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अमेरिका नहीं... चीन ने भारत से जमकर खरीदी ये चीज, सरकार के Plan-B ने किया कमाल

India Seafood Export At High: भारत का सी-फूड निर्यात तमाम चुनौतियों के बाद भी ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया. जहां अमेरिका ने झटका दिया, तो वहीं चीन ने जमकर भारतीय Seafood Products की खरीदारी की.

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चीन ने खूब खरीदे भारत के सी-फूड प्रोडक्ट्स. (Photo: File/Reuters)
चीन ने खूब खरीदे भारत के सी-फूड प्रोडक्ट्स. (Photo: File/Reuters)

भारतीय सी-फूड प्रोडक्ट्स (Indian Seafoods) की दुनिया में डिमांड है और इनका एक्सपोर्ट भी भारी मात्रा में किया जाता है. तमाम ग्लोबल टेंशन के बावजूद भारत के समुद्री खाद्य निर्यात (India's Seafood Export) ने अपना ऑल टाइम हाई लेवल छू लिया है. इससे जुड़े प्रोडक्ट्स में झींगा सबसे ज्यादा निर्यात किया गया.

यहां सबसे खास बात ये है कि अब तक भारत के लिए इस सेक्टर का सबसे बड़ा मार्केट रहे अमेरिका से झटका लगा है, क्योंकि वहां टैरिफ से जुड़ी समस्याओं के चलते आयात कर किया गया. लेकिन इसकी भरपाई चीन ने कर दी और वित्त वर्ष 2025-26 में China को किए गए सी-फूड एक्सपोर्ट में तगड़ा उछाल आया है. 

रिकॉर्ड पर पहुंचा सी-फूड निर्यात
सी-फूड निर्यात विकास प्राधिकरण द्वारा जारी आंकड़ों को देखें, तो वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में रिकॉर्ड 72,325.82 करोड़ रुपये (8.28 अरब डॉलर) का इजाफा हुआ है. ऐसा तब है, जबकि इस चीज के लिए सबसे बड़े बाजार अमेरिका को होने वाले निर्यात में तगड़ी गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि, इसके बाद भी ये टॉप निर्यात गंतव्य बना रहा. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा कि सी-फूड निर्यात की मात्रा 19.32 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई. 

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कुल Seafood Export में फ्रोजन झींगे प्रमुख ग्रोथ इंजन बने रहे. इनका योगदार 47,973.13 करोड़ रुपये (5.51 अरब डॉलर) का रहा और ये आंकड़ा कुल निर्यात आय के दो-तिहाई से अधिक है. भारतीय झींगे की खेप की मात्रा में 4.6% और वैल्यू में 6.35% की बढ़ोतरी देखने को मिली है. इनकी वजह से भारत के समुद्री निर्यात में इसका दबदबा और मजबूत हुआ है. 

US को निर्यात में बड़ी गिरावट
हमेशा से भारत के सी-फूड निर्यात के लिए प्रमुख डेस्टिनेशन रहने वाला अमेरिका इस बार भी सबसे आगे रहा है और यहां आयात का कुल मूल्य 2.32 अरब डॉलर रहा. लेकिन अमेरिका को भेजे जाने वाले माल की मात्रा में 19.8% की कमी दर्ज की गई है, जबकि एक्सपोर्ट वैल्यू में 14.5% की गिरावट देखने को मिली है. ये मुख्य रूप से रेसिप्रोकल टैरिफ के प्रभाव को दिखाती है. 

चीन समेत इन देशों में जमकर खरीदारी
अमेरिका को निर्यात में आई गिरावट की भरपाई भारत के लिए अन्य बाजारों ने कर दी, जहां आयात में मजबूत बढ़ोतरी हुई. इस मामले में सबसे आगे चीन रहा, जहां निर्यात मूल्य में 22.7% का तगड़ा इजाफा देखने को मिला है और सी-फूड आइटम्स की मात्रा में 20.1% की बढ़ोतरी हुई है. 

इसके अलावा यूरोपीय संघ को भेजे गए शिपमेंट मूल्य में 37.9% और मात्रा में 35.2% की वृद्धि हुई. इसके अलावा साउथ ईस्ट एशिया को निर्यात मूल्य 36.1% से ज्यादा और मात्रा में 28.2% बढ़ी है. जापान को सी-फूड निर्यात के मूल्य में भी 6.55% की वृद्धि हुई है. 

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भारत का Plan-B कर रहा काम
टैरिफ हो या फिर कोई और ग्लोबल टेंशन, भारत का प्लान-बी लगातार एक्टिव है और इसका अंदाजा सी-फूड निर्यात के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने से लगाया जा सकता है. मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि कई अलग-अलग बाजारों में मजबूत दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है, जो पारंपरिक बाजारों में व्यापारिक चुनौतियों के बीच विविधीकरण की ओर बदलाव का संकेत देती है.

फेवरेट प्रोडक्ट लिस्ट पर नजर डालें, तो फ्रोजन मछली, स्क्विड, कटलफिश, सूखे खाद्य पदार्थ के निर्यात में पॉजिटिव ग्रोथ देखी गई. इसके अलावा फिशमील और फिश ऑयल ने भी अच्छा परफॉर्मेंस किया. आंकड़े झींगा मछली के उत्पादन और नए बाजारों में डायवर्सिफिकेशन का रिकॉर्ड निर्यात में अहम रोल रहा. भले ही अमेरिका को होने वाले शिपमेंट में कमी आई हो.

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