मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग के बाद दुनियां में तेल का संकट आता हुआ दिख रहा है. इस बीच, अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट दी है, लेकिन भारत को इसके लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है. एक रिपोर्ट का दावा है कि भारत उच्ची कीमतों पर ये तेल खरीदेगा.
रिपोर्ट के अनुसार, व्यापारी रूसी यूराल तेल को ब्रेंट क्रूड ऑयल की तुलना में 4-5 डॉलर प्रति बैरल के प्रीमियम पर भारत को बेच रहे हैं. यह तेल मार्च और अप्रैल की शुरुआत में भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचेगा. यह फरवरी में दी गई छूट से ज्यादा है. फरवरी में बेचे गए माल पर 13 डॉलर प्रति बैरल की छूट दी गई थी.
रॉयटर्स ने कहा कि भारती की कंपनी HPCL ने युद्ध शुरू होने से पहले 28 फरवरी को रूसी तेल के दो कार्गो को 13 डॉलर की छूट पर खरीदे थे.
भारत कितना तेल खरीदने जा रहा है?
मिडिल ईस्ट में संघर्ष के कारण आपूर्ति में आई कमी के बीच भारतीय रिफाइनरियां रूस से तत्काल आपूर्ति के लिए लाखों बैरल कच्चे तेल की खरीददारी कर रही हैं. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी रिफाइनरियां इंडियन ऑयल कॉर्प, भारत पेट्रोलियम कॉर्प, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्प और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड रूसी तेल की तत्काल डिलीवरी के लिए व्यापारियों से बातचीत कर रही हैं. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारतीय सरकारी रिफाइनरियां अब तक व्यापारियों से लगभग 2 करोड़ बैरल रूसी तेल खरीद चुकी हैं.
भारत को रूसी तेल की बिक्री में शामिल व्यापारियों में से एक ने कहा कि भारतीय रिफाइनर बाजार में वापस आ गए हैं, लेकिन कीमतों से ज्यादा अहम मुद्दा उपलब्धता का है. वहीं, रूसी दूतावास के एक अधिकारी ने कहा कि ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट की स्थिति में रूस भारत की ऊर्जा मांगों को पूरा करने के लिए तैयार है.
30 दिन का अस्थायी समाधान
अमेरिकी वित्त विभाग ने गुरुवार को भारत को 30 दिन की छूट दी, जिससे भारतीय रिफाइनरियां समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीद सकेंगी. यह कदम यूक्रेन संघर्ष के दौरान मॉस्को को फाइनेंस फ्लो को सीमित करने के लिए रूसी तेल आयात को सीमित करने के लिए वाशिंगटन द्वारा नई दिल्ली से महीनों से किए जा रहे रिक्वेस्ट के बाद उठाया गया है.
वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वैश्विक बाजार में तेल का प्रवाह जारी रखने के लिए, वित्त विभाग भारतीय रिफाइनरों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट जारी कर रहा है. यह छूट केवल समुद्र में मौजूद तेल पर लागू होती है और अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह उपाय सख्ती से सीमित समय के लिए है.
उन्होंने एक बयान में कहा कि जानबूझकर उठाया गया यह कम समय के लिए कदम रूसी सरकार को कोई महत्वपूर्ण वित्तीय लाभ नहीं देगा क्योंकि यह केवल समुद्र में फंसे तेल से संबंधित लेनदेन को ही पूरा करता है. रॉयटर्स के अनुसार, ईरान संघर्ष के कारण भारत ने रूसी कच्चे तेल के आयात की अनुमति लेने के लिए ट्रंप प्रशासन से संपर्क किया था.
भारत के पास कितना रिजर्व
भारत के पास लगभग 25 दिनों की मांग को पूरा करने के लिए कच्चे तेल का भंडार है, और इसके तेल आयात का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा मध्य पूर्व से होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से आता है. मॉस्को द्वारा 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद भारत रूसी समुद्री मार्ग से आने वाले कच्चे तेल का प्रमुख खरीदार था, लेकिन अमेरिकी दबाव के चलते जनवरी में उसने खरीदारी कम कर दी. इसके परिणामस्वरूप अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत हो गए.