एक याचिका के जरिये आज सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अडानी-हिंडनबर्ग मामले को उठाया गया. याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि मामला 28 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था, लेकिन इसे लगातार टाला जा रहा है और सूचीबद्ध नहीं किया जा रहा है. उन्होंने अदालत से इस मामले को जल्द लिस्टिंग और सुनवाई की मांग की.
जिसके बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ ने अडानी-हिंडनबर्ग मामले में सभी पक्षों को बुधवार तक अंतिम दलीलें दाखिल करने को कहा है. इसके साथ ही मामले को सूचीबद्ध करने में देरी को लेकर मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह रजिस्ट्रार से इसकी जांच करने के लिए कहेगी.
सेबी भी कर रही है मामले की जांच
बता दें, इससे पहले भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक रिपोर्ट दाखिल कर अवगत कराया था कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट से जुड़ी 24 जांचों में से 22 की जांच पूरो हो चुकी है. जबकि दो मामलों में अभी और जांच की जरूरत है. अदालत के 2 मार्च, 2023 के आदेश के निर्देशों के अनुपालन के तहत सेबी 24 मामलों की जांच कर रही है.
इसी साल मई महीने में सुप्रीम कोर्ट ने हिंडनबर्ग रिपोर्ट की जांच करने के लिए सेबी को तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया था. शीर्ष अदालत ने दो मार्च को पूंजी बाजार नियामक सेबी को निर्देश दिया था कि वह हिंडनबर्ग रिपोर्ट के मद्देनजर अडानी समूह द्वारा प्रतिभूति कानून के किसी भी उल्लंघन की जांच करे.
6 सदस्यीय कमेटी का गठन
सुप्रीम कोर्ट ने 2 मार्च को अडानी समूह की कंपनियों पर हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट से उठे सवाल पर एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था. समिति में शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एएम सप्रे की अध्यक्षता में 6 सदस्य शामिल थे.
शीर्ष अदालत ने तब सेबी से दो महीने के भीतर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था. सुप्रीम कोर्ट उस समय हिंडनबर्ग रिपोर्ट से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए नियामक तंत्र से संबंधित एक समिति का गठन भी शामिल था.
गौरतलब है कि इसी साल 24 जनवरी को अमेरिक शॉर्ट सेलर फर्म हिंडनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में अडानी ग्रुप पर कई गंभीर आरोप लगाए थे. जिसमें कहा गया था कि गलत तरीके शेयर से दाम बढ़ाए गए हैं. जिसके बाद अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली. जिससे अभी तक कई कंपनियां नहीं उभर पाई हैं.