देश के बजट को लेकर जहां एकतरफ मोदी सरकार के मंत्री तारीफों के पुल बांध रहें हैं. वहीं ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी बजट की तारीफ तो की है लेकिन वह अपने राज्य ओडिशा के संदर्भ में बजट से असंतुष्ट नजर आ रहे हैं और इसे ओडिशा के लिए झटका बताया है.
पटनायक ने कहा कि कोरोना काल में पेश किए गए इस बजट के सामने काफी चुनौतियां हैं. हालांकि उन्होंने बजट की खूबियां भी गिनाईं. उन्होंने कहा कि विकास के लिए पूंजी निवेश पर जोर, विकासात्मक वित्तीय संस्थान का पुनरुद्धार, कोरोना वैक्सीन के लिए धन आवंटन, आत्मनिर्भर भारत का नजरिया, विकास की गति बढ़ाने के लिए राजकोषीय घाटे का विस्तार करने का निर्णय, बजट की अच्छी बातों में शामिल है.
लेकिन ओडिशा को लेकर उन्होंने बजट को झटका बताया. उन्होंने कहा कि सेंट्रल टैक्स के हिस्से में कटौती के बाद इस साल राज्य को 10 हजार 8 सौ करोड़ का नुकसान होगा. 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के मुताबिक आने वाले पांच सालों में राज्य के टैक्स के हिस्से में 4.629 प्रतिशत से 4.528 प्रतिशत की गिरावट आएगी. इसका राज्य पर बुरा असर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि ओडिशा में भी अन्य राज्यों की तरह पूंजी निवेश की जरूरत है.
उन्होंने कहा कि सामाजिक सहायता के कार्यक्रमों, स्थानीय निकायों के लिए धन आवंटन और बढ़ाने की जरूरत है. सीएम पटनायक ने कहा डीजल और पेट्रोल पर सेस लगाने की नई शुरुआत से कर (टैक्स) का केंद्रीकरण होगा जो राज्य की अर्थव्यव्सथा पर बुरा प्रभाव डालेगा. उन्होंने कहा कि महिलाओं, किसानों और एमएसएमई को कर्ज देने के लिए बैंकों को और जवाबदेह बनाया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि मुझे इस बात की खुशी है कि केंद्र सरकार ने यूनियन बजट को ग्रीन और डिजिटल कर दिया है. ओडिशा में यह पिछले साल से होता आ रहा है. साथ ही मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि महिला सशक्तिकरण के लिहाज से बजट में मिशन शक्ति की झलक दिखी है. साल 2011-12 के बजट में भी ओडिशा की ममता योजना को जगह मिली थी. यह काफी अच्छा है कि ओडिशा देश के लिए उदाहरण स्थापित कर रहा है. मुझे उम्मीद है कि मिशन शक्ति और ममता योजना के बाद महिला सशक्तिकरण के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण दिया जाएगा. हम इसके लिए लड़ाई जारी रखेंगे.