढ़ जाती है. कच्चा तेल, मशीनरी और टेक्नोलॉजी का आयात महंगा हो जाएगा. इससे भी देश में महंगाई बढ़ सकती है. 

सोने-चांदी में तेज उछाल संभव
जब भी वैश्विक तौर पर राजनीति या आर्थिक संकट गहराता है तो लोग सोने-चांदी के पीछे भागते हैं. ऐसे में 500 फीसदी टैरिफ के बाद सोना और चांदी की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी आ सकती हैं. भारत में भी गोल्ड और सिल्वर महंगे हो सकते हैं. निवेशकों का रुझान इक्विटी से हटकर कीमती धातुओं की ओर बढ़ सकता है.

गौरतलब है कि अमेरिका में एक प्रस्तावित बिल Sanctioning Russia Act 2025 में यह प्रावधान है कि जो भी देश रूस से तेल, गैस, उरैनियम या ऊर्जा उत्पाद खरीदते रहेंगे, उन पर अमेरिका 500% तक टैरिफ लगा सकता है. इसका मकसद रूस की अर्थव्यवस्था को कमजोर करना और उसे यूक्रेन युद्ध पर बातचीत के लिए मजबूर करना बताया जा रहा है. 500% टैरिफ धमकी का लक्ष्य भारत, चीन और ब्राजील जैसे देश हैं, जो अभी भी रूस से एनर्जी इंपोर्ट कर रहे हैं.

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