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जनगणना करने पहुंचे कर्मियों को ग्रामीणों ने समझा चोर, लाठी-डंडे लेकर खदेड़ा

बिहार के मोतिहारी जिले के हसनाबाद गांव में रविवार रात जनगणना के लिए पहुंचे कर्मियों को ग्रामीणों ने चोर समझ लिया और लाठी-डंडे लेकर उनके पीछे दौड़ पड़े. ग्रामीणों का कहना है कि रात 10 बजे लोगों को जगाकर जानकारी मांगी गई, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई. कई लोगों ने रात में सर्वेक्षण पर आपत्ति जताई और जल्दबाजी में खानापूर्ति का आरोप लगाया. वहीं जनगणना कर्मियों का कहना है कि पहले से तैनात कर्मियों की लापरवाही के कारण अतिरिक्त टीम को देर रात सर्वेक्षण पूरा करने भेजा गया था.

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रात दस बजे जाने से ग्रामीण नाराज थे. Photo Screengrab
रात दस बजे जाने से ग्रामीण नाराज थे. Photo Screengrab

बिहार के मोतिहारी जिले के पकड़ीदयाल प्रखंड अंतर्गत सिरहा पंचायत के वार्ड संख्या-5 हसनाबाद में रविवार रात जनगणना कार्य के दौरान अफरा-तफरी मच गई. देर रात सर्वेक्षण करने पहुंचे जनगणना कर्मियों को ग्रामीणों ने चोर समझ लिया. स्थिति ऐसी बन गई कि ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर उनके पीछे दौड़ पड़े और कर्मियों को वहां से भागना पड़ा.

रात दस बजे गए थे
ग्रामीणों के अनुसार, रात करीब 10 बजे कुछ जनगणना कर्मी मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर बस्ती में पहुंचे और घर-घर जाकर लोगों को जगाकर जानकारी लेने लगे. उस समय अधिकांश लोग गहरी नींद में थे. अचानक अजनबियों को घरों के आसपास घूमते देख लोगों को संदेह हुआ और उन्होंने उन्हें चोर समझ लिया. देखते ही देखते गांव में हड़कंप मच गया और कई ग्रामीण उन्हें खदेड़ने लगे.

रात में आने पर सवाल
बाद में जनगणना कर्मियों ने अपनी पहचान बताई और कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधियों को साथ लेकर दोबारा बस्ती में पहुंचे. इसके बावजूद कई ग्रामीणों ने रात के समय जनगणना संबंधी सवालों के जवाब देने से इनकार कर दिया. ग्रामीणों का कहना था कि दिनभर मजदूरी और कामकाज करने के बाद लोग रात में जल्दी सो जाते हैं, ऐसे में देर रात सर्वेक्षण करना उचित नहीं है.

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क्या है ग्रामीणों के आरोप?
हसनाबाद निवासी गोरखनाथ साह, रोहित कुमार और दीपक कुमार शाह ने बताया कि जनगणना कर्मियों ने रात में लोगों को जबरन जगाकर जानकारी मांगी. ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ कर्मियों ने लोगों से कहा कि यदि उन्होंने जानकारी नहीं दी तो प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिलेगा, राशन कार्ड से नाम कट सकता है और अन्य सरकारी सुविधाएं भी प्रभावित हो सकती हैं.

ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जनगणना की निर्धारित अवधि 2 मई से 31 मई तक थी, फिर अंतिम समय में रात के दौरान इतनी बड़ी आबादी का सर्वेक्षण क्यों किया गया. उनका आरोप है कि कार्य को जल्दबाजी में पूरा करने के लिए केवल कागजी खानापूर्ति की गई. ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कई मकान अब भी सर्वेक्षण से वंचित रह गए हैं. गोरखनाथ साह ने बताया कि 31 मई को सर्वेक्षण कार्य पूरा होने की बात कही गई थी, लेकिन 1 जून की सुबह भी कुछ लोग सर्वेक्षण और मकानों पर मार्किंग करने पहुंचे थे.

आखिर रात को क्यों गए?
वहीं जनगणना कर्मी राजेश कुमार ने बताया कि संबंधित क्षेत्र की जिम्मेदारी शुभम कुमार और सुरेश प्रसाद को दी गई थी. उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों कर्मियों की लापरवाही के कारण सर्वेक्षण कार्य समय पर पूरा नहीं हो सका. इसी वजह से अतिरिक्त कर्मियों को बुलाया गया और देर रात तक अभियान चलाकर जनगणना कार्य पूरा करने का प्रयास किया गया. मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है.

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