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Task Force For Tariff Refund: पहले ट्रंप टैरिफ को दी मात, अब नील कत्याल बोले- 'रिफंड के लिए जी-जान से लड़ेंगे'

US Tariff Refund: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट (US Supreme Court) में अपनी जोरदार दलीलों की दम पर डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ (Donald Trump Tariff) को चारों खाने चित करने वाले भारतीय-अमेरिकी वकील नील कत्याल (Neel Katyan) ने ट्रंप की टेंशन और बढ़ाने के लिए कमर कस ली है.

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टैरिफ रद्द होने के बाद अमेरिका में भी उठा रिफंड की मांग. (File Photo: ITG/AP)
टैरिफ रद्द होने के बाद अमेरिका में भी उठा रिफंड की मांग. (File Photo: ITG/AP)

अदालत ने जहां अप्रैल 2025 में लगाए लगे तमाम रेसिप्रोकल टैरिफ को गैरकानूनी बताते हुए रद्द किया, तो अब कत्याल ने राष्ट्रपति ट्रंप के शासनकाल में लगे टैरिफ से प्रभावित बिजनेस और आयातकों के लिए टैरिफ रिफंड (Tariff Refund) यानी धनवापसी दिलाने के लिए एक टास्क फोर्स के गठन के लिए कमर कस ली है और उनकी ये तैयारी Trump Tension को और बढ़ाने वाली साबित हो सकती है. 

टैरिफ पर हार, फिर ट्रंप ने उठाए ये कदम
Neel Katyal जिन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ व्यवस्था के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सफलतापूर्वक तर्क दिया था और अदालत ने Tariff को गैरकानूनी करार दे दिया. कोर्ट में मिली हार के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने धारा 122 का इस्तेमाल किया और झटके में दुनिया के तमाम देशों पर 10% Global Tariff लगा दिया और महज 24 घंटे के भीतर ही इसे बढ़ाकर 15% भी कर दिया. अमेरिका के इस कदम पर भी वकील नील कत्याल ने सवाल खड़े किए और कहा कि इस तरह के व्यापक उपायों को लागू करने के लिए कांग्रेस से मंजूरी को दरकिनार नहीं किया जा सकता है. बता दें कि ये 15 फीसदी टैरिफ नियम के मुताबिक, सिर्फ 150 दिन तक लागू रह सकते हैं और इसे आगे बढ़ाने के लिए ट्रंप को कांग्रेस (US Congress) की मंजूरी लेनी होगी. 

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टैरिफ रिफंड दिलाने के लिए टास्क फोर्स 
बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, US Tariff के खिलाफ जीत दर्ज करने वाले भारतीय-अमेरिकी वकील नील कत्याल ने 23 फरवरी को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के रद्द किए जा चुके टैरिफ से प्रभावित व्यवसायों और आयातकों के लिए धनवापसी कराने की तैयारी की है. उन्होंने एक लीगल टास्क फोर्स बनाने की घोषणा की, जो ट्रंप प्रशासन की व्यापारिक शक्तियों को सीमित करने वाले SC के ऐतिहासिक फैसले के बाद मुकदमेबाजी के एक नए चरण का संकेत है. इसे ट्रंप के लिए नई टेंशन कहना भी शायद गलत न होगा. 

'सरकार के खिलाफ जी-जान से लड़ेंगे'
कत्याल का ये कदम अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा 6-3 के बहुमत से ट्रंप के पहले के अधिकांश टैरिफ को रद्द किए जाने के फैसले के कुछ दिनों बाद उठाया गया है. उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू के दौरान कहा, 'हमने विशेष रूप से धन वापसी की मांग नहीं की है, क्योंकि हमारी लीगल टीम इसे स्वाभाविक मानती थी और अगर हम मुकदमा जीत जाते हैं, तो हमें पूरा भरोसा है कि धन वापसी हो जाएगी. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हम Tariff Refund के लिए एक टास्क फोर्स का गठन कर रहे हैं. अगर संघीय सरकार उस पैसे को रोकने की कोशिश करती है, तो हम उसके लिए जी जान से लड़ेंगे.

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US में भी Tariff Refund की मांग
एक ओर जहां नील कत्याल टैरिफ रिफंड दिलाने की तैयारी कर ट्रंप की टेंशन बढ़ाने के लिए कदम आगे बढ़ा रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर अमेरिका के प्रमुख बिजनेस ग्रुप भी वाशिंगटन पर दबाव डाल रहे हैं कि वह रद्द किए गए टैरिफ के तहत पहले से एकत्र राशि को जल्द वापस करे. Walmart समेत रिटेल सेक्टर की छोटी बड़ी कंपनियों वाले नेशनल रिटेल फेडरेशन ने अमेरिकी आयातकों को टैरिफ की वापसी के लिए एक सरल प्रक्रिया की डिमांड की है. 

इसके अलावा यूएस चेंबर् ऑफ कॉमर्स (US Chanber Of Commerce) की ओर से भी रिफंट के मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है. चेंबर ने ये अनुमान लगाया है कि इस फैसले के दायरे में आने वाले लगभग 133 अरब डॉलर के टैरिफ की प्रतिपूर्ति की जानी चाहिए. इसके चीफ पॉलिसी ऑफिसर नील ब्रैडली ने कहा कि रिफंट से 2,00,000 से अधिक छोटे आयातकों को बड़ी राहत मिलेगी और इस साल इकोनॉमिक ग्रोथ को भी बढ़ावा मिलेगा. 

नील कत्याल कौन हैं?
Neel Katyal वो भारतीय-अमेरिकी वकील हैं, जिनकी अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में दलीलों ने ट्रंप टैरिफ को चारों खाने चित कर दिया था. उन्होंने कोर्ट में कहा था कि अमेरिकी संसद Congress के पास व्यापार को विनियमित करने की शक्ति है, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप इस शक्ति को मनमाने ढंग से इस्तेमाल नहीं कर सकते. इनका जन्म शिकागो में हुआ था और वो भारतीय अप्रवासी परिजन के बेटे हैं. कात्याल ने डार्टमाउथ कॉलेज और येल लॉ स्कूल से ग्रेजुएट हैं.

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