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IMF की GDP रैंकिंग में छठे पायदान पर फिसला भारत, जानिए क्या है कारण

आईएमएफ की वर्ल्‍ड इकोनॉमी आउटलुक के नए आंकड़ों से पता चलता है कि भारत जीडीपी रैंकिंग में फिसलकर छठे पायदान पर पहुंच गया है. इस लिस्ट में सबसे ऊपर अमेरिका और उसके बाद चीन है.

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आईएमएफ लिस्‍ट में भारत को एक पायदान का नुकसान. (Photo: File/ITG)
आईएमएफ लिस्‍ट में भारत को एक पायदान का नुकसान. (Photo: File/ITG)

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की ताजा GDP रैंकिंग में भारत छठे स्थान पर पहुंच गया है. यह बदलाव ऐसे समय पर सामने आया है, जब भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है.

दरअसल, IMF की जीडीपी रैंकिंग में भारत नीचे फिसल कर विश्‍व की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है, जो कि पिछले साल 5वें स्थान पर था. IMF के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में भारत की GDP लगभग 3.92 ट्रिलियन डॉलर, ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था 4 ट्रिलियन डॉलर और जापान की अर्थव्यवस्था 4.44 ट्रिलियन डॉलर तक रहने का अनुमान है. 

वहीं 2026 के लिए IMF की रैंकिंग में भारत की जीडीपी 4.15 ट्रिलियन डॉलर, ब्रिटेन की 4.26 ट्रिलियन डॉलर, जापान की 4.38 ट्रिलियन डॉलर, जर्मनी की 5.45 ट्रिलियन डॉलर, चीन 20.85 ट्रिलियन डॉलर और अमेरिका की 32.38 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है. बता दें, IMF सभी देशों की GDP को डॉलर में मापता है. 

पिछले साल ये थी भारत की रैंकिंग

IMF के नए अनुमान के मुताबिक भारत 6वें नंबर पर आ गया है, जबकि पिछले साल उसने जापान को पीछे छोड़कर चौथी पोजीशन हासिल की थी. वहीं 2024 में भारत टॉप 5 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल था. लेकिन अब ब्रिटेन ने भारत को पीछे छोड़ दिया है. भारत की रैंकिंग में यह गिरावट ऐसे समय में आई है, जब रुपया टूटकर 93 के पार जा पहुंचा है. आइए जानते हैं कि रैंकिंग में गिरावट के असली कारण क्या है? 

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रुपये की कमजोरी: IMF जीडीपी की तुलना अमेरिकी डॉलर में करता है. ऐसे में जब भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है, तो भारत की अर्थव्यवस्था का आकार (GDP) डॉलर में अपने आप छोटा दिखाई देने लगता है. 

एक उदाहरण से समझते हैं, अगर भारत के अंदर उत्पादन और कमाई बढ़ भी रही हो, लेकिन रुपया गिर जाए, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसका मूल्य कम दिखेगा. हाल के समय में रुपये में आई गिरावट ने इसी वजह से भारत की वैश्विक रैंकिंग को प्रभावित किया है. यानी असली अर्थव्यवस्था मजबूत होने के बावजूद 'डॉलर वैल्यू' घटने से भारत की रैंकिंग फिसली है. 

GDP के बेस ईयर में बदलाव: भारत सरकार ने अर्थव्यवस्था को मापने के तरीके को अपडेट करते हुए बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है. बेस ईयर बदलने का मतलब है कि अब अर्थव्यवस्था को नए मानकों और नए डेटा के आधार पर मापा जा रहा है, जिससे आंकड़े पहले के मुकाबले ज्यादा सटीक और वास्तविक हो जाते हैं. हालांकि, इस नए तरीके से जब पुराने वर्षों की GDP को दोबारा कैलकुलेट किया गया, तो कई सेक्टरों में अनुमान थोड़े नीचे आए. इसी कारण से भारत की नॉमिनल GDP पहले के अनुमान से थोड़ी कम दिखाई देने लगी. 

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इस बदलाव के चलते पिछले कुछ वर्षों की GDP में करीब 2 से 4% तक की कमी देखने को मिली. भले ही यह कमी कागजों पर हो, लेकिन जब इसे डॉलर में बदला गया, तो कुल अर्थव्यवस्था का आकार छोटा नजर आया. यही वजह है कि भारत की वैश्विक रैंकिंग पर असर पड़ा और वह छठे पायदान पर पहुंच गया. 

भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे मजबूत

सबसे अहम बात यह है कि भारत अब भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, जहां ग्रोथ करीब 6.5% के आसपास बनी हुई है. अर्थव्यवस्था के जानकार मानते हैं कि यह गिरावट स्थायी नहीं है. इसके पीछे कोई आर्थिक कमजोरी नहीं, बल्कि डेटा और करेंसी से जुड़े बदलाव हैं. भारत की वास्तविक आर्थिक स्थिति अब भी मजबूत बनी हुई है, खासतौर पर तेज विकास दर, बढ़ती खपत और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश इसकी बड़ी ताकत हैं. 

IMF के अनुमान के अनुसार, भारत आने वाले वर्षों में इसी रफ्तार से आगे बढ़ता रहा, तो 2027-28 तक फिर से चौथे स्थान पर पहुंच सकता है. इसके बाद जर्मनी और जापान जैसी अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ते हुए भारत के दुनिया की टॉप-3 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की संभावना भी बनी हुई है.
 

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