
गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित भारत पर्व के अंतर्गत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की चयनित झांकियों का प्रदर्शन लाल किले में किया जाएगा. इस प्रतिष्ठित आयोजन में बिहार की झांकी को भी शामिल किया गया है जो राज्य की सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक सामर्थ्य को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करेगी.
इस साल बिहार की झांकी का विषय- 'मखाना: लोकल से ग्लोबल की थाली में सुपरफूड' है. ये झांकी बिहार के ‘सफेद सोना’ मखाना की यात्रा को राष्ट्रीय मंच पर जीवंत रूप से प्रस्तुत करेगी जो मिथिलांचल के तालाबों से निकलकर वैश्विक सुपरफूड के रूप में स्थापित हो चुका है.
दरअसल, बिहार दुनिया के कुल मखाना उत्पादन में 85 से 90 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है. झांकी के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक श्रम और 'सफेद सोना' कहे जाने वाले मखाना की आर्थिक यात्रा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने पेश किया जा रहा है.
बिहार का मखाना, जिसे फॉक्स नट भी कहा जाता है. अब केवल स्थानीय उत्पाद नहीं रह गया है. झांकी में इसके सुपरफूड बनने के सफर को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है. साल 2022 में 'मिथिला मखाना' को मिले जीआई (GI) टैग ने इसे वैश्विक बाजारों में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है. भारत पर्व के जरिए "एक भारत, श्रेष्ठ भारत" की भावना को साकार करते हुए ये झांकी बताती है कि कैसे राज्यों की विशिष्ट पहचान, पारंपरिक ज्ञान आधुनिक विकास की यात्रा का हिस्सा बन गया है.

झांकी में दिखेगी मिथला पेंटिंग
इस झांकी की संरचना को दो मुख्य भागों में बांटा गया है. पहले भाग में कमल के पत्तों के बीच चमकता हुआ सफेद 'लावा मखाना' और जीआई टैग का प्रतीक नजर आएगा. झांकी के किनारों पर की गई पारंपरिक मिथिला पेंटिंग की बॉर्डर इसकी सुंदरता में चार चांद लगाती है. ये दृश्य न केवल कला को दर्शाता है, बल्कि बिहार की उस सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती देता है जो सदियों पुरानी है और आज भी प्रासंगिक है.
महिलाओं की भागीदारी
झांकी के दूसरे हिस्से में मखाना तैयार करने की कठिन प्रक्रिया को जीवंत किया गया है. यहां मखाना की कटाई, बीज संग्रह, ग्रेडिंग और भुनाई को दिखाया जाएगा.
विशेष रूप से मिट्टी के चूल्हे पर मखाना भूनती महिला और मूसल से उसे फोड़ता पुरुष पारंपरिक कौशल का उदाहरण पेश करते हैं. ये दृश्य संदेश देता है कि मखाना का उत्पादन केवल खेती नहीं, बल्कि विरासत, श्रम और महिला उद्यमिता का एक सफल संगम है.

मखाना बोर्ड से किसानों को मिलेगी ताकत
केंद्रीय बजट 2025–26 में बिहार के मखाना किसानों के लिए केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक घोषणा की गई थी. बिहार में 'राष्ट्रीय मखाना बोर्ड' की स्थापना के लिए ₹475 करोड़ के विकास पैकेज को मंजूरी दी गई.
इसका मुख्य उद्देश्य मखाना के उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को आधुनिक बनाना है, ताकि किसानों की आय में स्थायी वृद्धि हो सके. ये बोर्ड मखाना को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
झांकी से बड़ा संदेश
भारत पर्व में बिहार की ये झांकी महज एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक आत्मविश्वास है कि स्थानीय उत्पाद भी दुनिया पर राज कर सकते हैं. झांकी ये स्पष्ट करती है कि सरकारी नीति और तकनीक के समर्थन से किसान, महिला श्रमिक और छोटे उद्यमी विकास की मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं. मखाना अब 'तालाब का उत्पाद' होने के साथ-साथ भारत की वैश्विक पहचान बन चुका है जो इस गणतंत्र दिवस पर पूरी दुनिया के सामने गौरव से खड़ा होगा.