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हिजाब से चर्चा में आई नुसरत ने जॉइन की नौकरी, पटना के इस अस्पताल में मिली ड्यूटी

पटना हिजाब विवाद से जुड़ी डॉक्टर नुसरत प्रवीण ने 23 दिन बाद बिहार स्वास्थ्य विभाग में औपचारिक रूप से ड्यूटी जॉइन कर ली है. विभाग से हुई सीधी जॉइनिंग के बाद उन्हें पटना सिटी के गुरु गोबिंद सिंह अस्पताल में पोस्टिंग दी गई है.

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नीतीश कुमार ने नुसरत का हिजाब खींच दिया था. (Photo- Screengrab)
नीतीश कुमार ने नुसरत का हिजाब खींच दिया था. (Photo- Screengrab)

पटना के सदर अस्पताल से जुड़े हिजाब मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है. 15 दिसंबर की घटना के बाद करीब 23 दिनों तक ड्यूटी से दूर रहीं डॉक्टर नुसरत प्रवीण ने 7 जनवरी को बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग में औपचारिक रूप से जॉइनिंग कर ली. विभागीय सूत्रों के मुताबिक, उनकी सीधी जॉइनिंग कराई गई और उन्हें पटना सिटी स्थित गुरु गोबिंद सिंह (GGS) अस्पताल में तैनात किया गया है.

जानकारी के अनुसार, डॉ नुसरत प्रवीण का मेडिकल 6 जनवरी को पटना सिविल सर्जन के यहां हुआ था. हालांकि, वह मेडिकल के लिए खुद सिविल सर्जन कार्यालय नहीं पहुंची थीं. विभागीय प्रक्रिया के तहत उनके मेडिकल पर सिविल सर्जन ने सिर्फ साइन किए. इसके बाद अंतिम समय-सीमा के भीतर उनकी जॉइनिंग पूरी कर दी गई. इस पूरे मामले पर पटना सिविल सर्जन ने कैमरे पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया.

यह भी पढ़ें: 'बुर्का पहनने वाली सभी डॉक्टरों को झारखंड बुला लें', नुसरत को 3 लाख सैलरी का ऑफर देने पर भड़के BJP नेता

इस बीच, डॉ नुसरत प्रवीण ने झारखंड सरकार की ओर से मिला एक हाई-प्रोफाइल ऑफर भी ठुकरा दिया. झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने उन्हें 3 लाख रुपये मासिक वेतन, सरकारी फ्लैट और मनपसंद पोस्टिंग का प्रस्ताव दिया था, लेकिन डॉ नुसरत ने बिहार में ही सेवा जारी रखने का फैसला किया.

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ शिकायतें

हिजाब विवाद को लेकर कानूनी और राजनीतिक घमासान भी तेज रहा. देश के अलग-अलग हिस्सों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई गईं. PDP नेता इल्तिजा मुफ्ती ने श्रीनगर में 'जीरो FIR' दर्ज कराई, जबकि तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में भी शिकायतें दी गईं. आरोप लगाए गए कि यह मामला महिलाओं की गरिमा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन है.

विपक्ष ने नीतीश कुमार पर उठाए सवाल

विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला. RJD और कांग्रेस ने इसे महिलाओं के सम्मान के खिलाफ बताते हुए मुख्यमंत्री की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाए. वहीं, इस घटना को अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी जगह मिली और अल जजीरा समेत कई विदेशी मीडिया संस्थानों ने भारत में हुए विरोध प्रदर्शनों को प्रमुखता से रिपोर्ट किया.

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