ईरान संकट (Iran Crisis) के दौर से गुजर रहा है, देश में हंगामा और अशांति चरम पर पहुंच गई है. लगातार बढ़ रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच देश एक बार फिर राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता के दौर में जाता नजर आ रहा है. ईरान में फैली आग भारत के लिए भी कोई दूर का संकट नहीं है, क्योंकि Iran भारत के कुछ सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय संपर्क मार्गों के केंद्र में स्थित है. ऐसे में यहां पर किसी भी तरह के अस्थिरता सीधे भारत के रणनीतिक और व्यापारिक हितों से जुड़ी है. अगर ईरान में अशांति बढ़ी, तो फिर ये भारत के लिए भी परेशानी का सबब बन सकती है.
Iran में लगातार बिगड़ रहे हैं हालात
सबसे पहले बात करते हैं ईरान के बिगड़े हालात के बारे में, तो Iran में बीते साल दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए आर्थिक संकट के खिलाफ प्रदर्शन अब बड़ा रूप ले चुके हैं. देश में शुरुआती विरोध महंगाई, बेरोजगारी और डॉलर के मुकाबले लगातार गिरती ईरानी मुद्रा को लेकर था, लेकिन अब ये शासन को चुनौती दे रहा है. इसे लेकर मचे हंगामे में अब तक करीब 78 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया के मुताबिक, ये आंकड़ा ज्यादा भी हो सकता है. हालात यहां तक खराब हो चुके हैं कि ईरानी सरकार ने देश में बीते 7 जनवरी से ही इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर रखी हैं.
ईरान संकट का भारत पर सीधा असर
भारत ने मध्य एशिया, रूस (Russia) और यूरोप (Europe) तक अपनी पहुंच को मजबूत करने के उद्देश्य से तमाम परियोजनाओं में भारी निवेश किया है, जिसमें ईरान एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट हब के रूप में काम करता है. इनमें सबसे महत्वपूर्ण ईरान के साउथ-ईस्ट तट पर स्थित चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) सबसे अहम है, जो पाकिस्तान को बायपास करते हुए भारत को अफगानिस्तान और मिडिल ईस्ट तक सीधा रास्ता मुहैया कराता है, जिससे भारत के निर्यात और आयात दोनों की लागत और इसमें लगने वाले समय में कमी आती है.
चाबहार पोर्ट भारत के लिए अहम क्यों?
ईरान में चाबहार पोर्ट की अहमियत इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि ये इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर यानी INSTC का भी अहम हिस्सा है. इस रूट के जरिए भारतीय सामान रूस और यूरोप पहुंचता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे निर्यात और आयात का समय करीब 40 फीसदी के आसपास कम होता है, जबकि लागत में भी करीब 30% की कमी आती है. मतलब ये भारत के लिए एक सस्ता व्यापार मार्ग साबित होता है. ईरान में फैली आग अगर इसे प्रभावित करती है, तो भारत को सीधा नुकसान हो सकता है. साफ शब्दों में कहें, तो ईरान का चाबहार पोर्ट भारत की भू-आर्थिक ताकत (India's Geo Economic Power) को बढ़ाने वाला जरिया है.
ईरान-भारत के बीच कितना व्यापार?
वाणिज्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें, तो FY2024-25 (अप्रैल 2024-मार्च 2025) में भारत-ईरान द्विपक्षीय व्यापार लगभग 1.68 अरब डॉलर तक पहुंच गया था. इसमें भारत ने 1.24 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया था, जबकि 0.44 अरब डॉलर का आयात किया गया था. इसके चलते नई दिल्ली को 0.80 अरब डॉलर का ट्रेड सरप्लस प्राप्त हुआ. अब अगर संकट बढ़ता है, तो फिर चाबहार बंदरगाह पर परिचालन धीमा हो सकता है और INSTC से माल ढुलाई बाधित होने की संभावना है.
India-Iran में किन चीजों का आयात-निर्यात?
हालिया सालों में भारत ईरान के पांच सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक रहा है. ईरान को भारत से पहुंचाए जाने वाले (India Export To Iran) प्रमुख सामानों में चावल, चाय, चीनी, दवाइयां, कृत्रिम फाइबर, विद्युत मशीनरी और आर्टिफिशियल ज्वेलरी शामिल हैं. इसके अलावा ईरान से भारत आने वाले (India Import From Iran) की बात करें, तो इनमें सूखे मेवे, अकार्बनिक/कार्बनिक रसायन के साथ ही कांच के बर्तन सबसे ज्यादा मात्रा में आयात किए जाते हैं.
ईरान संकट का ये साइड इफेक्ट भी
ईरान में मची उथल-पुथल का सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि इससे और भी अधिक प्रभाव भारत पर देखने को मिल सकता है. दरअसल, ईरान दुनिया के सबसे बड़े ऑयल एंड गैस उत्पादकों में शामिल है. यानी यहां का संकट कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर प्रभाव डाल सकता है. भारत के संबंध में देखें, तो Iran Crisis कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा करने वाला साबित हो सकता है.
खासतौर पर तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका इसलिए भी रहती है, क्यों ईरान संकट का असर अगर होर्मुज स्ट्रेट पर पड़ेगा, तो फिर ऑयल प्राइस में इजाफा दिख सकता है. इसका बड़ा कारण ये है कि वैश्विक तेल खपत का 20 फीसदी होर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से ही गुजरता है. यानी इसमें रुकावट तेल के वैश्विक बाजार को बाधित करेगा.
अगर ऐसा होता है, तो भारत के लिए परेशानी बढ़ेगी, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है और कीमतों में इजाफे से देश का ऑयल इंपोर्ट बिल बढ़ेगा, क्योंकि उसे महंगी कीमत पर तेल आयात करना होगा. भारत के लिए क्रूड ऑयल महंगा होगा, तो देश में ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर असर देखने को मिलेगा. इसके महंगा होने से माल-ढुलाई महंगी होगी और इससे देश में महंगाई का जोखिम बढ़ने का खतरा ज्यादा रहेगा.