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इकोनॉमी के लिए गुड न्यूज, रेटिंग को लेकर अब बदला Moody's का मूड!

ग्लोबल रेटिंग एजेंसी Moody's ने इंडिया की सॉवरेन रेटिंग को लेकर अपने आउटलुक में बदलाव किया है. इसकी वजह अर्थव्यवस्था में संतुलन लाने वाले कई संकेतों का बेहतर होना है. पढ़ें पूरी खबर...

Moody's ने बदला रेटिंग आउटलुक (File Photo) Moody's ने बदला रेटिंग आउटलुक (File Photo)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • आने वाले सालों में सरकार का घाटा कम होने के आसार
  • बैंकों, एनबीएफसी की हालत पहले से बेहतर
  • सरकार को मिल सकेगा घरेलू बाजार से ही कर्ज

ग्लोबल रेटिंग एजेंसी Moody's Investors Service (Moody's) ने भारत की रेटिंग को लेकर अपने आउटलुक में बदलाव किया है. Moody's के रुख में ये बदलाव कोरोना से उबर रही इंडियन इकोनॉमी के लिए एक अच्छा संकेत है.

‘नेगेटिव’ से ‘स्टेबल’ हुआ आउटलुक

Moody's ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में कहा है कि उसने भारत की सॉवरेन रेटिंग को लेकर अपने आउटलुक को ‘नेगेटिव’ से ‘स्टेबल’ किया है. इसकी एक बड़ी वजह देश की रीयल इकोनॉमी और फाइनेंशियल सिस्टम के बीच का अंतर लगातार कम होना है. इससे इकोनॉमी का संतुलन बेहतर हुआ है और इससे जुड़े ‘जोखिम’ भी कम हुए हैं.’

Moody's ने अपने बयान में कहा, ‘बाजार में पूंजी की उपलब्धता और नकदी की हालत अच्छी है. इसके चलते मूडीज के पहले लगाए गए अनुमान के मुकाबले अब बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को लेकर कम जोखिम में हैं.’ इसलिए उसने अपने आउटलुक में ये बदलाव किया है.

मूडीज की `Baa3’ रेटिंग

Moody's ने अपने आउटलुक में बदलाव के साथ देश की प्रमुख क्रेडिट स्ट्रेंथ रेटिंग्स को Baa3 लेवल पर रखा है. ये रेटिेंग्स भारत के एक बड़ी और विविधीकृत इकोनॉमी होने की पहचान कराती हैं, जिसमें ऊंचे विकास की क्षमता और सरकार के कर्ज के लिए एक स्थिर स्थानीय वित्तपोषण की व्यवस्था है.

आने वाले सालों में घाटे से उबरेगी सरकार

हालांकि Moody's ने अभी अर्थव्यवस्था में कुछ जोखिम बचे रहने की बात कही है, जैसे कि कर्ज का बोझ अभी भी अधिक है. वहीं देश के आर्थिक हालत आने वाले कुछ सालों में सरकार को सामान्य राजकोषीय घाटे से उबरने का मौका देंगे और उसके घाटे में कमी लाएंगे.

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