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‘भारत‘ के दम पर मंदी के दौर से बाहर निकल रही इंडियन इकोनाॅमी  

माना जा रहा है कि लगातार दूसरे साल आए दमदार मॉनसून से ग्रामीण इलाकों में आय बढ़ने से बिक्री में तेजी आई है. कंपनियों की हिस्सेदारी भी इस दौरान शहरी इलाकों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में बढ़ी है. कंपनियों का दावा है कि ये बढ़त और ज्यादा होती अगर मिनी लॉकडाउन जैसे हालातों के चलते सप्लाई पर असर ना पड़ता.

ग्रामीण इलाकों से इकोनॉमी को सहारा (फाइल फोटो: PTI) ग्रामीण इलाकों से इकोनॉमी को सहारा (फाइल फोटो: PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • गांवों और छोटे शहरों ने दिया इकोनॉमी को सहारा
  • E-Commerce बिक्री में भी इनका बड़ा हिस्सा है
  • गांवों में अब कारों और SUV की अच्छी बिक्री

अक्सर कहा जाता है कि असली भारत तो छोटे शहरों और गांवों में बसता है. तो इस बार असली भारत ने ही इकोनाॅमी को मंदी से बाहर निकालने का बीड़ा उठा रखा है. 

मेट्रो शहरों में बसने वाले ‘इंडिया‘ को पीछे छोड़कर ‘भारत‘ ने खरीदारी के दम पर इकोनाॅमी को जबरदस्त सहारा दिया है. सबसे पहले बात करते हैं ऑनलाइन खरीदारी की जिसने बिक्री के नए रिकॉर्ड बनाए और ये कीर्तिमान छोटे शहरों के दम पर बने हैं. 

रेडसीर कंसल्टिंग की रिपोर्ट 

रेडसीर कंसिल्टंग की एक रिपोर्ट से ऑनलाइन खरीदारी के बारे में कई दिलचस्प आंकड़े सामने आते हैं. इस रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैंः 

  • 15 अक्टूर से 16 नवंबर तक ई-कॉमर्स बिक्री 8.3 अरब डॉलर (करीब 62,000 करोड़ रुपये) के रिकॉर्ड पर पहुंच गई 
  • इस साल 7 अरब डॉलर की बिक्री होने का अनुमान था और ये आंकड़ा 20 परसेंट ज्यादा रहा
  • 2019 में फेस्टिव सीजन के दौरान ई-कॉमर्स कंपनियों की कुल बिक्री 5 अरब डॉलर (करीब 37,000 करोड़ रुपये) थी
  • इस बार कुल बिक्री में 88 फीसदी हिस्सा फ्लिपकार्ट और एमेजाॅन के खाते में गया है
  • फ्लिपकार्ट और एमेजाॅन ने इस एक महीने के दौरान 7.3 अरब डॉलर (करीब 54,000 करोड़ रुपये) की बिक्री की 


छोटे शहरों के दम पर रिकॉर्ड

लेकिन इस रिकॉर्ड उछाल में बड़ा हाथ मेट्रो शहरों का नहीं है बल्कि ये करामात तो छोटे शहरों के दम पर हुई है. दरअसल, एमेजाॅन-फ्लिपकार्ट की इस बिक्री में हिस्सेदारी से खरीदारी का ट्रेंड समझना आसान है.

  • कुल बिक्री में फ्लिपकार्ट की हिस्सेदारी 58 परसेंट रही
  • वहीं एमेजाॅन का 30 फीसदी बिक्री पर कब्जा रहा
  • खास बात है कि फ्लिपकार्ट का असर छोटे शहरों में ज्यादा है और इसकी ज्यादा हिस्सेदारी के मायने हैं कि वहां से इस बार जमकर खरीदारी हुई है
  • वहीं एमेजाॅन की पकड़ मेट्रो शहरों में मजबूत है इसलिए बड़े शहरों की कम खरीदारी के चलते अमेजन का हिस्सा कम रहा है

कोरोना का असर 

लेकिन ऐसा भी नहीं है कि कोरोना का कोई असर इस बार की ई-कॉमर्स सेल पर ना दिखा हो. प्रति व्यक्ति खरीदारी में इस बार कमी आई है. रेडसीर के मुताबिकः 

  • इस बार औसतन ग्राॅस मर्चेंडाइज वैल्यू (जीएमवी) 6600 रुपए रही, जो पिछले साल 7450 रुपये थी
  • कुल खरीदारी में बढ़ोतरी की वजह इस बार ई-कॉमर्स से जुड़ने वाले 4 करोड़ नए ग्राहक थे
  • इस बार 10 में से हर 4 ग्राहक पहली बार खरीदारी करने वाले थे
  • वहीं 90 परसेंट ऑर्डर गैर मेट्रो शहरों से आए थे

इसे देखें: आजतक LIVE TV 

डिस्काउंट और ईएमआई से मिली मदद 

इस बार खरीदारी में बढ़ोतरी की वजह डिस्काउंट्स, बैंकों से भागीदारी के जरिए ईएमआई पर बिक्री और कई प्रोडक्ट्स की एक्सक्लूसिव लॉन्चिंग को माना जा रहा है. छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों का ये जलवा केवल ऑनलाइन शॉपिंग तक सीमित नहीं रहा. इकोनाॅमी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण कार बाजार को भी इन्हीं इलाकों ने मदद की है. 

BIMARU राज्यों का योगदान 

  • कारों की कुल बिक्री इस बार जहां करीब 17 परसेंट बढ़ी है, वहीं प्रति व्यक्ति आय में फिसड्डी राज्यों में ये बढ़त 27 फीसदी रही है
  • बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे बीमारु (BIMARU) कहे जाने वाले बाजारों में ये बढ़त 25 फीसदी से ज्यादा रही है
  • संपन्न माने जाने वाले पश्चिमी भारत में बढ़त 19 परसेंट
  • पूर्वी भारत में 16 फीसदी, जबकि दक्षिण भारत में महज 7 फीसदी रही है
ग्रामीण इलाकों में कारों की बिक्री बढ़ी

वहीं कंपनियों का दावा है कि ये बढ़त और ज्यादा होती अगर मिनी लॉकडाउन जैसे हालातों के चलते सप्लाई पर असर ना पड़ता. माना जा रहा है कि लगातार दूसरे साल आए दमदार मॉनसून से ग्रामीण इलाकों में आय बढ़ने से ये तेजी आई है. कंपनियों की हिस्सेदारी भी इस दौरान शहरी इलाकों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में बढ़ी है. मारुति की कुल बिक्री में ग्रामीण इलाकों की हिस्सेदारी 2 फीसदी बढ़कर 41 परसेंट हो गई है, जबकि शहरी इलाकों में ये 2 परसेंट कम होकर 32 फीसदी रह गई है. टाटा मोटर्स की ग्रामीण इलाकों में बिक्री 4 से 5 परसेंट बढ़कर 43 फीसदी और महिंद्रा एंड महिंद्रा की भी 4 से 5 परसेंट बढ़कर 53 फीसदी हुई है. 

ग्रामीण इलाकों में एसयूवी पर जोर 

ग्रामीण इलाकों में सबसे ज्यादा बिक्री एसयूवी (SUVs) की हो रही है. अब कंपनियां इन इलाकों में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए ज्यादा शोरूम भी खोल रही हैं. यानी साफ है कि कृषि के बूते भारतीय इकोनाॅमी कमाल कर सकती है. अब अगर किसानों की तरक्की के लिए सरकार कुछ और कदम उठाती है तो फिर अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार का सपना जल्द साकार हो सकता है. 

 

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