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Income Tax Return: ITR भरने के लिए कैसे चुनें सही फॉर्म? यहां जानें इसकी ABCD

Income Tax Return Filing: इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय सबसे पहले लोगों को इस बात पर कन्फ्यूजन हो जाता है कि वे किस फॉर्म का चयन करें. एक्सपर्ट समझा रहे हैं आईटीआर फॉर्म के मायने...ताकि आपको नहीं हो आईटीआर भरने मे कोई दिक्कत.

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प्रोफेशन, इनकम सोर्स के हिसाब से बदल जाते हैं फॉर्म (Photo: Getty) प्रोफेशन, इनकम सोर्स के हिसाब से बदल जाते हैं फॉर्म (Photo: Getty)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • शुरू हो गया इनकम टैक्स रिटर्न भरने का सीजन
  • कई प्रकार के होते हैं इनकम टैक्स रिटर्न के फॉर्म

इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) फाइल करने का सीजन शुरू हो चुका है. लोगों को कंपनियों से फॉर्म-16 (Form-16) मिलने लगे हैं और इसके साथ ही इनकम टैक्स पोर्टल (Income Tax Portal) पर ट्रैफिक बढ़ने लगा है. हालांकि इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने में एक जरूरी बात यह है कि आप सही फॉर्म का चयन करें. गलत फॉर्म भरने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) आपके रिटर्न को डिफेक्टिव बता सकता है.  इनकम टैक्स रिटर्न के 6 टाइप के फॉर्म हैं. किस फॉर्म का चयन करें, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी आय कैसी है, आप किस कैटेगरी के करदाता हैं आदि. आइए जानते हैं कि फॉर्म का चयन करने के बारे में एक्सपर्ट क्या कहते हैं...टैक्स कंसल्टिंग फर्म एकेएम ग्लोबल (AKM Global) के हेड ऑफ टैक्स मार्केट Yeeshu Sehgal ने इसके बारे में विस्तार सो जानकारी दी है.

ITR-1: यह फॉर्म वैसे भारतीय नागरिकों के लिए है, जिनकी आमदनी 50 लाख रुपये तक है. यह आमदनी सैलरी, फैमिली पेंशन, एक आवासीय संपत्ति आदि से होनी चाहिए. लॉटरी या रेस कोर्स से हुई आय इस कैटेगरी में नहीं आती है. वहीं खेती से 5,000 रुपये तक की आय होने पर भी आईटीआर-1 सही फॉर्म है. हालांकि अगर कोई इंसान किसी कंपनी में डाइरेक्टर है या किसी अनलिस्टेड कंपनी में उसके शेयर हैं, तो वह आईटीआर-1 नहीं भर सकता है.
 
ITR-2: यह फॉर्म वैसे लोगों और अविभाजित हिंदू परिवारों के लिए है, जिनकी आय 50 लाख रुपये से ज्यादा है और वे किसी बिजनेस से प्रॉफिट नहीं कमा रहे हैं. इसमें एक से ज्यादा आवासीय संपत्ति, इन्वेस्टमेंट पर हुए कैपिटल गेल या लॉस, 10 लाख रुपये से ज्यादा की डिविडेंड इनकम और खेती से हुई 5000 रुपये से ज्यादा की कमाई की जानकारी देनी होती है. अगर प्रॉविडेंट फंड से ब्याज के तौर पर कमाई हो रही है, तब भी यही फॉर्म भरा जाता है.
 
ITR-3: यह फॉर्म वैसे लोगों और अविभाजित हिंदू परिवारों के लिए है, जिन्हें किसी बिजनेस के प्रॉफिट से कमाई हो रही है. इसमें आईटीआर-1 और आईटीआर-2 में दी जाने वाली सभी इनकम कैटगरी की जानकारी देनी होती है. अगर कोई व्यक्ति फर्म में पार्टनर है तो उसे अलग से आईटीआर फॉर्म भरना पड़ता है. शेयर या प्रॉपर्टी की बिक्री से कैपिटल गेन होने अथवा ब्याज या डिविडेंड से इनकम होने पर भी यही फॉर्म भरना होता है.

ITR-4: यानी सुगम: यह फॉर्म वैसे लोगों, अविभाजित हिंदू परिवारों और एलएलपी को छोड़ बाकी कंपनियों के लिए है, जिनकी टोटल इनकम 50 लाख रुपये से ज्यादा है और उन्हें ऐसे सोर्सेज से कमाई हो रही है जो 44एडी, 44एडीए या 44एई जैसे सेक्शंस के दायरे में आते हैं. यह फॉर्म वैसे लोगों के लिए नहीं है, जो किसी कंपनी में डाइरेक्टर हैं या इक्विटी शेयरों में उनका निवेश है अथवा खेती से 5000 रुपये से ज्यादा की कमाई है.
 
ITR-5: इनकम टैक्स रिटर्न भरने का यह फॉर्म एलएलपी कंपनियों, एसोसिएशन ऑफ पर्सन्स, बॉडी ऑफ इंडिविजुअल्स, आर्टिफिशियल ज्यूरीडिकल पर्सन, को-ऑपरेटिव सोसाइटी और लोकल अथॉरिटी के लिए है.

ITR-6: यह फॉर्म उन कंपनियों के लिए है, जिन्होंने सेक्शन 11 के तहत छूट का दावा नहीं किया हो. सेक्शन 11 के तहत वैसी आय पर टैक्स से छूट मिलती है, जो किसी परमार्थ या धर्मार्थ कार्य के लिए ट्रस्ट के पास रखी संपत्ति से हो रही हो.

 

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