रूसी सरकार ने बड़ा ऐलान किया है. वह अब घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने के लिए 1 अप्रैल से गैसोलीन के निर्यात प्रतिबंध लगाएगी. रूस का ये फैसला मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान वॉर के कारण ग्लोबल एनर्जी मार्केट में जारी उथल-पुथल के बीच आया है. यह फैसला कुछ देशों के लिए एनर्जी मार्केट में और संकट पैदा कर सकता है, जो रूस से डायरेक्ट गैसोलीन का आयात करते हैं. इसमें चीन, तुर्की, ब्राजील, अफ्रीका और सिंगापुर जैसे देश शामिल हैं.
रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा कि संकट के कारण ग्लोबल तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव आ रहा है, लेकिन विदेशों में रूसी ऊर्जा की मांग मजबूत बनी हुई है. यह घोषणा नोवाक की अध्यक्षता में घरेलू पेट्रोलियम उत्पाद बाजार की समीक्षा के लिए आयोजित बैठक के बाद की गई.
बैठक के दौरान, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के घरेलू ईंधन की कीमतों को अधिक बढ़ने से रोकने पर जोर दिया गया. ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि तेल रिफाइन कीमतें मार्च 2025 के स्तर के अनुरूप बनी हुई हैं, जिससे घरेलू आपूर्ति स्थिर बनी रहेगी.
रूस ने क्यों लिया ये फैसला?
रूस का कहना है कि उसने यह फैसला घरेलू मांग को पूरा करने के लिए लिया है, ताकि गैस ओर डीजल का पर्याप्त भंडार बना रहे और घरेलू स्तर पर इंडस्ट्री की मांग में भी कमी ना हो. सरकार के बयान में कहा गया है कि रूसी राष्ट्रपति द्वारा तय घरेलू ईंधन की कीमतों को पूर्वानुमान से अधिक बढ़ने से रोकने के लक्ष्य पर खास जोर दिया गया है.
नोवाक ने ऊर्जा मंत्रालय को 1 अप्रैल से गैसोलीन के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया ताकि कीमतों को स्थिर किया जा सके और स्थानीय बाजार में प्राथमिकता के आधार पर आपूर्ति पूरी हो सके.
रूस कितना करता है गैसोलीन का निर्याता?
रूस हरदिन लगभग 120,000-170,000 बैरल गैसोलीन का निर्यात करता रहा है. यह घोषणा चीन, तुर्की, ब्राजील, अफ्रीका और सिंगापुर जैसे देशों के लिए एक बड़ा झटका है, जो रूसी तेल उत्पादों के प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं.
इस बीच, भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आश्वासन दिया कि मिडिल ईस्ट संघर्ष के कारण रुकावट के बावजूद देश में कच्चे तेल, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार मौजूद है. संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि रिफाइनरियां पूरी क्षमता से या उससे भी अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं और घरेलू एलपीजी उत्पादन में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.
शर्मा ने बताया कि कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति प्रभावित हुई है और इंटरनेशनल कीमतें बढ़ गई है. हालांकि, सरकार ने स्थिति को संभालने और घरेलू आपूर्ति में स्थिरता तय करने के लिए कई उपाय किए हैं. उन्होंने कहा कि आज की तारीख में हमारे पास पर्याप्त कच्चे तेल का भंडार है और अगले दो महीनों के लिए आपूर्ति पहले ही तय कर ली गई है.