अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने यूरोपीय यूनियन को लेकर बड़ा दावा किया है. उन्होंने दावोस में दिए एक इंटरव्यू में कहा कि यूरोपीय सहयोगियों ने रूसी तेल के आयात पर भारत के खिलाफ संयुक्त टैरिफ लगाने से इनकार कर दिया था, क्योंकि वे भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम रूप देना चाहते थे.
स्कॉट बेसेंट का यूरोप पर किया गया यह व्यंग ऐसे वक्त में आया है, जब यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष उर्सला वॉन डेर लेयेन की भारत यात्रा शनिवार से शुरू हो रही है. जिसका मकसद भारत के साथ सबसे बड़ी डील करना है.
ट्रंप के खास ने पॉलिटिको को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि 2025 से तीसरे देशों के खरीदारों पर 25 प्रतिशत जुर्माना लागू करने के अमेरिकी प्रयास 'सफल' रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि मैं यह भी बताना चाहूंगा कि हमारे दिखावटी यूरोपीय सहयोगियों ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था, क्योंकि वे भारत के साथ यह बड़ा व्यापार समझौता करना चाहते थे.
युद्ध को फंडिंग करने का आरोप
इस इंटरव्यू के दौरान स्कॉट बेसेंट ने यूरोप पर भारतीय रिफाइनरियों से रूसी तेल उत्पाद खरीदकर 'खुद के खिलाफ युद्ध को फंडिंग करने' का भी आरोप लगाया. वह यह कहने का प्रयास कर रहे थे कि एक तरफ यूरोप युक्रेन की तरफ है और दूसरी ओर वह रूसी तेल के खिलाफ टैरिफ न लगाकर रूस को फंड भी कर रहा है. बेसेन्ट ने आगे कहा कि विडंबना और मूर्खता की पराकाष्ठा यह है कि अनुमान लगाइए कि रिफाइनिंग उत्पाद कौन खरीद रहा था? यूरोपीय लोग...
भारत पर 25 फीसदी टैरिफ?
इस इंटरव्यू के दौरान स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया कि भारत पर लगा 25 फीसदी टैरिफ का जुर्माना हटाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि हमाना 25 फीसदी टैरिफ बहुत सफल रहा है. रूस से भारत द्वारा तेल की खरीद ठप हो गई है. टैरिफ अभी भी लागू है, मुझे लगता है कि अब इन्हें हटाने का समय आ चुका है.
गौरतलब है कि अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है , जिसमें रूस से तेल खरीद पर 25 प्रतिशत का जुर्माना भी शामिल है. नई दिल्ली ने अमेरिकी कार्रवाई को बार-बार 'अनुचित, अन्यायपूर्ण और तर्कहीन' बताया है और साथ ही यह भी कहा है कि उसकी एनर्जी खरीद राष्ट्रीय हित के लिए है, ना कि किसी को फंडिंग के लिए.
500 फीसदी टैरिफ प्रस्ताव पर क्या बोले बेसेंट
रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने रूसी तेल की द्वितीयक खरीद और फिर रिसेल पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने के लिए एक विधेयक प्रस्तावित किया है. इस बिल पर बोलते हुए बेसेंट ने फॉक्स न्यूज को बताया कि प्रस्ताव सीटने के सामने है और हम देखेंगे कि यह पारित होता है या नहीं. हमारा मानना है कि ट्रंप को उस अधिकार की आवश्यकता न हीं है, वह इसे IEEPA के तहत कर सकते हैं, लेकिन सीनेट उन्हें वह अधिकार देना चाहती है.
बता दें इस साल दिसंबर में, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और सरकारी स्वामित्व वाली रिफाइनरियों द्वारा मॉस्को से कच्चे तेल के आयात में भारी कटौती के बाद, भारत रूसी ईंधन के खरीदारों में तीसरे स्थान पर आ गया है.