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बजट: पिछले कार्यकाल के शुरुआती दौर में ही आया था स्किल इंडिया, क्या अब मिलेगा बूस्टर?

स्किल इंडिया पिछली मोदी सरकार में शुरू की गई एक महत्वाकांक्षी योजना है, लेकिन इसमें लक्ष्य के अनुरूप सफलता नहीं मिल पाई है. इसलिए यह देखना होगा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस योजना को और आगे बढ़ाने के लिए क्या उपाय करती हैं.

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स्किल इंडिया को और आगे बढ़ाने की जरूरत (प्रतीकात्मक तस्वीर)
स्किल इंडिया को और आगे बढ़ाने की जरूरत (प्रतीकात्मक तस्वीर)

स्किल इंडिया पिछली मोदी सरकार में शुरू की गई एक महत्वाकांक्षी योजना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 जुलाई 2015 को स्किल इंडिया मिशन की शुरुआत की थी. इसका लक्ष्य देश के युवाओं को कुशल बनाकर उनके लिए रोजगार अवसरों को बढ़ाना है. इसी के तहत ही साल 2016 में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना शुरू की गई थी. हालांकि, इन सबमें लक्ष्य के अनुरूप सफलता नहीं मिल पाई. इसलिए यह देखना होगा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस योजना को और आगे बढ़ाने के लिए क्या उपाय करती हैं.

मोदी सरकार की प्राथमिकता

युवाओं को कौशल बनाने की मोदी सरकार की प्राथमिकता कितनी है, इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि आजादी के बाद पहली बार मोदी सरकार ने कौशल विकास एवं उद्य‍मिता मंत्रालय (MSDE) की स्थापना साल 2014 में की. मंत्रालय ने स्किल इंडिया में आने वाले नेशनल स्कि‍ल डेवलपमेंट मिशन, नेशनल पॉलिसी फॉर स्किल डेवलपमेंट ऐंड आंत्रप्रेन्योरशिप, स्किल लोन स्कीम और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत साल 2022 तक कुल 40 करोड़ लोगों को कुशल बनाने का लक्ष्य रखा है.

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प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) पीएम मोदी की एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसकी शुरुआत 2016 में हुई थी. इसके तहत 40 सेक्टर में कोर्सेज का संचालन किया जाता है.  इसका उद्देश्य युवाओं में कौशल विकास कर उनके लिए रोजगार अवसरों को बढ़ाना है. इससे युवाओं के रोजगार के लायक योग्यता और तकनीकी विशेषता पैदा होती है, ताकि वह पूरी तरह से नौकरी, रोजगार के लिए तैयार हो सके और कंपनियों को उनके प्रशिक्षण पर पैसा न खर्च करना पड़े.

ये हैं चुनौतियां

समूचे स्किल इंडिया मिशन के तहत 2022 तक 40 करोड़ लोगों को रोजगार पाने लायक स्किल ट्रेनिंग देने का लक्ष्य है. PMKVY में कंस्ट्रक्शन, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं हार्डवेयर, फूड प्रोसेसिंग,फर्नीचर और फिटिंग, हैंडीक्रॉफ्ट, जेम्स एवं ज्वेलरी और लेदर टेक्नोलॉजी जैसे करीब 40 तकनीकी क्षेत्र दिये गए हैं. इसके तहत चार साल (2016-20) में एक करोड़ युवाओं को स्किल्ड बनाने का लक्ष्य था. लेकिन अभी तक 50 लाख युवाओं को ही कुशल बनाया जा सका है. इसके लिए 12,000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया.

इस योजना के तहत पूरे देश मे 2500 से भी ज्यादा सेन्टर खोले गए. कई लोगों ने अपना नौकरी छोड़कर सेन्टर खोलने में पैसा लगाया. लेकिन कई सेंटर बंद हो गए हैं. सरकार द्वारा स्किल इंडिया की पॉलिसी में बार-बार बदलाव की वजह से कई फ्रैंचाइजी सेंटर बंद हो गए हैं या फिर कुशल युवाओं को काम नहीं मिल रहे है.

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इन सेंटर से कौशल हासिल करने वाले युवाओं के करीब 57 फीसदी का ही प्लेसमेंट हो पाया है. ऐसे सेंटर चलाने वाले कई लोगों का आरोप है प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत देशभर में चलने वाले सेंटरों को सरकार काम नहीं दे रही है और काम सिर्फ बड़े-बड़े उद्योग घरानों को मिल रहा है.

अब जरूरत है बूस्टर की

देश में बेरोजगारी का जो आलम है, उसे देखते हुए वास्तव में ऐसी योजनाओं को और आगे बढ़ाने की जरूरत है. देश के डिग्री धारी युवाओं का बड़ा हिस्सा वास्तव में नौकरी लायक ही नहीं होता. एसोचैम की एक स्टडी के मुताबिक 94 फीसदी एमबीए ग्रेजुएट नौकरी के लायक नहीं है. इसी तरह, टेक इंडस्ट्री के दिग्गजों का कहना है कि 94 फीसदी आईटी ग्रेजुएट बड़ी कंपनियों में काम करने के लायक नहीं हैं. इसलिए स्किल इंडिया और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना को और मजबूती देने की जरूरत है. इस योजना की सभी तरह की खामियों को दूर करना होगा. यह योजना अभी लक्ष्य से काफी पीछे है, जबकि जरूरत इसके दायरे को और बढ़ाने की है. उम्मीद है कि वित्त मंत्री बजट में इसके लिए कोई घोषणा करेंगी.

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